3 दिन की बारिश से तैयार धान की फसल खराब:मुंगेर में बाढ़-तूफान अर्णव के बाद किसानों को नुकसान, खेतों में पानी भरने से कटाई मुश्किल

3 दिन की बारिश से तैयार धान की फसल खराब:मुंगेर में बाढ़-तूफान अर्णव के बाद किसानों को नुकसान, खेतों में पानी भरने से कटाई मुश्किल

मुंगेर में चक्रवाती तूफान अर्णव के असर से गुरुवार से मौसम बदला हुआ है। तेज हवा के साथ रुक-रुककर हो रही बारिश से धान की तैयार फसल खराब हो रही है। पहले बाढ़ और सूखे की मार झेल चुके किसानों को अब बारिश से नुकसान हो रहा है। 3 दिन से हो रही बारिश के कारण बाढ़ और सूखे से प्रभावित इलाकों में धान की फसल खराब हो रही है। खेतों में काटकर सुखाने के लिए रखी फसल पानी में डूब गई है। लंबे समय तक पानी में रहने से धान की बालियां फूलने और सड़ने लगी हैं। 5 दिन पहले फसल देखकर खुश थे किसान पांच दिन पहले तक किसान फसल देखकर खुश थे, लेकिन अब उसे घर तक ले जाना मुश्किल हो गया है। खेतों में पानी जमा होने से किसान फसल को खलिहान तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। पुआल तैयार करना भी मुश्किल है। जिन खेतों में धान की फसल अभी खड़ी है, वहां तेज हवा से फसल जमीन पर गिर गई है। इससे बालियां झड़ने और उत्पादन घटने की आशंका है। 385 पंचायतें बाढ़ से हुई थी प्रभावित जुलाई-अगस्त में मुंगेर जिले के छह प्रखंडों की 385 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई थीं। इनमें सदर मुंगेर, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर और असरगंज शामिल हैं। निचले इलाकों में करीब एक महीने तक पानी जमा रहने से धान की फसल गलकर नष्ट हो गई थी। कई किसानों को फसल के नुकसान का मुआवजा मिला, जबकि बड़ी संख्या में किसान अब भी इससे वंचित हैं। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सदर मुंगेर और बरियारपुर में पड़ा था। मुंगेर में चक्रवाती तूफान अर्णव के असर से गुरुवार से मौसम बदला हुआ है। तेज हवा के साथ रुक-रुककर हो रही बारिश से धान की तैयार फसल खराब हो रही है। पहले बाढ़ और सूखे की मार झेल चुके किसानों को अब बारिश से नुकसान हो रहा है। 3 दिन से हो रही बारिश के कारण बाढ़ और सूखे से प्रभावित इलाकों में धान की फसल खराब हो रही है। खेतों में काटकर सुखाने के लिए रखी फसल पानी में डूब गई है। लंबे समय तक पानी में रहने से धान की बालियां फूलने और सड़ने लगी हैं। 5 दिन पहले फसल देखकर खुश थे किसान पांच दिन पहले तक किसान फसल देखकर खुश थे, लेकिन अब उसे घर तक ले जाना मुश्किल हो गया है। खेतों में पानी जमा होने से किसान फसल को खलिहान तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। पुआल तैयार करना भी मुश्किल है। जिन खेतों में धान की फसल अभी खड़ी है, वहां तेज हवा से फसल जमीन पर गिर गई है। इससे बालियां झड़ने और उत्पादन घटने की आशंका है। 385 पंचायतें बाढ़ से हुई थी प्रभावित जुलाई-अगस्त में मुंगेर जिले के छह प्रखंडों की 385 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हुई थीं। इनमें सदर मुंगेर, बरियारपुर, जमालपुर, धरहरा, हवेली खड़गपुर और असरगंज शामिल हैं। निचले इलाकों में करीब एक महीने तक पानी जमा रहने से धान की फसल गलकर नष्ट हो गई थी। कई किसानों को फसल के नुकसान का मुआवजा मिला, जबकि बड़ी संख्या में किसान अब भी इससे वंचित हैं। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर सदर मुंगेर और बरियारपुर में पड़ा था।  

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