बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में करीब 30 साल बाद जंगल सफारी शुरू होने जा रही है। 1 नवंबर 2026 से पर्यटक यहां जिप्सी से जंगल घूम सकेंगे और बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा समेत कई वन्यजीवों को देख सकेंगे। पहले चरण में 9 किलोमीटर का सफारी रूट बनाया गया है। इसके लिए 4 जिप्सी वाहन रखे गए हैं। सफारी का शुल्क 2 हजार रुपए तय किया गया है। इस पहल से जिले में पर्यटन बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। देश का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्रफल के हिसाब से देश का चौथा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। इसे 1981 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। इसके बाद 1982-83 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल किया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 2,799.07 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 1,258.37 वर्ग किलोमीटर कोर और 1,540.70 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र है। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली भैंसा, गौर, चीतल और ऊदबिलाव जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं। इसके अलावा भारतीय गिद्ध और सफेद पीठ वाले गिद्ध जैसे दुर्लभ पक्षी भी यहां देखे जा सकते हैं। 9 किलोमीटर का होगा सफारी रूट पहले चरण में उल्लूर गांव से उंडलापर्ती तक करीब 9 किलोमीटर का सफारी रूट तय किया गया है। पर्यटकों के लिए 4 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। एक सफारी का शुल्क 2 हजार रुपए रखा गया है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर भविष्य में जिप्सी की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार जंगल सफारी शुरू होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्हें पर्यटन से जुड़े कामों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक जलपान गृह भी बनाया जाएगा, जहां पर्यटकों को स्थानीय खानपान और ग्रामीण परिवेश का अनुभव मिलेगा।

