Biopic बने तो मेरा किरदार निभाएं Priyanka Chopra, बोलीं गोलकीपर Savita Punia

Biopic बने तो मेरा किरदार निभाएं Priyanka Chopra, बोलीं गोलकीपर Savita Punia

 भारतीय महिला हॉकी की दीवार कही जाने वाली सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया का जीवन संघर्षों पर जुनून की जीत की अनूठी कहानी है और उनका मानना है कि अगर इस पर कोई बायोपिक बनती है तो वह प्रियंका चोपड़ा को मुख्य भूमिका में देखना चाहेंगी। इस साल विश्व कप में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1974 के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया। फिर इस महीने जापान में एशियाई खेलों में 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई किया जिसमें धुरंधर गोलकीपर सविता की अहम भूमिका रही। यह पूछे जाने पर कि अगर उन पर कोई बायोपिक बनती है तो वह किस अभिनेत्री को अपने किरदार में देखना चाहेंगी, 36 वर्षीय सविता ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से खास बातचीत में कहा, ‘‘मैंने कभी सोचा नहीं कि मुझ पर कोई मूवी बने। लेकिन अगर बनती है, तो प्रियंका चोपड़ा मेरी पसंदीदा हैं और मुझे लगता है कि वह इस रोल के साथ न्याय कर पायेंगी। उनका भी सफर देखती हूं तो काफी प्रेरित करती हैं।’’ प्रियंका पहले भी महान मुक्केबाज एमसी मेरीकोम पर बनी फिल्म में उनकी भूमिका निभा चुकी हैं। अपनी मम्मी की बीमारी के कारण पांचवीं कक्षा से घर संभालने से लेकर गाय-भैंसों की देखभाल तक सारे काम करने वाली सविता को आम लड़कियों की तरह सजना संवरना पसंद नहीं है, लेकिन वह किताबें पढने की शौकीन हैं। हॉकी से इतर शौक के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘मुझे किताबें पढना और संगीत सुनना पसंद है। दिन की शुरूआत हनुमान चालीसा से करती हूं। फिल्में ज्यादा नहीं देखती। शायद आज तक आठ या नौ फिल्में देखी होंगी, जिसमें आखिरी फिल्म दीपिका पादुकोण की ‘छपाक’ थी।’’ पिछले दो दशक से अधिक समय से हॉकी खेल रहीं सविता ने कहा कि महिला खिलाड़ियों का संघर्ष अलग तरह का होता है, लेकिन भारतीय महिला हॉकी में नये कोचिंग स्टाफ के साथ अब खुलकर बात करने से इनसे पार पाना आसान हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि एक महिला खिलाड़ी की चुनौतियां पुरूषों से अधिक होती हैं। मसलन पीरियड्स के दौरान कई खिलाड़ी चल भी नहीं पातीं, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान रेस्ट भी नहीं ले सकतीं। नये कोचिंग स्टाफ के आने के बाद अब इस पर भी काम किया गया है कि इसे कैसे हैंडिल किया जाये, इसके लिये खास डाइट, खास व्यायाम बनाए गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह अच्छी बात है कि अब महिला खिलाड़ी खुलकर इस पर बात करने लगी हैं, जबकि कुछ साल पहले तक इसे लेकर टैबू था। अब हम इसे अतिरिक्त ताकत समझकर खेलते हैं।’’ 

 भारतीय महिला हॉकी की दीवार कही जाने वाली सबसे अनुभवी खिलाड़ी सविता पूनिया का जीवन संघर्षों पर जुनून की जीत की अनूठी कहानी है और उनका मानना है कि अगर इस पर कोई बायोपिक बनती है तो वह प्रियंका चोपड़ा को मुख्य भूमिका में देखना चाहेंगी। इस साल विश्व कप में भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1974 के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया। फिर इस महीने जापान में एशियाई खेलों में 44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 के लिये क्वालीफाई किया जिसमें धुरंधर गोलकीपर सविता की अहम भूमिका रही। 

यह पूछे जाने पर कि अगर उन पर कोई बायोपिक बनती है तो वह किस अभिनेत्री को अपने किरदार में देखना चाहेंगी, 36 वर्षीय सविता ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ से खास बातचीत में कहा, ‘‘मैंने कभी सोचा नहीं कि मुझ पर कोई मूवी बने। लेकिन अगर बनती है, तो प्रियंका चोपड़ा मेरी पसंदीदा हैं और मुझे लगता है कि वह इस रोल के साथ न्याय कर पायेंगी। उनका भी सफर देखती हूं तो काफी प्रेरित करती हैं।’’ प्रियंका पहले भी महान मुक्केबाज एमसी मेरीकोम पर बनी फिल्म में उनकी भूमिका निभा चुकी हैं। 

अपनी मम्मी की बीमारी के कारण पांचवीं कक्षा से घर संभालने से लेकर गाय-भैंसों की देखभाल तक सारे काम करने वाली सविता को आम लड़कियों की तरह सजना संवरना पसंद नहीं है, लेकिन वह किताबें पढने की शौकीन हैं। हॉकी से इतर शौक के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘मुझे किताबें पढना और संगीत सुनना पसंद है। दिन की शुरूआत हनुमान चालीसा से करती हूं। फिल्में ज्यादा नहीं देखती। 

शायद आज तक आठ या नौ फिल्में देखी होंगी, जिसमें आखिरी फिल्म दीपिका पादुकोण की ‘छपाक’ थी।’’ पिछले दो दशक से अधिक समय से हॉकी खेल रहीं सविता ने कहा कि महिला खिलाड़ियों का संघर्ष अलग तरह का होता है, लेकिन भारतीय महिला हॉकी में नये कोचिंग स्टाफ के साथ अब खुलकर बात करने से इनसे पार पाना आसान हो गया है।

 उन्होंने कहा, ‘‘यह सच है कि एक महिला खिलाड़ी की चुनौतियां पुरूषों से अधिक होती हैं। मसलन पीरियड्स के दौरान कई खिलाड़ी चल भी नहीं पातीं, लेकिन प्रतियोगिता के दौरान रेस्ट भी नहीं ले सकतीं। नये कोचिंग स्टाफ के आने के बाद अब इस पर भी काम किया गया है कि इसे कैसे हैंडिल किया जाये, इसके लिये खास डाइट, खास व्यायाम बनाए गए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह अच्छी बात है कि अब महिला खिलाड़ी खुलकर इस पर बात करने लगी हैं, जबकि कुछ साल पहले तक इसे लेकर टैबू था। अब हम इसे अतिरिक्त ताकत समझकर खेलते हैं।’’

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