Asian Games Final में Pakistan को हराकर India ने जीता Gold Medal, बिना विवाद खत्म हुआ मैच

Asian Games Final में Pakistan को हराकर India ने जीता Gold Medal, बिना विवाद खत्म हुआ मैच

(तस्वीरों के साथ)
…अजय मसंद…
नागोया, तीन अक्टूबर भारत और पाकिस्तान के बीच एशियाई खेलों के क्रिकेट फाइनल को लेकर काफी उत्सुकता थी लेकिन शनिवार को यहां हुआ मुकाबला बिना किसी विवाद के संपन्न हुआ। इस दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक बार फिर हाथ नहीं मिलाए। फाइनल देखने के लिए तोक्यो, नागोया और जापान के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में पहुंचे भारतीय समुदाय के लोगों के लिए यह दिन क्रिकेट के नाम रहा।पाकिस्तान ने लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत पर दबाव जरूर बनाया, लेकिन भारत का विशाल स्कोर निर्णायक साबित हुआ और उसने लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीत लिया। मैच से पहले टॉस मैदान के एक कोने में कराया गया, जबकि टेलीविजन कैमरा दल पिच के पास मौजूद था। मैच के बाद का घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही रहा।जीत के बाद भारतीय खिलाड़ी जब अपने ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़े तो उन्होंने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के पास जाने की कोशिश नहीं की। पाकिस्तान की टीम अपने ड्रेसिंग रूम से बाहर आई, अंपायरों से हाथ मिलाया और भारतीय खिलाड़ियों से बिना किसी बातचीत के वापस लौट गई। हाथ मिलाने को छोड़ दे तो मैच खेल भावना के साथ खेला गया।खिलाड़ियों के बीच कोई तीखी बहस या बड़ा विवाद नहीं हुआ और उन्होंने अपना ध्यान मुकाबले पर बनाए रखा तथा क्रिकेट को केंद्र में रहने दिया। पदक समारोह भी बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ और आयोजकों ने पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखा। आइची-नागोया एशियाई खेल आयोजन समिति (एआईएनएजीओसी) के एक सीनियर अधिकारी ने पाकिस्तान की टीम को रजत पदक प्रदान किए, जबकि आईसीसी के अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व सचिव जय शाह ने कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम को स्वर्ण पदक प्रदान किए।तीनों पदक विजेता टीमों के सामूहिक फोटो के दौरान ही एकमात्र असहज स्थिति बनी। भारत को बीच में खड़ा होना था जबकि पाकिस्तान को उसकी बाईं ओर और कांस्य पदक विजेता श्रीलंका को दाईं ओर खड़ा होना था। पाकिस्तानी खिलाड़ी इस बात को लेकर असमंजस में दिखे कि उन्हें कहां खड़ा होना है और पदक समारोह के बाद पोडियम से नीचे उतर गए।श्रीलंका के खिलाड़ी भी उनके पीछे उतर गए। इसके बाद दोनों टीमें भारतीय खिलाड़ियों के साथ फोटो के लिए एकत्र हुईं। एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी की अनुपस्थिति से भी संभवतः एक असहज स्थिति टल गई।नकवी ने पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का हवाला देते हुए फाइनल में शामिल नहीं होने की बात कही थी। नकवी पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं और वह एशिया कप की पुरुष और महिला दोनों प्रतियोगिताओं की ट्रॉफी सौंपने को लेकर बीसीसीआई के साथ जारी गतिरोध के केंद्र में रहे हैं। भारतीय टीमों ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय रक्षा बलों के साथ एकजुटता जताने के लिए नकवी से अपनी-अपनी ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था।बीसीसीआई का कहना रहा है कि उसकी टीमें नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगी, जबकि पाकिस्तानी मंत्री ने जोर देकर कहा है कि भारत को ट्रॉफी व्यक्तिगत रूप से उनसे ही लेनी होगी। यह गतिरोध 2025 के पुरुष एशिया कप और इस साल के महिला सत्र के दौरान भी जारी रहा। दोनों भारतीय टीमों ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की।बीसीसीआई ने एसीसी से अपने उपाध्यक्ष को पुरस्कार समारोह आयोजित करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था, लेकिन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया, जिसके कारण ट्रॉफियां बिना किसी के लिए रह गईं। इस पृष्ठभूमि में एशियाई खेलों का फाइनल एक और विवाद का केंद्र बन सकता था, क्योंकि दोनों चिर प्रतिद्वंद्वी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब के लिए आमने-सामने थे। नकवी की अनुपस्थिति और आयोजकों द्वारा पदक समारोह के प्रबंधन से यह अवसर एशिया कप विवाद की पुनरावृत्ति के बिना संपन्न हो गया।मैदान पर खिलाड़ियों ने एक बार फिर हाथ मिलने से परहेज किया लेकिन भारत ने शुरुआत से मैच पर अपनी पकड़ बनाये रखते हुए जीत दर्ज की। पाकिस्तान को रजत और श्रीलंका को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा तथा प्रतिद्वंद्विता से जुड़े राजनीतिक पहलुओं के बजाय ध्यान पदकों पर रहा। 

