उम्र 56 साल, एवरेस्ट पर 32वीं बार फतह: जानिए कैसे खुद का ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाले कामी रिता शेरपा बने ‘एवरेस्ट मैन’

उम्र 56 साल, एवरेस्ट पर 32वीं बार फतह: जानिए कैसे खुद का ही वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाले कामी रिता शेरपा बने ‘एवरेस्ट मैन’

Kami Rita Sherpa 32nd time Everest: जब लोग 50 की उम्र पार करने के बाद सुबह की सैर पर भी हांफने लगते हैं, उस उम्र में दुनिया का एक ऐसा इंसान है जिसके लिए 8,848.86 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना किसी असाधारण मिशन को बार-बार पूरा करने जैसा बन चुका है। हम बात कर रहे हैं नेपाल के दिग्गज पर्वतारोही कामी रिता शेरपा की। उन्होंने 32वीं बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचकर एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसे तोड़ पाना शायद आने वाले कई दशकों तक किसी के बस की बात नहीं होगी। आइए जानते हैं कि थामे गांव का एक साधारण सा लड़का कैसे पूरी दुनिया में ‘एवरेस्ट मैन’ के नाम से मशहूर हो गया।

पर्वतारोहण से जुड़ा परिवार, विरासत में मिला जुनून

कामी रिता का जन्म एवरेस्ट की तलहटी में बसे थामे गांव में हुआ था। पर्वतारोहण उनके जीवन का हिस्सा बचपन से ही रहा। उनके पिता भी पर्वतारोहण गाइड थे। कामी रिता ने बचपन से अपने पिता और बड़े भाई को पर्वतारोहियों की मदद करते और उन्हें रास्ता दिखाते देखा। यहीं से उनके मन में पहाड़ों को फतह करने का जुनून पैदा हुआ।

24 साल की उम्र में पहली बार रखा कदम

कामी रिता ने महज 24 साल की उम्र में 13 मई 1994 को पहली बार माउंट एवरेस्ट पर कदम रखा था। उस समय वह एक साधारण सपोर्ट स्टाफ के रूप में गए थे। लेकिन उनकी अद्भुत शारीरिक क्षमता और पहाड़ों की समझ को देखकर जल्द ही उन्हें मुख्य गाइड बना दिया गया। 1994 से लेकर 2026 तक, पिछले 32 सालों में उन्होंने लगभग हर साल एवरेस्ट पर चढ़ाई की है। कई बार तो उन्होंने एक ही सीजन में दो-दो बार चढ़ाई पूरी की है।

कामी रिता सिर्फ एवरेस्ट ही नहीं, बल्कि दुनिया की दूसरी सबसे खतरनाक चोटी K2, चो ओयू (Cho Oyu), ल्होत्से (Lhotse) और मनास्लु (Manaslu) जैसी 8,000 मीटर से ऊंची कई अन्य चोटियों पर भी कई बार फतह हासिल कर चुके हैं।

ऊंचाई पर काम करने की अद्भुत क्षमता

वैज्ञानिकों के लिए भी कामी रिता की फिटनेस बेहद दिलचस्प रही है। इतनी ऊंचाई पर जहां आम इंसानों को ऑक्सीजन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है, वहीं शेरपा समुदाय के लोग अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पीढ़ियों से हिमालय की ऊंचाइयों पर रहने के कारण शेरपा समुदाय के शरीर में कम ऑक्सीजन में भी काम करने की खास जैविक क्षमता विकसित हुई है, और कामी रिता इसका प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं।

‘मैं रिकॉर्ड के लिए नहीं, अपनी कौम के लिए चढ़ता हूं’

जब भी मीडिया कामी रिता से उनके वर्ल्ड रिकॉर्ड के बारे में पूछता है, तो वह बेहद सादगी से मुस्कुरा देते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैंने कभी रिकॉर्ड बनाने के लिए पहाड़ों पर चढ़ना शुरू नहीं किया था। मैं तो बस एक गाइड के रूप में काम कर रहा था। यह मेरा रोजगार है। मैं पहाड़ों पर इसलिए चढ़ता हूं ताकि दुनिया को पता चल सके कि हमारी शेरपा कौम कितनी बहादुर है। हमारे बिना कोई भी विदेशी एवरेस्ट फतह करने का सपना नहीं देख सकता।’

क्यों खास है यह 32वीं फतह?

इस साल की चढ़ाई इसलिए भी बेहद खास और भावुक मानी जा रही है, क्योंकि पिछले कुछ सालों से नेपाल के ही एक अन्य दिग्गज पर्वतारोही पासांग दावा शेरपा उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे थे और 27 फतह तक उनके बराबर पहुंच गए थे। लेकिन कामी रिता ने अपनी उम्र को महज एक नंबर साबित करते हुए लगातार अपनी बढ़त बनाए रखी और आज 32वीं बार फतह कर अपना ही विश्व रिकॉर्ड और मजबूत कर लिया। दुनिया आज इस महान पर्वतारोही के जज्बे को सलाम कर रही है, जिसने एवरेस्ट को अपने जीवन का सबसे बड़ा मिशन बना लिया है।

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