नवादा जिले में अग्रवाल समाज ने सामूहिक होलिका दहन परंपरा का आयोजन किया। यह परंपरा 100 वर्षों से अधिक पुरानी है और इसे जिले के सबसे प्रमुख स्थान सब्जी बाजार में मनाया गया। हजारों लोग अपने परिवारों के साथ इस आयोजन में शामिल हुए। समाज के लोग अपने घरों से निकलकर एक साथ एकत्र हुए। सबसे पहले विधि-विधान से होलिका पूजन किया गया, जिसमें मंत्रोच्चारण, आरती, गेहूं की बालियां और मिष्ठान अर्पित किए गए। महिलाएं विशेष रूप से पारंपरिक लाल जोड़े या वेशभूषा में भाग लेती हैं। लोगों ने एक-दूसरे को लगाया अबीर-गुलाल सब्जी बाजार में होलिका दहन के बाद लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और होली की शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करता है। समाज की एकजुटता का प्रतीक है परंपरा अग्रवाल समाज के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि यह परंपरा व्यापारिक समृद्धि, परिवार की सुख-शांति और समाज की एकजुटता का प्रतीक है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही यह रीत नवादा की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बन चुकी है। इस वर्ष भी बाजार क्षेत्र में भारी भीड़ और उत्साह देखा गया। होलिका दहन के बाद रंगों की होली खेलने की तैयारियां शुरू हो गईं। अग्रवाल समाज का यह सामूहिक कार्यक्रम अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। नवादा जिले में अग्रवाल समाज ने सामूहिक होलिका दहन परंपरा का आयोजन किया। यह परंपरा 100 वर्षों से अधिक पुरानी है और इसे जिले के सबसे प्रमुख स्थान सब्जी बाजार में मनाया गया। हजारों लोग अपने परिवारों के साथ इस आयोजन में शामिल हुए। समाज के लोग अपने घरों से निकलकर एक साथ एकत्र हुए। सबसे पहले विधि-विधान से होलिका पूजन किया गया, जिसमें मंत्रोच्चारण, आरती, गेहूं की बालियां और मिष्ठान अर्पित किए गए। महिलाएं विशेष रूप से पारंपरिक लाल जोड़े या वेशभूषा में भाग लेती हैं। लोगों ने एक-दूसरे को लगाया अबीर-गुलाल सब्जी बाजार में होलिका दहन के बाद लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और होली की शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, भाईचारे और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करता है। समाज की एकजुटता का प्रतीक है परंपरा अग्रवाल समाज के वरिष्ठ सदस्य राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि यह परंपरा व्यापारिक समृद्धि, परिवार की सुख-शांति और समाज की एकजुटता का प्रतीक है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही यह रीत नवादा की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा बन चुकी है। इस वर्ष भी बाजार क्षेत्र में भारी भीड़ और उत्साह देखा गया। होलिका दहन के बाद रंगों की होली खेलने की तैयारियां शुरू हो गईं। अग्रवाल समाज का यह सामूहिक कार्यक्रम अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है।


