Bengal Election Result: शेयर बाजार में इस वक्त नजर सिर्फ चुनाव पर नहीं है, बल्कि उससे भी बड़ी चिंता तेल की कीमतों को लेकर है। चुनावी नतीजे थोड़ी देर के लिए बाजार में रौनक ला सकते हैं, लेकिन असली दिशा तय करेगा कच्चा तेल। ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का मानना है कि अगर पश्चिम बंगाल में बीजेपी को बढ़त मिलती है, तो बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। खासकर 4 मई को जब नतीजे आएंगे, उस दिन बाजार की चाल पर सबकी नजर रहेगी।
एग्जिट पोल्स भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मौजूदा सरकारें बरकरार रह सकती हैं, जबकि बंगाल में कांटे की टक्कर है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल राजनीतिक माहौल को करीब से देख रहे हैं।
आगे है बड़ी चुनौती
हालांकि, जानकारों का कहना है कि अगर बाजार में तेजी आती भी है, तो वह ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं होगी। वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। तेल महंगा हुआ तो महंगाई बढ़ेगी, सरकार पर दबाव बढ़ेगा और इसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। यही सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर माना जा रहा है।
वहीं, सरकार के सामने एक साथ कई चिंताएं हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमत, कमजोर मानसून से खाद्य महंगाई का खतरा और बढ़ता चालू खाता घाटा इस समय सरकार के सामने प्रमुख समस्याएं हैं। इन सबको संभालना आसान नहीं होगा। सरकार को सख्त फैसले लेने पड़ सकते हैं, खासकर ऊर्जा सब्सिडी और कीमतों को लेकर।
सरकार के पास 10 महीने का खाली समय
एक अहम बात यह है कि इन चुनावों के बाद करीब 10 महीने तक कोई बड़ा चुनाव नहीं है। इस दौरान सरकार के पास सुधारों पर ध्यान देने का मौका होगा। इसमें भारत-अमेरिका ट्रेड डील को आगे बढ़ाना, ऊर्जा सब्सिडी में बदलाव और रुके हुए सुधारों को तेज करना शामिल हो सकता है।
क्या होगी बाजार की दिशा?
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि बाजार बहुत तेजी से ऊपर या नीचे नहीं जाएगा, बल्कि एक दायरे में रहेगा। शुरुआती उत्साह खत्म होने के बाद निवेशकों का फोकस फिर से कंपनियों के नतीजों, तेल की कीमतों और सरकार की नीतियों पर आ जाएगा। हालांकि, लंबी अवधि में कंपनियों की कमाई को लेकर नजरिया सकारात्मक है। अनुमान है कि निफ्टी-50 कंपनियों का मुनाफा आने वाले वर्षों में अच्छा बढ़ सकता है।


