एक अचानक हुई मुलाकात, एक साझा मंच और लाइमलाइट से दूर बातचीत—महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ दिखना राज्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे रहा है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जो काफी दिलचस्प है, क्योंकि हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में ‘महायुति’ गठबंधन के खराब प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।
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गुरुवार को मुंबई में एक किताब के विमोचन कार्यक्रम के दौरान, फडणवीस ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के साथ मंच साझा किया। कार्यक्रम के दौरान इन तीनों को अलग से बातचीत करते हुए भी देखा गया, और उनकी इस बातचीत की तस्वीरों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। फडणवीस ने उद्धव के साथ अपने पुराने संबंधों का खास तौर पर जिक्र करते हुए कहा कि 2019 से पहले जब भी उद्धव उन्हें फोन करते थे, तो वे हमेशा जवाब देते थे, लेकिन उसके बाद से वे उद्धव की ओर से किसी निमंत्रण का इंतजार कर रहे थे। फडणवीस ने कहा कि 2019 तक, जब भी उद्धव जी मुझे फोन करते थे, मैं चला जाता था। 2019 के बाद, उन्होंने फोन नहीं किया। मैं इंतजार कर रहा था।
हालाँकि, फडणवीस और राज ठाकरे दोनों ने ही इस मुलाकात के राजनीतिक महत्व को कम करके आंका। उन्होंने इसे एक ऐसा मौका बताया, जहाँ अलग-अलग पार्टियों के नेता एक साथ आए। फिर भी, बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए, इस मुलाकात के मायने अहम हो जाते हैं। क्या इन ताजा घटनाक्रमों से महाराष्ट्र में समीकरण बदलने का संकेत मिलता है, या फिर यह महज राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का एक सांस्कृतिक मंच पर साथ आना है?
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(Maharashtrachya Hasyaresha) नामक किताब के लॉन्च के लिए आयोजित किया गया था। इस किताब में मराठी कार्टूनिस्टों के इतिहास और उनके काम को दर्ज किया गया है। राज ठाकरे ने कहा कि कुछ मंच ऐसे होते हैं जो राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होते हैं और नेताओं को कला और संस्कृति के लिए एक साथ आने का मौका देते हैं। संस्कृति मंत्री आशीष शेलार ने फडणवीस द्वारा निमंत्रण स्वीकार करने के लिए उनकी तारीफ की, जिस पर राज ठाकरे ने मजाक में कहा कि बीजेपी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुख्यमंत्री 2029 तक अपने पद पर बने रहें, ताकि वे उन्हें आगे भी निमंत्रण देते रहें।

