बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (बीआईसी) में शनिवार को इंडियन रेसिंग लीग और एफ4 इंडियन चैंपियनशिप के आयोजन के साथ 13 साल बाद पहली बार एफआईए स्तर की मोटर रेसिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई। इंडियन रेसिंग महोत्सव के तहत इस सर्किट पर हिस्सा लेने वाले ड्राइवरों ने ट्रैक की जमकर तारीफ की। हालांकि आयोजकों का मानना है कि यहां दोबारा फॉर्मूला वन रेस आयोजित करने से पहले ट्रैक के 30 से 40 प्रतिशत हिस्से में बदलाव और सुधार की जरूरत होगी।अडानी समूह के स्वामित्व वाले इस सर्किट पर आखिरी बार 2013 में फॉर्मूला वन इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ था। इसके बाद कराधान और नियामकीय विवादों के कारण इस रेस को कैलेंडर से हटा दिया गया था। इसके बाद से भारत में फॉर्मूला वन रेस की वापसी के कई प्रयास हुए हैं, लेकिन इसके लिए बुनियादी ढांचे और नीतिगत आवश्यकताओं सहित कई मुद्दों का समाधान करना जरूरी है।इंडियन रेसिंग महोत्सव के आयोजक ‘रेसिंग प्रमोशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ (आरपीपीएल) के चेयरमैन अखिलेश रेड्डी ने कहा कि ट्रैक में आवश्यक सुधार का काम कोई बड़ी बाधा नहीं है, हालांकि यह पूरी तरह फॉर्मूला वन और मोटरस्पोर्ट की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था एफआईए की मंजूरी पर निर्भर करेगा। रेड्डी ने रेस के दौरान पीटीआई से कहा, ‘‘सबसे पहले फॉर्मूला वन से यह पुष्टि करनी होगी कि वे भारत आने के लिए कब उपलब्ध होंगे। इसके लिए एफआईए और फिर फॉर्मूला वन से संपर्क करना होगा।तारीखें तय होने के बाद उनकी जरूरतों के अनुसार ट्रैक में सुधार का काम शुरू किया जा सकता है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि पूरे ट्रैक को तोड़कर नया बनाना होगा। मेरे हिसाब से मुश्किल से 30 से 40 प्रतिशत ट्रैक में बदलाव की जरूरत है।यह कोई बड़ी बात नहीं है और इसे आसानी से किया जा सकता है। एफआईए और फॉर्मूला वन से मंजूरी मिलने के बाद सभी संभावनाएं खुली हैं। ’’
भारत सरकार ने भी देश में फॉर्मूला वन की वापसी की संभावनाओं की जांच शुरू कर दी है।इसके लिए एक कार्य बल गठित किए जाने की उम्मीद है जो बुनियादी ढांचे, संचालन संबंधी जरूरतों और बड़े अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट आयोजनों से जुड़ी अन्य चुनौतियों का आकलन करेगी। हाल में खेल मंत्रालय ने भारतीय मोटर स्पोर्ट्स क्लब महासंघ (एफएमएससीआई) को अस्थायी रूप से राष्ट्रीय खेल महासंघ का दर्जा दिया था। हालांकि मोटरस्पोर्ट को अब भी सरकार से अधिक सहयोग की जरूरत है।रेड्डी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सरकार से दूसरे खेलों को जितना सहयोग मिलता है, उसकी तुलना में मोटरस्पोर्ट को मुश्किल से एक या दो प्रतिशत ही सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, जब हमने खेलो इंडिया में पंजीकरण कराने के बारे में सोचा, तो वहां मोटरस्पोर्ट के लिए कोई अलग श्रेणी ही नहीं थी। अब इस दिशा में कदम उठाने का समय आ गया है क्योंकि हमारे पास कई प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी हैं।’’
पीटीआई ने पहले खबर दी थी कि भारत में फॉर्मूला वन की वापसी से जुड़ी बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कर छूट को लेकर पूरी स्पष्टता जरूरी होगी। वहीं स्थानीय प्रमोटर अडानी समूह को आयोजन शुल्क के रूप में सालाना 300 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके अलावा सर्किट के बड़े स्तर पर उन्नयन पर 150 करोड़ से 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा पर भी भारी खर्च करना होगा। इस बीच गोवा एसेस जेए रेसिंग के राउल हाइमन और स्पीड डेमन्स दिल्ली के नितियिसो माबुंडा ने इंडियन रेसिंग महोत्सव के पहले दिन अपनी-अपनी श्रेणियों में जीत दर्ज की।
बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (बीआईसी) में शनिवार को इंडियन रेसिंग लीग और एफ4 इंडियन चैंपियनशिप के आयोजन के साथ 13 साल बाद पहली बार एफआईए स्तर की मोटर रेसिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई। इंडियन रेसिंग महोत्सव के तहत इस सर्किट पर हिस्सा लेने वाले ड्राइवरों ने ट्रैक की जमकर तारीफ की। हालांकि आयोजकों का मानना है कि यहां दोबारा फॉर्मूला वन रेस आयोजित करने से पहले ट्रैक के 30 से 40 प्रतिशत हिस्से में बदलाव और सुधार की जरूरत होगी।
अडानी समूह के स्वामित्व वाले इस सर्किट पर आखिरी बार 2013 में फॉर्मूला वन इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ था। इसके बाद कराधान और नियामकीय विवादों के कारण इस रेस को कैलेंडर से हटा दिया गया था। इसके बाद से भारत में फॉर्मूला वन रेस की वापसी के कई प्रयास हुए हैं, लेकिन इसके लिए बुनियादी ढांचे और नीतिगत आवश्यकताओं सहित कई मुद्दों का समाधान करना जरूरी है।
इंडियन रेसिंग महोत्सव के आयोजक ‘रेसिंग प्रमोशन्स प्राइवेट लिमिटेड’ (आरपीपीएल) के चेयरमैन अखिलेश रेड्डी ने कहा कि ट्रैक में आवश्यक सुधार का काम कोई बड़ी बाधा नहीं है, हालांकि यह पूरी तरह फॉर्मूला वन और मोटरस्पोर्ट की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था एफआईए की मंजूरी पर निर्भर करेगा। रेड्डी ने रेस के दौरान पीटीआई से कहा, ‘‘सबसे पहले फॉर्मूला वन से यह पुष्टि करनी होगी कि वे भारत आने के लिए कब उपलब्ध होंगे। इसके लिए एफआईए और फिर फॉर्मूला वन से संपर्क करना होगा।
तारीखें तय होने के बाद उनकी जरूरतों के अनुसार ट्रैक में सुधार का काम शुरू किया जा सकता है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि पूरे ट्रैक को तोड़कर नया बनाना होगा। मेरे हिसाब से मुश्किल से 30 से 40 प्रतिशत ट्रैक में बदलाव की जरूरत है।
यह कोई बड़ी बात नहीं है और इसे आसानी से किया जा सकता है। एफआईए और फॉर्मूला वन से मंजूरी मिलने के बाद सभी संभावनाएं खुली हैं। ’’
भारत सरकार ने भी देश में फॉर्मूला वन की वापसी की संभावनाओं की जांच शुरू कर दी है।
इसके लिए एक कार्य बल गठित किए जाने की उम्मीद है जो बुनियादी ढांचे, संचालन संबंधी जरूरतों और बड़े अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट आयोजनों से जुड़ी अन्य चुनौतियों का आकलन करेगी। हाल में खेल मंत्रालय ने भारतीय मोटर स्पोर्ट्स क्लब महासंघ (एफएमएससीआई) को अस्थायी रूप से राष्ट्रीय खेल महासंघ का दर्जा दिया था। हालांकि मोटरस्पोर्ट को अब भी सरकार से अधिक सहयोग की जरूरत है।
रेड्डी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सरकार से दूसरे खेलों को जितना सहयोग मिलता है, उसकी तुलना में मोटरस्पोर्ट को मुश्किल से एक या दो प्रतिशत ही सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, जब हमने खेलो इंडिया में पंजीकरण कराने के बारे में सोचा, तो वहां मोटरस्पोर्ट के लिए कोई अलग श्रेणी ही नहीं थी। अब इस दिशा में कदम उठाने का समय आ गया है क्योंकि हमारे पास कई प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी हैं।
’’
पीटीआई ने पहले खबर दी थी कि भारत में फॉर्मूला वन की वापसी से जुड़ी बातचीत आगे बढ़ाने के लिए कर छूट को लेकर पूरी स्पष्टता जरूरी होगी। वहीं स्थानीय प्रमोटर अडानी समूह को आयोजन शुल्क के रूप में सालाना 300 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके अलावा सर्किट के बड़े स्तर पर उन्नयन पर 150 करोड़ से 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा पर भी भारी खर्च करना होगा। इस बीच गोवा एसेस जेए रेसिंग के राउल हाइमन और स्पीड डेमन्स दिल्ली के नितियिसो माबुंडा ने इंडियन रेसिंग महोत्सव के पहले दिन अपनी-अपनी श्रेणियों में जीत दर्ज की।
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