भारतीय तीरंदाजी के लिए एची-नागोया एशियाई खेल बेहद खास रहे हैं। भारत ने इन खेलों में अब तक का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 9 पदक जीते, जिनमें 5 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि भारत अब एशिया में तीरंदाजी की बड़ी ताकत बनकर उभर चुका है।मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत के शानदार प्रदर्शन में कंपाउंड वर्ग के खिलाड़ियों का दबदबा रहा। भारतीय टीम ने लगातार दूसरी बार पुरुष, महिला और मिश्रित टीम के तीनों कंपाउंड स्वर्ण पदक अपने नाम किए। महिला कंपाउंड टीम ने फाइनल में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।मिश्रित कंपाउंड जोड़ी की सफलता भी भारत के लिए बेहद अहम रही। इस जोड़ी ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए भारत का कोटा हासिल किया है। खास बात यह है कि कंपाउंड तीरंदाजी को 2028 ओलंपिक में पहली बार शामिल किया जाना है। ऐसे में एची-नागोया की सफलता भारत के लिए आगे की बड़ी उम्मीद भी लेकर आई है।हालांकि, भारतीय तीरंदाजी की सबसे बड़ी उपलब्धि रिकर्व वर्ग में देखने को मिली। इस वर्ग में दक्षिण कोरिया लंबे समय से एशियाई खेलों में अपना दबदबा बनाए हुए था। भारतीय महिला रिकर्व टीम ने कोरिया की लगातार 7 एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की लय तोड़ते हुए पहली बार इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला।इसके अलावा मिश्रित रिकर्व जोड़ी ने इस स्पर्धा में भारत को पहली बार पदक दिलाया। पुरुष रिकर्व टीम ने भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए लगातार दूसरी बार रजत पदक जीता। व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में 17 साल के एक भारतीय तीरंदाज ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उसके दबाव में शानदार प्रदर्शन ने भारत के लिए एक और ओलंपिक कोटा भी हासिल किया।भारतीय तीरंदाजी संघ के महासचिव वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि नागोया की सफलता अचानक नहीं मिली है। उनके मुताबिक, यह करीब 15 साल से चल रहे लगातार प्रयासों का नतीजा है। बेहतर खेल ढांचा, अच्छे उपकरण, विदेशी प्रशिक्षकों की मदद, खेल विज्ञान और नियमित अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने खिलाड़ियों को मजबूत बनाया है।गौरतलब है कि नागोया में भारतीय खिलाड़ियों के सामने मौसम और यात्रा से जुड़ी कई मुश्किलें भी थीं। लंबे सफर, तेज हवाओं और भारी बारिश के बीच खिलाड़ियों ने अपना संतुलन बनाए रखा। सचदेवा ने इसे टीम के मजबूत मानसिक रवैये का प्रमाण बताया।इस अभियान में भारतीय महिला खिलाड़ियों की भूमिका भी बेहद अहम रही। कंपाउंड से लेकर रिकर्व तक महिला तीरंदाजों ने निर्णायक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। सचदेवा का कहना है कि इन खिलाड़ियों की सफलता देश की लाखों लड़कियों को तीरंदाजी जैसे खेल को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।उन्होंने प्रशिक्षकों, सहयोगी कर्मचारियों और खिलाड़ियों के परिवारों को भी इस सफलता का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, कई मौकों पर पदक करीब नजर आया, लेकिन लगातार समर्थन और भरोसे ने खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की ताकत दी।सचदेवा ने बताया कि एशियाई खेलों के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारतीय दल की तैयारी और खिलाड़ियों की कुशलता जानने के लिए उन्हें 2 बार फोन किया था। अब 2028 ओलंपिक में कंपाउंड की शुरुआत और रिकर्व में हासिल ओलंपिक कोटे के साथ भारत की नजरें अगले बड़े मंच पर हैं। नागोया के 9 पदक इस बात का संकेत हैं कि भारतीय तीरंदाज दुनिया की शीर्ष टीमों से मुकाबले के लिए तैयार हैं और आने वाले समय में उनकी चुनौती और बड़ी होने वाली हैं।
