ग्वालियर। साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। अब मोबाइल में APK फाइल डाउनलोड करवाकर बैंक खाते तक पहुंच बनाने का तरीका सामने आया है। ग्वालियर में सिरोल और कंपू थाना क्षेत्र में साइबर ठगी की दो अलग-अलग घटनाओं में एक व्यापारी और एक युवक के खातों से कुल 2.24 लाख रुपए पार कर दिए गए। दोनों पीड़ितों को खाते से रुपए कटने के मैसेज मिलने के बाद ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी है।
व्यापारी के खाते से चार ट्रांजेक्शन में 1.32 लाख रुपए गायब
सिरोल थाना क्षेत्र स्थित एंजिल हाइट्स निवासी सुनील सिंह भदौरिया (42) पुत्र ब्रजेन्द्र भदौरिया बानमौर और मालनपुर की फैक्ट्रियों में सरसों की ढूरी सप्लाई का कारोबार करते हैं। सोमवार शाम करीब साढ़े छह बजे वह अपने फ्लैट पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर बैंक खाते से रुपए कटने के लगातार मैसेज आने लगे।
उन्होंने मोबाइल चेक किया तो खाते से चार ट्रांजेक्शन में 49,500 रुपए, 49,490 रुपए, 1,010 रुपए और 32,000 रुपए निकाले जा चुके थे। कुछ ही देर में खाते से 1.32 लाख रुपए से अधिक की रकम गायब हो गई। अचानक इतनी बड़ी राशि निकलने से व्यापारी के होश उड़ गए।
सुनील सिंह ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया और घटना की शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में पुलिस ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और रकम किस खाते में ट्रांसफर हुई, इसकी जानकारी जुटा रही है।
बैंक बैलेंस चेक किया तो खाते से 92 हजार रुपए गायब
दूसरी घटना कंपू थाना क्षेत्र के गुढ़ागुढ़ी का नाका स्थित कुशवाह मोहल्ले की है। यहां रहने वाले सचिन कुशवाह (28) पुत्र सुरेश कुशवाह एक निजी कंपनी में काम करते हैं। 18 जुलाई को वह घर पर मौजूद थे। इसी दौरान उन्होंने अपने बैंक खाते का बैलेंस चेक किया तो खाते में रकम कम दिखाई दी।
लेनदेन की जानकारी देखने पर पता चला कि खाते से दो बार में 50 हजार और 42 हजार रुपए, यानी कुल 92 हजार रुपए, यूपीआइ आइडी के जरिए ट्रांसफर किए जा चुके थे। सचिन को जब खाते से रुपए निकलने की जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल बैंक से संपर्क कर खाता ब्लॉक कराया। इसके बाद साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
APK फाइल क्या है, कैसे बनती है ठगी की वजह?
APK यानी Android Package Kit फाइल एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होती है। साइबर ठग अक्सर ऐसी फाइल को किसी उपयोगी ऐप, दस्तावेज, बिल, चालान, केवाइसी अपडेट या अन्य जरूरी जानकारी के नाम पर भेज सकते हैं। यूजर जैसे ही अनजान स्रोत से मिली APK फाइल को इंस्टॉल करता है, मोबाइल में संदिग्ध ऐप को अनुमति मिल सकती है।
यदि ठगों को मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मिल जाए तो वे खाते से रकम ट्रांसफर करने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए किसी अनजान नंबर से आई APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत करें ये काम
साइबर ठगी होने पर सबसे जरूरी है कि पीड़ित बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, रकम को संबंधित खाते में फ्रीज कराने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है। इसके साथ बैंक को तत्काल सूचना देकर संबंधित खाता, कार्ड या यूपीआइ सेवा को ब्लॉक कराना चाहिए।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान नंबर से भेजी गई APK फाइल, लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें। किसी भी व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप भी इंस्टॉल न करें। बैंकिंग से जुड़ी ओटीपी, पिन, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करें।