(तस्वीरों के साथ)
…अजय मसंद…
नागोया, तीन अक्टूबर भारत और पाकिस्तान के बीच एशियाई खेलों के क्रिकेट फाइनल को लेकर काफी उत्सुकता थी लेकिन शनिवार को यहां हुआ मुकाबला बिना किसी विवाद के संपन्न हुआ। इस दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने एक बार फिर हाथ नहीं मिलाए। फाइनल देखने के लिए तोक्यो, नागोया और जापान के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में पहुंचे भारतीय समुदाय के लोगों के लिए यह दिन क्रिकेट के नाम रहा।

पाकिस्तान ने लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत पर दबाव जरूर बनाया, लेकिन भारत का विशाल स्कोर निर्णायक साबित हुआ और उसने लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीत लिया। मैच से पहले टॉस मैदान के एक कोने में कराया गया, जबकि टेलीविजन कैमरा दल पिच के पास मौजूद था। मैच के बाद का घटनाक्रम भी कुछ ऐसा ही रहा।

जीत के बाद भारतीय खिलाड़ी जब अपने ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़े तो उन्होंने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के पास जाने की कोशिश नहीं की। पाकिस्तान की टीम अपने ड्रेसिंग रूम से बाहर आई, अंपायरों से हाथ मिलाया और भारतीय खिलाड़ियों से बिना किसी बातचीत के वापस लौट गई। हाथ मिलाने को छोड़ दे तो मैच खेल भावना के साथ खेला गया।

खिलाड़ियों के बीच कोई तीखी बहस या बड़ा विवाद नहीं हुआ और उन्होंने अपना ध्यान मुकाबले पर बनाए रखा तथा क्रिकेट को केंद्र में रहने दिया। पदक समारोह भी बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ और आयोजकों ने पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखा। आइची-नागोया एशियाई खेल आयोजन समिति (एआईएनएजीओसी) के एक सीनियर अधिकारी ने पाकिस्तान की टीम को रजत पदक प्रदान किए, जबकि आईसीसी के अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व सचिव जय शाह ने कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली भारतीय टीम को स्वर्ण पदक प्रदान किए।

तीनों पदक विजेता टीमों के सामूहिक फोटो के दौरान ही एकमात्र असहज स्थिति बनी। भारत को बीच में खड़ा होना था जबकि पाकिस्तान को उसकी बाईं ओर और कांस्य पदक विजेता श्रीलंका को दाईं ओर खड़ा होना था। पाकिस्तानी खिलाड़ी इस बात को लेकर असमंजस में दिखे कि उन्हें कहां खड़ा होना है और पदक समारोह के बाद पोडियम से नीचे उतर गए।

श्रीलंका के खिलाड़ी भी उनके पीछे उतर गए। इसके बाद दोनों टीमें भारतीय खिलाड़ियों के साथ फोटो के लिए एकत्र हुईं। एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी की अनुपस्थिति से भी संभवतः एक असहज स्थिति टल गई।

नकवी ने पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का हवाला देते हुए फाइनल में शामिल नहीं होने की बात कही थी। नकवी पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं और वह एशिया कप की पुरुष और महिला दोनों प्रतियोगिताओं की ट्रॉफी सौंपने को लेकर बीसीसीआई के साथ जारी गतिरोध के केंद्र में रहे हैं। भारतीय टीमों ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय रक्षा बलों के साथ एकजुटता जताने के लिए नकवी से अपनी-अपनी ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था।

बीसीसीआई का कहना रहा है कि उसकी टीमें नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगी, जबकि पाकिस्तानी मंत्री ने जोर देकर कहा है कि भारत को ट्रॉफी व्यक्तिगत रूप से उनसे ही लेनी होगी। यह गतिरोध 2025 के पुरुष एशिया कप और इस साल के महिला सत्र के दौरान भी जारी रहा। दोनों भारतीय टीमों ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की।

बीसीसीआई ने एसीसी से अपने उपाध्यक्ष को पुरस्कार समारोह आयोजित करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था, लेकिन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया, जिसके कारण ट्रॉफियां बिना किसी के लिए रह गईं। इस पृष्ठभूमि में एशियाई खेलों का फाइनल एक और विवाद का केंद्र बन सकता था, क्योंकि दोनों चिर प्रतिद्वंद्वी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब के लिए आमने-सामने थे। नकवी की अनुपस्थिति और आयोजकों द्वारा पदक समारोह के प्रबंधन से यह अवसर एशिया कप विवाद की पुनरावृत्ति के बिना संपन्न हो गया।

मैदान पर खिलाड़ियों ने एक बार फिर हाथ मिलने से परहेज किया लेकिन भारत ने शुरुआत से मैच पर अपनी पकड़ बनाये रखते हुए जीत दर्ज की। पाकिस्तान को रजत और श्रीलंका को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा तथा प्रतिद्वंद्विता से जुड़े राजनीतिक पहलुओं के बजाय ध्यान पदकों पर रहा।

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