इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गैंगस्टर एक्ट के तहत चल रहे 6 मामलों की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देकर इन मामलों को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद इन मामलों में कार्यवाही किस आधार पर जारी है। कोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। 1986 के तहत चल रही कार्रवाई को चुनौती दी न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने भीमसेन सिंह उर्फ राजू और अन्य की छह याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत चल रही कार्रवाई को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के शिव प्रताप सिंह उर्फ चिनू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले के फैसले का हवाला दिया। उनके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट को ‘स्टिलबॉर्न’ यानी जन्म से ही निष्प्रभावी बताया था। उनका कहना था कि यह कानून अपने आप में कोई अलग अपराध तय नहीं करता, बल्कि इसमें गैंग और गैंगस्टर की परिभाषा दी गई है। गैंग चार्ट के आधार पर इस कानून के तहत सजा का प्रावधान है। अलग अपराध के बिना सजा नहीं देने की दलील याचिकाकर्ताओं का कहना है कि किसी अलग अपराध के बिना गैंगस्टर एक्ट के तहत सजा नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने सामने आए मामलों में इस कानून के तहत शुरू की गई कार्यवाही रद्द कर दी थी। इसी फैसले के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने अपने खिलाफ चल रहे छह मामलों को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने फिलहाल इन मामलों की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

