IAS तुकाराम मुंढे को झटका! जहरीली शराब मामले में मंत्री नरहरि झिरवाल ने पलटा FDA का फैसला

IAS तुकाराम मुंढे को झटका! जहरीली शराब मामले में मंत्री नरहरि झिरवाल ने पलटा FDA का फैसला

Pune illicit liquor case: महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे की सख्त कार्रवाई लगातार चर्चा में है। खाद्य पदार्थों में मिलावट से लेकर नियमों का उल्लंघन करने वालो के खिलाफ मुंढे की कार्रवाई की सराहना हो रही है। हालांकि, अब उनकी एक बड़ी कार्रवाई पर राज्य सरकार के मंत्री ने ही रोक लगा दी है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल ने पुणे के रांजणगांव स्थित एक मिथेनॉल उत्पादक कंपनी के खिलाफ एफडीए की कार्रवाई को स्थगित कर दिया है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है।

दरअसल, पुणे में जहरीली शराब की घटना के बाद एफडीए प्रमुख तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में मिथेनॉल बनाने और उसका कारोबार करने वाली कंपनियों के खिलाफ जांच अभियान चलाया था। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली कई कंपनियों पर कार्रवाई की गई थी। रांजणगांव की एक कंपनी भी इस कार्रवाई की जद में आई थी। उसका लाइसेंस रद्द किया गया था। हालांकि, कंपनी की अपील पर मंत्री नरहरि झिरवाल ने कार्रवाई पर रोक लगा दी।

तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर मंत्री ने क्यों लगाई रोक?

पुणे में इसी साल मई में हुई जहरीली शराब की घटना के बाद एफडीए ने मिथेनॉल उत्पादक कंपनियों और कारोबारियों की जांच शुरू की थी। इस घटना में कई लोगों की जान चली गई थी। जांच में मिथेनॉल के उत्पादन, भंडारण और बिक्री से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई थीं।

इसके बाद तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में एफडीए ने संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की। इसी कड़ी में रांजणगांव औद्योगिक क्षेत्र की एक कंपनी का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया था।

इस कार्रवाई के खिलाफ 22 कंपनियों ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल के पास अपील दाखिल की थी। इनमें रांजणगांव की संबंधित कंपनी भी शामिल थी। जिसके बाद मंत्री ने उसके खिलाफ की गई कार्रवाई पर रोक लगा दी।

इस पूरे मामले में विवाद तब बढ़ गया, जब संबंधित कंपनी के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सुनेत्रा पवार गुट) के नेताओं से जुड़े होने की खबरें सामने आई। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

एनसीपी के वरिष्ठ नेता व मंत्री नरहरि झिरवाल के हवाले से सूत्रों ने बताया कि अपील करने वाली कंपनियों की ओर से पेश किए गए तथ्यों और दस्तावेजों की सुनवाई के बाद नियमानुसार निर्णय लिया गया है। किसी दबाव में यह निर्णय नहीं लिया गया है।

मुंढे के तबादले की भी उड़ी थी अफवाह

इस बीच, आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के एफडीए से तबादले की खबरें भी चर्चा में थीं। सोशल मीडिया पर उनके राजस्थान तबादले को लेकर मैसेज वायरल हुए थे। हालांकि, मुंढे ने इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि उनका तबादला महाराष्ट्र से बाहर नहीं हो सकता। वे महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त के तौर पर काम कर रहे हैं।

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