मुंबई। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि उन्हें आध्यात्मिक मानने में किसी को परेशानी क्यों होनी चाहिए? वे रोज सुबह 10 बजे कीर्तन करते हैं। राउत अपनी लिखी पुस्तक ‘बोध कीर्तन’ के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। इस मौके पर उन्होंने साहित्य, कीर्तन और जेल में बिताए दिनों से जुड़े कई अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे और लेखक अंबरिश मिश्र प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
‘रोज सुबह 10 बजे कीर्तन करता हूं’
राउत ने अपनी पुस्तक के नाम ‘बोध कीर्तन’ पर उठने वाले सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, कुछ लोगों को लगता है कि संजय राउत आध्यात्मिक कैसे हो सकते हैं? क्या मैं आध्यात्मिक नहीं हो सकता? मैं रोज सुबह 10 बजे कीर्तन करता हूं। उन्होंने कहा कि अच्छा वक्ता वही हो सकता है, जो अच्छा कीर्तनकार भी हो। वक्ता के पास कहने के लिए कुछ होना चाहिए, तभी उसका कीर्तन प्रभावी होता है और उसे अधिक श्रोता मिलते हैं।
जेल में लेखकों को भेजने की बात कही
जेल में बिताए 105 दिनों का जिक्र करते हुए राउत ने कहा कि वहां उनके पास कोई काम नहीं था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि लेखकों को कभी-कभी जेल भेजना चाहिए, इससे अच्छा साहित्य तैयार होगा। उन्होंने वीर सावरकर, लोकमान्य तिलक, जयप्रकाश नारायण, गोर्की, स्टालिन और लेनिन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन लोगों का महत्वपूर्ण साहित्य जेल में रहते हुए लिखा गया। क्रांति की चिंगारी भी कई बार जेल से ही उठती है। राउत ने जेल की एक कोठरी का किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि जिस कोठरी में उन्हें रखा गया था, उसके पास ही दो बीएचके हॉल जैसी बड़ी और सुंदर कोठरी थी। जब वे जेलर से वहां भेजने की मांग करते थे तो बताया जाता था कि वह कोठरी नीरव मोदी या विजय माल्या के लिए रखी गई है, ताकि लंदन की अदालत को दिखाया जा सके कि मानवीय अधिकारों का पालन हो रहा है।
मोदी के भाषण को बताया अच्छा
राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के भाषण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी उनके व्यक्तिगत दुश्मन नहीं हैं। जेल में रहते हुए उन्होंने राम मंदिर समारोह में भगवान श्रीराम पर मोदी का भाषण सुना और उसे लिख लिया था। राउत के मुताबिक, बिना टेलीप्रॉम्प्टर के दिया गया वह भाषण सहज और गैर राजनीतिक था। उन्हें वह मोदी के अब तक के भाषणों में बेहतर लगा, इसलिए उसे अपनी पुस्तक में शामिल किया। उन्होंने कहा कि वे भी एक इंसान हैं और उनकी भी भावनाएं हैं। उन्हें कविताएं पसंद हैं।

