बोधगया में बुधवार की रात महाबोधि मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर जयप्रकाश उद्यान स्थित एक विशाल बरगद के पेड़ की भारी भरकम टहनी टूटकर दुकानों पर गिर गई। उस समय न आंधी थी और न बारिश हो रही थी। फिर भी अचानक से आवाज के साथ टहनी कुछ ही सेकंड में गिर पड़ी। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद दुकानदारों और पर्यटकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। लेकिन कुछ सेकेंड की देरी बड़ी अनहोनी में बदल सकती थी। देर शाम के वक्त महाबोधि मंदिर में दर्शन के बाद लौटते वक्त आसपास की दुकानों में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे। दुकानदार अपनी दुकान छोड़कर मौके से जान बचाने के लिए भागे। पर्यटकों के बीच भी अफरा-तफरी का माहौल हो गया। टहनी गिरने से कई दुकानों के ऊपर रखे सामान बर्बाद हो गए। दुकान संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही बिजली के तार भी टूट गए। हादसे के बाद अधिकारी नहीं पहुंचे स्थानीय लोगों ने बताया कि न तो आंधी थी और न ही तूफान, इसके बावजूद इतनी बड़ी टहनी का गिर जाना वन विभाग और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। सबसे बड़ा सवाल यह कि घटना स्थल से महज कुछ दूरी पर पुलिस चौकी और मंदिर सुरक्षा में जवानों की तैनाती होने के बावजूद काफी देर तक कोई अधिकारी या पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। ॉ इससे स्थानीय दुकानदारों में नाराजगी देखी गई। घटना के घंटों बाद तक सड़क पर विशाल टहनी पड़ी रही, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ। दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द टहनी हटाई जाए और महाबोधि मंदिर मार्ग के पुराने पेड़ों की जांच कराई जाए। ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। बोधगया में बुधवार की रात महाबोधि मंदिर जाने वाले मुख्य मार्ग पर जयप्रकाश उद्यान स्थित एक विशाल बरगद के पेड़ की भारी भरकम टहनी टूटकर दुकानों पर गिर गई। उस समय न आंधी थी और न बारिश हो रही थी। फिर भी अचानक से आवाज के साथ टहनी कुछ ही सेकंड में गिर पड़ी। हादसा इतना अचानक हुआ कि वहां मौजूद दुकानदारों और पर्यटकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। लेकिन कुछ सेकेंड की देरी बड़ी अनहोनी में बदल सकती थी। देर शाम के वक्त महाबोधि मंदिर में दर्शन के बाद लौटते वक्त आसपास की दुकानों में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे। दुकानदार अपनी दुकान छोड़कर मौके से जान बचाने के लिए भागे। पर्यटकों के बीच भी अफरा-तफरी का माहौल हो गया। टहनी गिरने से कई दुकानों के ऊपर रखे सामान बर्बाद हो गए। दुकान संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही बिजली के तार भी टूट गए। हादसे के बाद अधिकारी नहीं पहुंचे स्थानीय लोगों ने बताया कि न तो आंधी थी और न ही तूफान, इसके बावजूद इतनी बड़ी टहनी का गिर जाना वन विभाग और प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। सबसे बड़ा सवाल यह कि घटना स्थल से महज कुछ दूरी पर पुलिस चौकी और मंदिर सुरक्षा में जवानों की तैनाती होने के बावजूद काफी देर तक कोई अधिकारी या पुलिसकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। ॉ इससे स्थानीय दुकानदारों में नाराजगी देखी गई। घटना के घंटों बाद तक सड़क पर विशाल टहनी पड़ी रही, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ। दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द टहनी हटाई जाए और महाबोधि मंदिर मार्ग के पुराने पेड़ों की जांच कराई जाए। ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।


