नगर निगम चुनाव में इस बार प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के दौरान खर्च का पूरा हिसाब रखना होगा। राज्य चुनाव आयोग ने एक वार्ड से चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अधिकतम खर्च की सीमा 7.50 लाख रुपये तय की है। इससे अधिक खर्च करने पर प्रत्याशी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। राज्य चुनाव आयुक्त डॉ. विजय देव ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। आयोग का उद्देश्य चुनावी खर्च में पारदर्शिता लाना और प्रत्याशियों के खर्च पर निगरानी रखना है। नगर निगम चंडीगढ़ (काउंसलरों का निर्वाचन) नियम, 1995 के नियम 96 के तहत जारी आदेश के अनुसार, प्रत्याशी को नामांकन दाखिल करने की तारीख से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक हर दिन के खर्च का हिसाब निर्धारित प्रारूप में रखना होगा। इसमें उम्मीदवार की ओर से या उसके अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से किए गए सभी चुनावी खर्च शामिल होंगे। प्रचार सामग्री, बैनर, पोस्टर, रैली और अन्य चुनावी गतिविधियों पर होने वाले खर्च का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। हर भुगतान का वाउचर और प्रत्याशी के हस्ताक्षर जरूरी चुनाव आयोग ने खर्च के प्रमाण को लेकर भी सख्ती की है। प्रत्येक भुगतान के लिए पार्टी या सप्लायर से क्रमांकित वाउचर लेना होगा। इस वाउचर पर प्रत्याशी के हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे। इससे आयोग चुनाव प्रचार पर किए गए खर्च का सत्यापन कर सकेगा। नतीजे के 15 दिन के भीतर जमा कराना होगा हिसाब चुनाव परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर उम्मीदवार को अपने चुनावी खर्च का पूरा विवरण शपथ पत्र के साथ संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर के पास जमा कराना होगा। यह नियम सभी प्रत्याशियों पर लागू होगा। हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन, सरकारी विभागों, एजेंसियों, निकायों या नगर निगम की ओर से आधिकारिक तौर पर उपलब्ध कराई गई सुविधाओं पर होने वाला खर्च प्रत्याशी की 7.50 लाख रुपये की सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा। 10 रुपये देकर आम नागरिक भी देख सकेंगे खर्च का ब्योरा चुनावी खर्च का विवरण आम लोगों के लिए भी उपलब्ध रहेगा। रिटर्निंग ऑफिसर को प्रत्याशी का खर्च विवरण मिलने के दो दिनों के भीतर अपने कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर इसकी सूचना लगानी होगी। कोई भी नागरिक 10 रुपये शुल्क देकर संबंधित उम्मीदवार के चुनावी खर्च के लेखे की प्रति प्राप्त कर सकेगा। हिसाब नहीं देने पर हो सकती है कार्रवाई निर्धारित समय और प्रक्रिया के तहत खर्च का ब्योरा जमा नहीं कराने वाले प्रत्याशी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। बिना उचित कारण चुनावी खर्च का लेखा-जोखा नहीं देने पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अन्य संबंधित कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

