रामपुर में ऑल इंडिया मुस्लिम फेडरेशन ने रमज़ान उल मुबारक के 17वें रोज़े के अवसर पर जंग-ए-बदर की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम फेडरेशन के मुख्यालय, मोहल्ला चाह ख़ज़ान ख़ान, पहाड़ी गेट रोड रामपुर में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिया इमाम रामपुर जनाब सैयद ज़मा बाकरी साहब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में जंग-ए-बदर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह जंग इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक है, जिसने मुसलमानों को धैर्य, साहस और ईमान की शक्ति का संदेश दिया।
ऑल इंडिया मुस्लिम फेडरेशन के कौमी अध्यक्ष जनाब बाबर ख़ान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि जनाब नोमान ग़ाज़ी ने इसका संचालन किया। कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना शादाब क़दीरी द्वारा क़ुरान पाक की तिलावत से हुई। वक्ताओं ने बताया कि बदर के मैदान में मदीना के मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों और हमलों के खिलाफ 313 मुसलमानों और 1000 क़ुरैश के लोगों के बीच यह जंग हुई थी। सीमित संसाधनों और कम हथियारों के बावजूद मुसलमानों ने बहादुरी से मुकाबला किया। इस जंग में 70 क़ुरैश मारे गए और 70 को बंदी बना लिया गया, जबकि 14 मुसलमान शहीद हुए। इस जंग में मुसलमानों को जीत मिली, जिसे इतिहास में जंग-ए-बदर की फ़तह के नाम से जाना जाता है। दुनिया भर के मुसलमान हर साल रमज़ान के 17वें रोज़े पर जंग-ए-बदर की इस जीत का जश्न मनाते हैं। वे इस जंग में शहीद हुए 14 मुसलमानों को याद करते हैं और उनकी मग़फ़िरत (मोक्ष) के लिए दुआ करते हैं। कार्यक्रम में हाजी मोहम्मद ज़मीर रज़वी एडवोकेट, राहत जान ख़ान, मास्टर बाबू अली ख़ान एडवोकेट, बाबू ख़ान, ख़ान शोएब यूनुस, अर्शी ख़ान, आरिज़ ख़ान, फ़ैज़ान ख़ान, मास्टर वहाब उद्दीन और मज़हर रामपुरी सहित कई पदाधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ हुआ।


