निर्दलीय MLC की बीजेपी में वापसी पर NDA में घमासान:JDU ने पूछा-6 साल के लिए निकाला,15 दिन में जॉइनिंग कैसे; सभापति से मिलेंगे जनसुराज के नेता

निर्दलीय MLC की बीजेपी में वापसी पर NDA में घमासान:JDU ने पूछा-6 साल के लिए निकाला,15 दिन में जॉइनिंग कैसे; सभापति से मिलेंगे जनसुराज के नेता

बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों JDU और BJP के बीच तनाव बढ़ गया है। सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राहुल राज और तिरहुत स्नातक से जीते निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने को लेकर जदयू ने सवाल खड़े किए हैं। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने राहुल राज की भाजपा में वापसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित किया था, उसे इतनी जल्दी वापस किस परिस्थिति में शामिल किया गया? भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व को इस पर विचार करना चाहिए। विधान परिषद के सभापति से मिलेंगे जनसुराज के नेता वहीं पूर्व मंत्री और जदयू के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने कहा, निर्दलीय सदस्यों को समर्थन देने का अधिकार किसी भी पार्टी को है। अगर भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया है, तो यह नियमों के तहत सही है। लेकिन कोई भी निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हो सकता। अगर दोनों भाजपा में शामिल हुए हैं, तो यह पूरी तरह अनैतिक और गलत है। इधर, MLC चुनाव जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर बृजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने पर जन सुराज का प्रतिनिधिमंडल आज विधान परिषद के सभापति से मुलाकात करेगा। RJD बोलीः भाजपा की कृपा पर जदयू है पूरे मामले पर राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, ‘अपने शर्त पर काम करने वाले जनता दल (यू) के हाल देखिए। जो भाजपा को आंख दिखाते थे, राजद के बैसाखियों का सहारा लेते थे, इधर से उधर चल जाएंगे, भय दिखाते थे। आज जदयू गिरगिड़ा रही है। उमेश कुशवाहा कह रहे हैं कि गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। शीर्ष नेतृत्व को विचार करनी चाहिए।’ ‘अब जदयू की कृपा पर भारतीय जनता पार्टी नहीं है, भारतीय जनता पार्टी की कृपा पर जनता दल (यू) है। भाजपा जान चुकी है कि जदयू का कोई अस्तित्व नहीं है। जदयू का अस्तित्व भारतीय जनता पार्टी के रहमो-कर्म पर है। अब उमेश कुशवाहा जी जाकर भाजपा के पैर पकड़ें या गिड़गिड़ाएं कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’ बंशीधर ब्रजवासी ने पहले बीजेपी जॉइन की, फिर वीडियो जारी कर दी सफाई शनिवार को तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीते राहुल राज ने शनिवार को भाजपा की सदस्यता ली थी। हालांकि, बंशीधर ब्रजवासी ने देर रात वीडियो जारी कर भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिलने गए थे, भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। इसके बाद से ही NDA के भीतर इस मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है। JDU के हारे प्रत्याशी बोले- क्या गठबंधन धर्म सिर्फ हम निभाएंगे? सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के प्रत्याशी रहे आनंद पुष्कर ने भी राहुल राज के भाजपा में शामिल होने पर नाराजगी जताई है। चुनाव में हार के बाद उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए भाजपा के बड़े नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने छल और साजिश का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या गठबंधन धर्म का पालन सिर्फ जदयू ही करेगी? बता दें, सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय राहुल राज ने जदयू के आनंद पुष्कर को हराया है। वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को शिकस्त दी है। दोनों सीटों पर NDA की ओर से जदयू के उम्मीदवार मैदान में थे। RJD ने दोनों MLC की सदस्यता रद्द करने की मांग की इस विवाद में अब बिहार की मुख्य विपक्षी दल राजद भी कूद गई है। