कानपुर की होली में गूंजता था ‘रंडुवा सम्मेलन’:1947 में हुई शुरुआत, नेहरू के करीबियों की भी होती थी नजरबंदी; दिग्गज नेता बनते थे कैदी
गंगा-जमुनी तहजीब और अलमस्त मिजाज के लिए मशहूर कानपुर की होली का इतिहास बेहद रोचक रहा है। आज भले ही होली हुड़दंग और शोर-शराबे तक सीमित होती नजर आती हो, लेकिन आजादी के ठीक बाद शहर में ‘रंडुवा सम्मेलन’ जैसी बौद्धिक और हास्यपरक परंपरा जीवित थी। वर्ष 1947-48 के आसपास शुरू हुआ यह आयोजन करीब…


