गोली लगी फिर भी झंडा नहीं छोड़ा…वो महिलाएं जिन्होंने तिरंगे के लिए सब दांव पर लगा दिया
घायल पति के हाथ पर कपड़े की पट्टी बाँध, हाथों में तिरंगा थामे वे निडर होकर आगे बढ़ीं। उनकी आँखों के आक्रोश ने अंग्रेज़ अफ़सरों को भयभीत कर दिया और उन्होंने बेखौफ होकर तिरंगा फहराया। आज़ादी के इस संघर्ष में उषा मेहता का त्याग भी अविस्मरणीय है, जिन्हें 4 साल तक जेल में अमानवीय यातनाएँ…