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भाजपा में शामिल हुए दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पटना पार्टी कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून का उल्लंघन है। मनोज झा ने कहा कि हम बिहार विधान परिषद के सभापति से मांग करेंगे कि दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित किया जाए। इस मामले में चुनाव आयोग और सभापति के पास शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सभापति इस मामले में कोई फैसला नहीं लेते हैं तो बहुत बड़ा बवाल होगा। फिर सभापति इसे संभाल नहीं पाएंगे। बंशीधर बोले- शिक्षक हित में किसी के साथ जाना होगा तो जाएंगे विवाद बढ़ने पर बंशीधर ब्रजवासी ने कहा था कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें हमेशा छोटे भाई की तरह मानते हैं। चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री ने उनसे बात की थी। उन्होंने कहा था कि शिक्षक हित में अगर किसी के साथ जाना होगा तो जाएंगे। इसी वजह से उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी। हालांकि, बाद में उन्होंने वीडियो जारी कर पार्टी में शामिल होने की बात से इनकार कर दिया था। शिक्षक आंदोलन से बनी बंशीधर की पहचान बंशीधर ब्रजवासी बिहार में शिक्षक आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वह परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन और राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने जैसी मांगों को लेकर उन्होंने कई आंदोलनों में भूमिका निभाई। शिक्षक हितों के मुद्दों पर सक्रियता के कारण उनकी पहचान मजबूत हुई। इसी आधार पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तिरहुत स्नातक सीट से चुनाव लड़ा और जदयू के अभिषेक झा को हराया। पहली बार चुनाव लड़कर MLC बने राहुल राज सारण शिक्षक सीट से जीतने वाले डॉ. राहुल राज ने पहली बार विधान परिषद का चुनाव लड़ा था। उन्होंने जदयू के आनंद पुष्कर को हराकर जीत दर्ज की। राहुल राज पीएचडी धारक हैं और वीआईपी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह स्कूल-कॉलेज चलाने के साथ अन्य कारोबार से भी जुड़े हैं। उनके पिता का नाम विपिन सिंह है। वह सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के मुकरेड़ा गांव के रहने वाले हैं। राहुल राज भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और रिविलगंज के ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। अभिषेक झा ने हार को NDA के चक्रव्यूह से जोड़ा तिरहुत स्नातक सीट पर हार के बाद जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने चुनाव में साथ देने वाले मतदाताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए अपनी हार की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या NDA के अपने ही राजनीतिक परिवार के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में वह अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे? हालांकि, उन्होंने किसी के प्रति कटुता या द्वेष नहीं रखने की बात कही और कहा कि समय के साथ सच्चाई सामने आएगी। बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजे आने के बाद एनडीए के दो प्रमुख घटक दलों JDU और BJP के बीच तनाव बढ़ गया है। सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राहुल राज और तिरहुत स्नातक से जीते निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने को लेकर जदयू ने सवाल खड़े किए हैं। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने राहुल राज की भाजपा में वापसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित किया था, उसे इतनी जल्दी वापस किस परिस्थिति में शामिल किया गया? भाजपा और उसके शीर्ष नेतृत्व को इस पर विचार करना चाहिए। विधान परिषद के सभापति से मिलेंगे जनसुराज के नेता वहीं पूर्व मंत्री और जदयू के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने कहा, निर्दलीय सदस्यों को समर्थन देने का अधिकार किसी भी पार्टी को है। अगर भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया है, तो यह नियमों के तहत सही है। लेकिन कोई भी निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हो सकता। अगर दोनों भाजपा में शामिल हुए हैं, तो यह पूरी तरह अनैतिक और गलत है। इधर, MLC चुनाव जीतने वाले निर्दलीय प्रत्याशी बंशीधर बृजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने पर जन सुराज का प्रतिनिधिमंडल आज विधान परिषद के सभापति से मुलाकात करेगा। RJD बोलीः भाजपा की कृपा पर जदयू है पूरे मामले पर राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने तंज कसा है। उन्होंने कहा, ‘अपने शर्त पर काम करने वाले जनता दल (यू) के हाल देखिए। जो भाजपा को आंख दिखाते थे, राजद के बैसाखियों का सहारा लेते थे, इधर से उधर चल जाएंगे, भय दिखाते थे। आज जदयू गिरगिड़ा रही है। उमेश कुशवाहा कह रहे हैं कि गठबंधन धर्म का पालन करना चाहिए। शीर्ष नेतृत्व को विचार करनी चाहिए।’ ‘अब जदयू की कृपा पर भारतीय जनता पार्टी नहीं है, भारतीय जनता पार्टी की कृपा पर जनता दल (यू) है। भाजपा जान चुकी है कि जदयू का कोई अस्तित्व नहीं है। जदयू का अस्तित्व भारतीय जनता पार्टी के रहमो-कर्म पर है। अब उमेश कुशवाहा जी जाकर भाजपा के पैर पकड़ें या गिड़गिड़ाएं कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’ बंशीधर ब्रजवासी ने पहले बीजेपी जॉइन की, फिर वीडियो जारी कर दी सफाई शनिवार को तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीते राहुल राज ने शनिवार को भाजपा की सदस्यता ली थी। हालांकि, बंशीधर ब्रजवासी ने देर रात वीडियो जारी कर भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिलने गए थे, भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। इसके बाद से ही NDA के भीतर इस मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है। JDU के हारे प्रत्याशी बोले- क्या गठबंधन धर्म सिर्फ हम निभाएंगे? सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के प्रत्याशी रहे आनंद पुष्कर ने भी राहुल राज के भाजपा में शामिल होने पर नाराजगी जताई है। चुनाव में हार के बाद उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए भाजपा के बड़े नेताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने छल और साजिश का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या गठबंधन धर्म का पालन सिर्फ जदयू ही करेगी? बता दें, सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय राहुल राज ने जदयू के आनंद पुष्कर को हराया है। वहीं, तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को शिकस्त दी है। दोनों सीटों पर NDA की ओर से जदयू के उम्मीदवार मैदान में थे। RJD ने दोनों MLC की सदस्यता रद्द करने की मांग की इस विवाद में अब बिहार की मुख्य विपक्षी दल राजद भी कूद गई है। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भाजपा में शामिल हुए दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पटना पार्टी कार्यालय में रविवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेना संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून का उल्लंघन है। मनोज झा ने कहा कि हम बिहार विधान परिषद के सभापति से मांग करेंगे कि दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित किया जाए। इस मामले में चुनाव आयोग और सभापति के पास शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सभापति इस मामले में कोई फैसला नहीं लेते हैं तो बहुत बड़ा बवाल होगा। फिर सभापति इसे संभाल नहीं पाएंगे। बंशीधर बोले- शिक्षक हित में किसी के साथ जाना होगा तो जाएंगे विवाद बढ़ने पर बंशीधर ब्रजवासी ने कहा था कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें हमेशा छोटे भाई की तरह मानते हैं। चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री ने उनसे बात की थी। उन्होंने कहा था कि शिक्षक हित में अगर किसी के साथ जाना होगा तो जाएंगे। इसी वजह से उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी। हालांकि, बाद में उन्होंने वीडियो जारी कर पार्टी में शामिल होने की बात से इनकार कर दिया था। शिक्षक आंदोलन से बनी बंशीधर की पहचान बंशीधर ब्रजवासी बिहार में शिक्षक आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। वह परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन और राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने जैसी मांगों को लेकर उन्होंने कई आंदोलनों में भूमिका निभाई। शिक्षक हितों के मुद्दों पर सक्रियता के कारण उनकी पहचान मजबूत हुई। इसी आधार पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में तिरहुत स्नातक सीट से चुनाव लड़ा और जदयू के अभिषेक झा को हराया। पहली बार चुनाव लड़कर MLC बने राहुल राज सारण शिक्षक सीट से जीतने वाले डॉ. राहुल राज ने पहली बार विधान परिषद का चुनाव लड़ा था। उन्होंने जदयू के आनंद पुष्कर को हराकर जीत दर्ज की। राहुल राज पीएचडी धारक हैं और वीआईपी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह स्कूल-कॉलेज चलाने के साथ अन्य कारोबार से भी जुड़े हैं। उनके पिता का नाम विपिन सिंह है। वह सारण जिले के रिविलगंज प्रखंड के मुकरेड़ा गांव के रहने वाले हैं। राहुल राज भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य और रिविलगंज के ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। अभिषेक झा ने हार को NDA के चक्रव्यूह से जोड़ा तिरहुत स्नातक सीट पर हार के बाद जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने चुनाव में साथ देने वाले मतदाताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए अपनी हार की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या NDA के अपने ही राजनीतिक परिवार के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में वह अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे? हालांकि, उन्होंने किसी के प्रति कटुता या द्वेष नहीं रखने की बात कही और कहा कि समय के साथ सच्चाई सामने आएगी।  

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