लखनऊ में ई-रिक्शों के रजिस्ट्रेशन पर लग सकती है रोक:हाईकोर्ट ने सरकार को 4 सप्ताह में फैसला लेने का दिया निर्देश, SIT को संचालन की जिम्मेदारी दी

लखनऊ में ई-रिक्शों के रजिस्ट्रेशन पर लग सकती है रोक:हाईकोर्ट ने सरकार को 4 सप्ताह में फैसला लेने का दिया निर्देश, SIT को संचालन की जिम्मेदारी दी

लखनऊ में ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या और उनसे लगने वाले जाम पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को उन शहरों में नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर चार सप्ताह में फैसला लेने का निर्देश दिया है, जहां इनकी संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है। वहीं, प्रतिबंधित रास्तों पर ई-रिक्शों का संचालन पूरी तरह बंद कराने की जिम्मेदारी विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। लखनऊ में चल रहे करीब 1.33 लाख ई-रिक्शे खंडपीठ ने कहा कि लखनऊ में करीब 1.33 लाख ई-रिक्शे चल रहे हैं। इनकी बढ़ती संख्या से शहर की यातायात व्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है। कोर्टने कहा कि ई-रिक्शों की संख्या नियंत्रित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि हर ई-रिक्शे का पंजीकरण अनिवार्य है। केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पंजीकरण शुल्क में छूट का मतलब पंजीकरण से छूट नहीं है। बिना वैध पंजीकरण के कोई भी ई-रिक्शा सड़क पर नहीं चलाया जा सकता। प्रतिबंधित रास्तों पर संचालन बंद कराएगी SIT कोर्ट ने कहा कि 12 मई 2022 के आदेश के तहत लखनऊ के कई प्रमुख रास्तों पर ई-रिक्शों के संचालन पर रोक लगाई गई थी। इसके बावजूद इन रास्तों पर ई-रिक्शे चल रहे हैं। इस पर कोर्ट ने SIT को प्रतिबंधित रास्तों पर रोक के आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी दी है। SIT को प्रतिबंधित इलाकों की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर अन्य उपयुक्त रास्तों पर भी ई-रिक्शों के संचालन पर रोक लगाने की संभावना देखने को कहा गया है। वैकल्पिक रास्ते तय करने के भी निर्देश खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ई-रिक्शों पर रोक लगाते समय उनके लिए वैकल्पिक रास्ते भी तय किए जाएं, ताकि आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो। SIT को अगली सुनवाई पर आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट कोर्टमें पेश करनी होगी। वहीं, राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर नए ई-रिक्शों के पंजीकरण पर रोक लगाने के प्रस्ताव पर अपना फैसला बताना होगा।

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