ब्रॉन्ज के बाद अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड का सपना:मेरठ के उमेश शर्मा ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जीता पदक

ब्रॉन्ज के बाद अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड का सपना:मेरठ के उमेश शर्मा ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जीता पदक

मेहनत, अनुशासन और हौसले का नाम है कुश्ती। यही साबित कर दिखाया है मेरठ के युवा उमेश कुमार शर्मा ने, जिन्होंने अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर जिले और देश का नाम रोशन किया है। उमेश ने सितंबर 2025 को गोरखपुर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में 60 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। खास बात यह रही कि अंकुर को कुश्ती में आए अभी 6 महीने ही हुए हैं। एथलेटिक्स छोड़ कुश्ती चुनी उमेश पहले एथलेटिक्स के खिलाड़ी थे, लेकिन चोट के चलते उन्हें यह खेल छोड़ना पड़ा। इसके बाद एक दोस्त के साथ अखाड़े पहुंचे और वहीं से कुश्ती का सफर शुरू हुआ। उमेश ने बताया की शुरुआत में उमेश को काफी मुश्किलें हुई रोज़ाना सुबह-शाम अकादमी जाना और खासकर सर्दियों में काफी परेशानी होती है क्योंकि अकादमी घर से बहुत दूर है । साथ ही सख्त डाइट ,लगातार अभ्यास और चोट और थकान के कारण भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन अनुशासन और मेहनत ने धीरे-धीरे सब आसान बना दिया। नेपाल का पहलवान बना सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उमेश के मुकाबले रूस ,केन्या और नेपाल के खिलाड़ियों से हुए। उमेश बताते हैं कि फाइनल नेपाल के खिलाड़ी से सबसे कठिन रही। उस वक्त लगा कि शायद पदक हाथ से निकल जाए, लेकिन तकनीक, धैर्य और कोच की सीख ने जीत दिला दी। 6 महीने की कड़ी तैयारी, कोच का बड़ा योगदान उमेश ने बताया की उमेश पिछले 6 महीनों से लगातार तैयारी कर रहे थे। सेलेक्शन लेटर मिलने के बाद आखिरी 3 महीनों में प्रैक्टिस और तेज कर दी गई। साथ ही उन्होंने बताया की कोच अभिषेक चौधरी की मेहनत का नतीजा है कि उमेश देश के लिए पदक जीत पाए । अब रूस में वर्ल्ड चैंपियनशिप का लक्ष्य उमेश का चयन अब साउथ एशियन / वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए हुआ है, जो सितंबर-अक्टूबर में रूस में प्रस्तावित है। उमेश ने कहा की अब लक्ष्य सिर्फ एक है—देश के लिए गोल्ड मेडल। उमेश ने बताया कि इस सफर में परिवार ,रिश्तेदार ,दोस्त ने हर कदम पर साथ दिया। उन्होंने कहा की जब भी मुश्किल आई, सब दीवार बनकर मेरे पीछे खड़े रहे। जूनियर खिलाड़ियों के लिए संदेश उमेश ने सभी युवा और जूनियर खिलाडियों को कहा की कुश्ती सिर्फ ताकत का नहीं, दिमाग और तकनीक का खेल है। इसे छोटा खेल न समझें। अगर मेहनत करेंगे तो कुछ न कुछ जरूर मिलेगा।

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