बुक रिव्यू- जीवन अगर पेड़ है तो भावनाएं उसकी जड़:भावनाओं में बहें नहीं, उन्हें समझें, फीलिंग्स के साइंस को समझाती एक किताब

बुक रिव्यू- जीवन अगर पेड़ है तो भावनाएं उसकी जड़:भावनाओं में बहें नहीं, उन्हें समझें, फीलिंग्स के साइंस को समझाती एक किताब

बुक का नाम: ‘भावना: जीवन का GPS’ (भावना योग के साथ अपनी राह खोजें) लेखक: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज प्रकाशक: निर्ग्रन्थ फाउंडेशन मूल्य: 150 रुपए आज इंसान के पास तेज दिमाग, आधुनिक साधन और मनोरंजन के कई विकल्प हैं, फिर भी वह उलझा हुआ है। कारण है कि हमने बाहर की दुनिया संभालना सीख लिया है, लेकिन भावनाओं को समझना बाकी है। जैन मुनि प्रमाणसागर जी की किताब ‘भावना: जीवन का GPS’ इस विषय पर प्रकाश डालती है। यह सिखाती है कि जीवन की असली दिशा बाहर नहीं, बल्कि भीतर तय होती है। मुनिश्री बताते हैं कि अगर हम अपनी भावनाओं को समझना और कंट्रोल करना सीख लें, तो पर्सनल और प्रोफेशनल सक्सेस दूर नहीं है। मुनिश्री बताते हैं कि- ‘’भावना चेतना की वह अदृश्य धारा है, जो हमारे जीवन को दिशा देती है। हम जो सोचते हैं, जो निर्णय लेते हैं और जो बनते हैं, उसके पीछे भावनाओं की ही भूमिका होती है।’’ किताब का उद्देश्य और महत्व नीचे ग्राफिक में किताब के 8 जरूरी सबक देखिए- किताब में भावनाओं को तीन स्तरों में समझाया गया है- मुनिश्री बताते हैं कि भावनाएं न अच्छी होती हैं न बुरी। उनका दिशा-निर्देशन ही उन्हें सकारात्मक या नकारात्मक बनाता है। नकारात्मक भावनाएं: समस्या की जड़ किताब का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘विकृत भावनाओं की पहचान’ है। मुनिश्री बताते हैं कि कैसे हमारे ‘शुद्ध भाव’ विकृत (खराब) होकर हमें नुकसान पहुंचाते हैं। जैसेकि- भावना के चार स्तंभ: जीवन बदलने की प्रक्रिया किताब में भावना योग को चार चरणों में समझाया गया है- ये चारों चरण आत्म-परिवर्तन की प्रक्रिया बनाते हैं। इन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है। प्रार्थना जैन दर्शन में प्रार्थना का अर्थ केवल ईश्वर से कुछ मांगना नहीं, बल्कि भावनाओं के प्रति जागरूक होना और उन्हें स्वीकार करना है। जब व्यक्ति समझता है कि वह क्या महसूस कर रहा है तो समर्पण की भावना विकसित होती है। यह अहंकार को कम करके आत्म-जागरूकता बढ़ाती है और आंतरिक परिवर्तन की शुरुआत करती है। प्रतिक्रमण प्रतिक्रमण आत्म-विश्लेषण और भावनात्मक शुद्धि की प्रक्रिया है। इसमें व्यक्ति नकारात्मक भावनाओं (जैसे क्रोध, भय, ईर्ष्या या दोषबोध) को पहचानता है, कारण समझता है और उन्हें छोड़ने का प्रयास करता है। यह मानसिक बोझ हल्का करता है और सकारात्मकता के लिए जगह बनाता है। प्रत्याख्यान प्रत्याख्यान का मतलब है गलतियों और नकारात्मक पैटर्न को पहचानकर उन्हें दोहराने से बचने का संकल्प लेना। यह सोच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाता है। इससे आत्म-अनुशासन मजबूत होता है और व्यक्ति बेहतर दिशा में बढ़ता है। सामायिक सामायिक वह अवस्था है, जहां व्यक्ति वर्तमान में स्थिर होकर साक्षी भाव से जीता है। इसमें न अतीत का बोझ होता है, न भविष्य की चिंता। मन शांत और संतुलित रहता है। यही समता की स्थिति है, जो भावना योग की अंतिम उपलब्धि मानी जाती है। सेल्फ मैनेजमेंट कैसे करें? यह किताब केवल भावनाओं की थ्योरी तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि भावनाएं रोजमर्रा की जिंदगी के हर हिस्से को कैसे प्रभावित करती हैं। लेखक सेल्फ मैनेजमेंट को पांच क्षेत्रों में बांटते हैं, जो जीवन को व्यवस्थित और संतुलित बनाने का आधार हैं। हमारे विचार ही दिशा तय करते हैं। किताब सिखाती है कि नकारात्मक और व्यर्थ सोच से हटकर सकारात्मक और समाधान-केंद्रित सोच कैसे विकसित की जाए। हर भावना को पहचानना और समझना जरूरी है। जब हम जान लेते हैं कि इस समय भीतर क्या चल रहा है, तब हम भावनाओं के गुलाम नहीं, बल्कि उनके संचालक बनते हैं। शब्द केवल आवाज नहीं, भावनाओं के वाहक होते हैं। लेखक बताते हैं कि सोच-समझकर, संयमित और संवेदनशील बोलना रिश्तों को बेहतर बनाता है। हमारे कर्म भावनाओं से प्रेरित होते हैं। अगर भावनाएं संतुलित हैं, तो निर्णय और कार्य सही दिशा में जाते हैं। हमारी मानसिक और भावनात्मक ऊर्जा सीमित होती है। किताब सिखाती है कि इसे व्यर्थ चिंता और नकारात्मकता में खर्च करने के बजाय सही जगह निवेश करना जीवन को प्रभावी बनाता है। रिश्ते मजबूत बनाने के पांच स्वर्णिम सूत्र किताब का एक प्रभावशाली पहलू है, रिश्तों को देखने का नजरिया। मुनिश्री कहते हैं कि रिश्ते केवल तर्क और लॉजिक से नहीं चलते, बल्कि भावनाओं की बुनियाद पर टिके होते हैं। इसे मजबूत करने के लिए पांच स्वर्णिम सूत्र दिए गए हैं। यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? अगर आप भावनाओं को समझना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए है। कुछ लोगों के लिए यह सबक के तौर पर भी काम कर सकती है। इसे नीचे ग्राफिक से समझिए- किताब के बारे में मेरी राय किताब की भाषा थोड़ी कठिन जरूर है, लेकिन पढ़ने पर समझ आती है। इसमें केवल ज्ञान नहीं, अभ्यास पर जोर है। साथ ही आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न दिए गए हैं। जीवन के हर पहलू भावना, स्वास्थ्य और संबंध को कवर किया गया है। …………… ये बुक रिव्यू भी पढ़िए बुक-रिव्यू- एक दिन की सफलता के पीछे बरसों की मेहनत: रातोंरात कुछ नहीं होता, कैसे चलें कि थकें नहीं, हारें नहीं, निराशा न घेरे हर कोई बेहतर जीवन चाहता है, जहां रिश्तों में मधुरता, काम में संतुलन और भीतर सुकून हो। लेकिन दौड़ती-भागती जिंदगी में यह संतुलन मिलना मुश्किल है। मशहूर लाइफ कोच और संत गौर गोपाल दास की किताब ‘जीवन के अद्भुत रहस्य’ यह संतुलन बनाना सिखाती है। पूरा रिव्यू पढ़िए…

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