कोलकाता, सात सितंबर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दर्ज तीन प्राथमिकियों से जुड़े मामले में उन्हें सोमवार को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी और उनके खिलाफ लगातार दर्ज हो रहे मामलों पर नाराजगी भी जताई। इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने बनर्जी के खिलाफ कुल चार प्राथमिकियों से जुड़े दो मामलों में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी। सोमवार को जिन मामलों में बनर्जी को राहत मिली, उनमें उनके द्वारा आयोजित दो ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविरों में चिकित्सा लापरवाही और इलाज में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह 30 नवंबर तक बनर्जी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करें। अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी और उसी दिन संबंधित पुलिस अधिकारी इन प्राथमिकी की जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करें। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि एक ही व्यक्ति ने एक से अधिक मामलों में पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।
सुनवाई के दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि वह ऐसा आदेश जारी करेंगे, जिसके बाद उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना बनर्जी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकेगी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “अब बहुत हो गया। इस साल मई से मैं इन मामलों की सुनवाई कर रहा हूं।
अब मैं एक अन्य पीठ द्वारा शुभेंदु अधिकारी से जुड़े मामले में दिए गए आदेश के आधार पर निर्देश जारी करूंगा, जिसमें कहा गया था कि अदालत की अनुमति के बिना उनके (अधिकारी) खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाए।”
बनर्जी के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया था कि आठ दिसंबर, 2022 को उच्च न्यायालय ने अधिकारी के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकियों पर रोक लगा दी थी और निर्देश दिया था कि अदालत की अनुमति के बिना उनके खिलाफ कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाए। उस समय अधिकारी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे और अब मुख्यमंत्री हैं। शंकरनारायणन ने बनर्जी के मामले में भी इसी तरह का आदेश जारी करने का अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि तीनों प्राथमिकी में से कोई भी सीधे तौर पर बनर्जी से जुड़ी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतें अभिजीत दास ने दर्ज कराई हैं, जो लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर सीट से बनर्जी से दो बार हार चुके हैं। अदालत ने कहा कि अधिक से अधिक यह मामला चिकित्सा लापरवाही के आरोप से जुड़ा है।
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) राजदीप मजूमदार ने कहा कि शिकायतकर्ता दास एक ‘व्हिसलब्लोअर’ हैं और उन्होंने टीएमसी सांसद के प्रभाव के कारण पहले पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।

