नयी दिल्ली, तीन नवंबर उच्चतम न्यायालय ने पाबंदी के बावजूद दिल्ली के बाजारों में विभिन्न प्रकार के पटाखों की बिक्री संबंधी एक अखबार की खबर का संज्ञान लेते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह उसके आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करे। न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘‘हिंदुस्तान टाइम्स में आज की खबर में एक तस्वीर है… इसमें कहा गया है कि कल के आदेश के बावजूद अब दुकानों में सब कुछ उपलब्ध है। कृपया इस पर ध्यान दें।’’
न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा, ‘‘खबर में कहा गया है कि बाजार में हर तरह के पटाखे उपलब्ध हैं, चाहे वे लाइसेंस प्राप्त हों या बिना लाइसेंस वाले, उन पर क्यूआर कोड हो या नहीं।
कृपया इस पर ध्यान दें।’’
उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सात और आठ नवंबर (दीपावली) को सुबह छह से सात बजे और रात आठ से 10 बजे तक हरित पटाखे फोड़ने की अनुमति दी है। पीठ ने 29 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘हालांकि, पूर्ण प्रतिबंध लगाना आदर्श समाधान प्रतीत होता है, लेकिन हमारा मानना है कि इस समय इस अदालत के पास यह तय करने के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं कि पटाखे फोड़ने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए पूर्ण प्रतिबंध सबसे बेहतर विकल्प होगा या नहीं।’’ आदेश सोमवार को जारी किया गया। उच्चतम न्यायालय ने उसके पहले के निर्देशों को लागू करने और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पटाखे फोड़ने पर रोक के लिए अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर नाराजगी जताई है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि पटाखे फोड़ने से निश्चित रूप से प्रदूषण होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को किसी विशेष गतिविधि में शामिल होने का अधिकार, भले ही उसका धार्मिक पहलू हो, पूर्ण नहीं है और यह संवैधानिक पाबंदियों से आगे नहीं हो सकता। पीठ ने 15 अक्टूबर 2025 के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें दीपावली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों की बिक्री और उन्हें फोड़ने की अनुमति दी गई थी।
इस आदेश में परंपराओं और पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए कुछ शर्तें भी लगाई गई थीं। पीठ ने स्पष्ट किया कि पटाखों पर पहले लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध नौ नवंबर से फिर से लागू हो जाएगा। पीठ ने पटाखों पर प्रतिबंध से जुड़े मामले में दायर याचिकाओं पर यह आदेश दिया।
उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा अधिसूचित ध्वनि निषेध क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे नहीं फोड़े जाएंगे। न्यायालय ने कहा कि इन क्षेत्रों को ‘पटाखा-मुक्त क्षेत्र’ घोषित किया जाएगा। इनकी जमीन पर निशानदेही की जाएगी और इन्हें सार्वजनिक भी किया जाएगा।