भारतीय तीरंदाजी के लिए एची-नागोया एशियाई खेल बेहद खास रहे हैं। भारत ने इन खेलों में अब तक का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 9 पदक जीते, जिनमें 5 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि भारत अब एशिया में तीरंदाजी की बड़ी ताकत बनकर उभर चुका है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत के शानदार प्रदर्शन में कंपाउंड वर्ग के खिलाड़ियों का दबदबा रहा। भारतीय टीम ने लगातार दूसरी बार पुरुष, महिला और मिश्रित टीम के तीनों कंपाउंड स्वर्ण पदक अपने नाम किए। महिला कंपाउंड टीम ने फाइनल में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
मिश्रित कंपाउंड जोड़ी की सफलता भी भारत के लिए बेहद अहम रही। इस जोड़ी ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए भारत का कोटा हासिल किया है। खास बात यह है कि कंपाउंड तीरंदाजी को 2028 ओलंपिक में पहली बार शामिल किया जाना है। ऐसे में एची-नागोया की सफलता भारत के लिए आगे की बड़ी उम्मीद भी लेकर आई है।
हालांकि, भारतीय तीरंदाजी की सबसे बड़ी उपलब्धि रिकर्व वर्ग में देखने को मिली। इस वर्ग में दक्षिण कोरिया लंबे समय से एशियाई खेलों में अपना दबदबा बनाए हुए था। भारतीय महिला रिकर्व टीम ने कोरिया की लगातार 7 एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की लय तोड़ते हुए पहली बार इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला।
इसके अलावा मिश्रित रिकर्व जोड़ी ने इस स्पर्धा में भारत को पहली बार पदक दिलाया। पुरुष रिकर्व टीम ने भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए लगातार दूसरी बार रजत पदक जीता। व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में 17 साल के एक भारतीय तीरंदाज ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उसके दबाव में शानदार प्रदर्शन ने भारत के लिए एक और ओलंपिक कोटा भी हासिल किया।
भारतीय तीरंदाजी संघ के महासचिव वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि नागोया की सफलता अचानक नहीं मिली है। उनके मुताबिक, यह करीब 15 साल से चल रहे लगातार प्रयासों का नतीजा है। बेहतर खेल ढांचा, अच्छे उपकरण, विदेशी प्रशिक्षकों की मदद, खेल विज्ञान और नियमित अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने खिलाड़ियों को मजबूत बनाया है।
गौरतलब है कि नागोया में भारतीय खिलाड़ियों के सामने मौसम और यात्रा से जुड़ी कई मुश्किलें भी थीं। लंबे सफर, तेज हवाओं और भारी बारिश के बीच खिलाड़ियों ने अपना संतुलन बनाए रखा। सचदेवा ने इसे टीम के मजबूत मानसिक रवैये का प्रमाण बताया।
इस अभियान में भारतीय महिला खिलाड़ियों की भूमिका भी बेहद अहम रही। कंपाउंड से लेकर रिकर्व तक महिला तीरंदाजों ने निर्णायक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। सचदेवा का कहना है कि इन खिलाड़ियों की सफलता देश की लाखों लड़कियों को तीरंदाजी जैसे खेल को अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
उन्होंने प्रशिक्षकों, सहयोगी कर्मचारियों और खिलाड़ियों के परिवारों को भी इस सफलता का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, कई मौकों पर पदक करीब नजर आया, लेकिन लगातार समर्थन और भरोसे ने खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की ताकत दी।
सचदेवा ने बताया कि एशियाई खेलों के दौरान केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भारतीय दल की तैयारी और खिलाड़ियों की कुशलता जानने के लिए उन्हें 2 बार फोन किया था। अब 2028 ओलंपिक में कंपाउंड की शुरुआत और रिकर्व में हासिल ओलंपिक कोटे के साथ भारत की नजरें अगले बड़े मंच पर हैं। नागोया के 9 पदक इस बात का संकेत हैं कि भारतीय तीरंदाज दुनिया की शीर्ष टीमों से मुकाबले के लिए तैयार हैं और आने वाले समय में उनकी चुनौती और बड़ी होने वाली हैं।
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