Bilaspur Virat Saraf Kidnapping Case: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साल 2019 में हुए चर्चित विराट सराफ अपहरण कांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों की सजा को बरकरार रखा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि फिरौती के लिए नाबालिग बच्चे का अपहरण करना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 364-A और 120-B के तहत गंभीर अपराध है।
Bilaspur Virat Saraf Kidnapping Case: जानें पूरा मामला
यह सनसनीखेज मामला 20 अप्रैल 2019 का है। बिलासपुर के कश्यप कॉलोनी निवासी कपड़ा व्यापारी विवेक सराफ का 6 वर्षीय बेटा विराट सराफ घर के पास दोस्तों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान उसका अपहरण कर लिया गया। बच्चे के अचानक लापता होने से परिवार में हड़कंप मच गया और पूरे शहर में दहशत फैल गई थी।
बड़ी मां ने रची थी पूरी साजिश
पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ उसने सभी को हैरान कर दिया। इस पूरे अपहरण कांड की मास्टरमाइंड बच्चे की बड़ी मां नीता सराफ निकली। पैसों के लालच में उसने अपने साथियों के साथ मिलकर अपहरण की पूरी साजिश रची थी। योजना के तहत बच्चे को पहले वैगन-आर कार में बैठाया गया और बाद में रेलवे स्टेशन के पास दूसरी डस्टर कार में शिफ्ट कर दिया गया।
परिवार से 6 करोड़ रुपये की मांग
बता दें कि अपहरण के बाद विराट को पन्ना नगर, जरहाभाठा स्थित राजकिशोर सिंह के मकान में ले गए। वहां उसके हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में बंद कर दिया गया। आरोपियों ने बच्चे की आवाज में फिरौती मांगने के लिए ऑडियो रिकॉर्डिंग तैयार की और परिवार से 6 करोड़ रुपये की मांग की गई।
परिवार के बीच बैठकर पहुंचाती थी जानकारी
अपहरण के बाद मास्टरमाइंड आरोपी नीता सराफ रोज सुबह से शाम तक पीड़ित परिवार के घर पर मौजूद रहती थी। इस दौरान वह पुलिस और परिवार की हर गतिविधि पर नजर रखती और सारी जानकारी अपने साथियों तक पहुंचाती थी। पुलिस ने जब फिरौती मांगने वाले नंबर को सर्विलांस पर लिया तो उसकी लोकेशन यूपी, बिहार और बिलासपुर के बीच ट्रेस हुई। कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच में सभी आरोपी लगातार संपर्क में पाए गए।
पुलिस ने छापा मारकर बच्चे को छुड़ाया
लगातार जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 26 अप्रैल 2019 को जरहाभाठा स्थित राजकिशोर सिंह के मकान में छापा मारा। कमरे का ताला तोड़कर पुलिस ने मासूम विराट को सकुशल बरामद कर लिया। मौके से आरोपी हरेकृष्ण कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
इस मामले में पुलिस ने नीता सराफ, राजकिशोर सिंह, अनिल सिंह, सतीश और हरेकृष्ण कुमार को गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए धारा 364-A और 120-B सहित अन्य धाराओं में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
हाईकोर्ट ने फैसले को बताया सही
ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि मासूम बच्चे को फिरौती के लिए बंधक बनाना बेहद गंभीर और अमानवीय अपराध है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सभी दोषियों की सजा को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।


