पटना, आठ सितंबर बिहार में सिंचाई सेवाओं के आधुनिकीकरण, जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन और बाढ़ एवं कटाव से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए 4,415 करोड़ रुपये की बिहार जल सुरक्षा एवं सिंचाई आधुनिकीकरण परियोजना लागू की जा रही है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सिन्हा ने बताया कि विश्व बैंक और बिहार सरकार की संयुक्त भागीदारी वाली इस परियोजना में 70 प्रतिशत राशि विश्व बैंक तथा 30 फीसदी राशि राज्य सरकार वहन करेगी।
उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में कृषि को अधिक सक्षम, टिकाऊ और जोखिम-प्रतिरोधी बनाना समय की आवश्यकता है, जिसके लिए जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा किसानों को जलवायु के अनुकूल कृषि प्रौद्योगियों से जोड़ने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सिन्हा के मुताबिक, परियोजना का क्रियान्वयन जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले घटक के तहत सिंचाई प्रणालियों के पुनर्वास एवं आधुनिकीकरण, संचालन एवं रखरखाव, जलवायु अनुकूल कृषि, प्रशिक्षण तथा क्षमता विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
सिन्हा के अनुसार, दूसरे घटक में तटबंधों और नदी के किनारों को मजबूत करने के साथ बाढ़ एवं कटाव प्रबंधन के लिए ‘ब्लू-ग्रीन’ अवसंरचना समाधानों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीसरे घटक के तहत संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ किया जाएगा। सिन्हा ने बताया कि जल विज्ञान एवं कृषि सूचना सहायता केंद्र (एफएमआईएससी) को मजबूत करने, बिहार राज्य जल नीति तैयार करने तथा बिहार राज्य जल नियामक प्राधिकरण के गठन की दिशा में भी काम किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि चौथे घटक में परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी, मूल्यांकन और वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। सिन्हा ने बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि गतिविधियों के लिए कमान क्षेत्र के आधार पर 11 प्रखंडों की पहचान की गई है, जिनमें सोन पश्चिमी कमान क्षेत्र के रोहतास, बक्सर और कैमूर, कोसी कमान क्षेत्र के मधुबनी तथा सारण कमान क्षेत्र के सिवान जिले के प्रखंड शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में स्थानीय जलवायु, जल उपलब्धता और कृषि परिस्थितियों के अनुरूप जलवायु अनुकूल कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादन को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षित रखने, जल एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल तथा किसानों की आय और कृषि की स्थिरता को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

