(फिलेम दीपक सिंह)
नागोया, एक अक्टूबर एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुष स्किफ का रजत पदक जीतने वाले प्रिंस कुरिसिंकल नोबल ने बाढ़ में अपने पिता को खो दिया था लेकिन पानी ने उन्हें कभी भयभीत नहीं किया। उन्होंने और उनके चचेरे भाई मनु फ्रांसिस ने बृहस्पतिवार को पुरुषों की स्किफ सेलिंग में भारत की पहली एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता टीम बनकर समुद्र से अपने ‘जुड़ाव’ की पुष्टि की। कोच्चि में उनके घर में यह जुड़ाव उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है।नोबल के पिता मछुआरे थे और 2018 में केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन नोबल काफी कम उम्र में ही पानी और सेलिंग के खेल की ओर आकर्षित हो गए थे क्योंकि अरब सागर उनके घर के पास ही था। नोबल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरे पिता मछुआरे थे और समुद्र हमारे घर के बहुत करीब है।इसलिए, हमारा समुद्र से जुड़ाव है। यही वजह है कि हमारे लिए नौकायन की शुरुआत करना आसान था। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पिता अब नहीं रहे, 2018 में केरल में आई बाढ़ में हमने उन्हें खो दिया।आज रजत पदक जीतकर मैंने अपने पिता की इच्छा से अधिक कर दिखाया। पिता की मृत्यु के बाद मेरी मां ने मेरा मनोबल बढ़ाया। ’’
तीस साल के नोबल ने कहा, ‘‘इसलिए मैं यह पदक अपने पिता, मां, कोच, अपने सभी शुभचिंतकों और देशवासियों को समर्पित करूंगा।’’
नोबल ने कहा कि उन्होंने 2009 में सेलिंग शुरु की थी जब वह 13 साल के थे और सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। वह और फ्रांसिस पिछले 10 वर्षों से साथ में सेलिंग कर रहे हैं। उन्होंने मिलकर 2023 में एशियाई चैंपियनशिप का कांस्य पदक भी जीता था।फ्रांसिस का सेलिंग सफर 14 साल की उम्र में शुरू हुआ था। वह नोबल से एक साल बड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम केरल से हैं और हमने सेलिंग की शुरूआत ‘बैकवाटर्स’ से की।हमारे कुछ चचरे भाई भी सेलिंग करने आते थे। उन्होंने हमें सेलिंग के बारे में बताया। हमें शुरू में इसके बारे में ज्यादा नहीं पता था लेकिन बाद में हम इसके प्रति जुनूनी बनते गए।
(फिलेम दीपक सिंह)
नागोया, एक अक्टूबर एशियाई खेलों की सेलिंग प्रतियोगिता में पुरुष स्किफ का रजत पदक जीतने वाले प्रिंस कुरिसिंकल नोबल ने बाढ़ में अपने पिता को खो दिया था लेकिन पानी ने उन्हें कभी भयभीत नहीं किया। उन्होंने और उनके चचेरे भाई मनु फ्रांसिस ने बृहस्पतिवार को पुरुषों की स्किफ सेलिंग में भारत की पहली एशियाई खेलों की रजत पदक विजेता टीम बनकर समुद्र से अपने ‘जुड़ाव’ की पुष्टि की। कोच्चि में उनके घर में यह जुड़ाव उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है।
नोबल के पिता मछुआरे थे और 2018 में केरल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन नोबल काफी कम उम्र में ही पानी और सेलिंग के खेल की ओर आकर्षित हो गए थे क्योंकि अरब सागर उनके घर के पास ही था। नोबल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरे पिता मछुआरे थे और समुद्र हमारे घर के बहुत करीब है।
इसलिए, हमारा समुद्र से जुड़ाव है। यही वजह है कि हमारे लिए नौकायन की शुरुआत करना आसान था। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पिता अब नहीं रहे, 2018 में केरल में आई बाढ़ में हमने उन्हें खो दिया।
आज रजत पदक जीतकर मैंने अपने पिता की इच्छा से अधिक कर दिखाया। पिता की मृत्यु के बाद मेरी मां ने मेरा मनोबल बढ़ाया। ’’
तीस साल के नोबल ने कहा, ‘‘इसलिए मैं यह पदक अपने पिता, मां, कोच, अपने सभी शुभचिंतकों और देशवासियों को समर्पित करूंगा।
’’
नोबल ने कहा कि उन्होंने 2009 में सेलिंग शुरु की थी जब वह 13 साल के थे और सातवीं कक्षा में पढ़ते थे। वह और फ्रांसिस पिछले 10 वर्षों से साथ में सेलिंग कर रहे हैं। उन्होंने मिलकर 2023 में एशियाई चैंपियनशिप का कांस्य पदक भी जीता था।
फ्रांसिस का सेलिंग सफर 14 साल की उम्र में शुरू हुआ था। वह नोबल से एक साल बड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम केरल से हैं और हमने सेलिंग की शुरूआत ‘बैकवाटर्स’ से की।
हमारे कुछ चचरे भाई भी सेलिंग करने आते थे। उन्होंने हमें सेलिंग के बारे में बताया। हमें शुरू में इसके बारे में ज्यादा नहीं पता था लेकिन बाद में हम इसके प्रति जुनूनी बनते गए।
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