डॉ. विनीता हत्याकांड में पूर्व नौकरानी पूनम बरी:4 दोषियों की फांसी की सजा 30-30 साल कैद में बदली; हाईकोर्ट ने कहा- साजिश के सबूत नहीं

डॉ. विनीता हत्याकांड में पूर्व नौकरानी पूनम बरी:4 दोषियों की फांसी की सजा 30-30 साल कैद में बदली; हाईकोर्ट ने कहा- साजिश के सबूत नहीं

हरियाणा के कुरुक्षेत्र के बहुचर्चित लेडी डॉक्टर विनीता अरोड़ा की हत्या और डकैती के मामले में करीब 45 महीने जेल में रहने के बाद उनकी पूर्व नौकरानी पूनम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से राहत मिली है। पहले ट्रायल कोर्ट ने पूनम समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने पूनम को बरी करते हुए मामले में शामिल चार दोषियों की सजा बदल दी। हाईकोर्ट ने उनकी फांसी की सजा को माफ करते हुए कम से कम 30-30 साल कैद की सजा सुनाई। हालांकि डॉ. विनिता के पति डॉ. अतुल अरोड़ा इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।

तीन साल 9 महीने बाद पूनम केस से कैसे बरी हुई। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा और पुलिस की क्या रही चूक? ऐसे ही सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ें दैनिक भास्कर की ये खबर।
जानें, क्या है डॉ. विनिता मर्डर केस… 9 जनवरी 2023 की रात डॉ. अतुल अरोड़ा अपने घर पर थे। रात करीब 9:20 बजे वह माता-पिता के कमरे में गए। इसी दौरान पत्नी विनीता की चीख सुनकर बाहर आए तो देखा कि 2 युवकों ने उन पर पिस्तौल तान रखी थी और कैश व गहनों के बारे में पूछ रहे थे। आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और घर से गहने व अन्य सामान ले गए। विनीता की मौत सिर में चोट लगने से हुई। अतुल की शिकायत पर 10 जनवरी 2023 को थाना शहर थानेसर में FIR दर्ज की गई। आरोपी केक लेने के बहाने घर में घुसे थे। पिस्तौल के बल पर काबू किया जब वह बाहर आए तो बदमाशों ने उन्हें भी पिस्तौल के बल पर काबू कर लिया। इसके बाद डॉ. विनीता के साथ मारपीट की गई, जिसमें उनकी मौत हो गई। आरोपी घर से नकदी और जेवरात लेकर फरार हो गए थे। वारदात के बाद पुलिस ने हत्या और डकैती का केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने जांच के दौरान पूनम समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और बरामदगी के आधार पर पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपियों से करीब साढ़े 19 लाख रुपये के जेवरात और लूटी गई लगभग डेढ़ लाख रुपये की नकदी बरामद करने का दावा किया था। पुलिस ने जताया था पूनम पर शक पूनम पहले डॉ. अतुल अरोड़ा के घर में नौकरानी का काम करती थी। डॉ. अतुल अरोड़ा ने शिकायत में शक जताया था कि पूनम को घर में कैश और गहने रखने की जगह पता थी। अतुल ने बताया था कि विक्रम उर्फ विक्की पहले पूनम को लेने अस्पताल आया करता था। पुलिस ने पूनम और विक्की के बीच संपर्क को साजिश से जोड़कर देखा। पुलिस ने एक मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल के आधार पर भी पूनम को आरोपियों से जोड़ने की कोशिश की। पुलिस का दावा था कि पूनम ने विक्की को घर की जानकारी दी थी। मामले में जांच के बाद पूनम को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, हाईकोर्ट के फैसले में उसकी गिरफ्तारी की सटीक तारीख का उल्लेख नहीं है। ट्रायल कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को पूनम समेत आरोपियों को दोषी ठहराया और 20 दिसंबर 2025 को फांसी की सजा सुनाई। अब जानें, हाईकोर्ट ने क्या कहा… पुलिस जिस मोबाइल नंबर को पूनम का बता रही थी, वह जसबीर सिंह के नाम पर था। जसबीर सिंह पूनम का जीजा है। जसबीर ने अदालत में कहा कि उसने सिम पूनम को नहीं दिया था। पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि उस नंबर का इस्तेमाल पूनम करती थी। कॉल डिटेल से वारदात के आसपास पूनम और दूसरे आरोपियों के बीच संपर्क साबित नहीं हुआ। विक्रम से जान-पहचान होना या घर में कैश-गहनों की जगह पता होना साजिश में शामिल होने का सबूत नहीं है। पूनम के खुलासे के आधार पर भी पुलिस को ऐसी कोई बरामदगी नहीं मिली, जो उसे वारदात से जोड़ती। हाईकोर्ट ने कहा कि पूनम के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पुख्ता सबूत नहीं हैं। अदालत ने उसकी सजा रद्द कर उसे बरी कर दिया। एडवोकेट अंकुश गुप्ता ने बताया कि हाईकोर्ट ने पूनम के प्रेमी समेत चार दोषियों पर लगी डकैती की धारा भी हटा दी, क्याेंकि डकैती की धारा में 5 या ज्यादा लोग शामिल होते हैं। वारदात के वक्त 4 लोग थे। साथ ही हाईकोर्ट ने पूनम को बरी कर दिया, तो चार दोषी पूनम के प्रेमी विक्रम उर्फ विक्की, विक्रमजीत उर्फ बिट्टू, सुनील कुमार और मनीष कुमार से भी धारा हटा दी गई। डॉ. अतुल अरोड़ा सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती डॉ. अतुल अरोड़ा ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। पूनम के बरी होने के बाद मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों की संख्या पांच से कम रह गई। हाईकोर्ट ने अन्य आरोपियों की सजा में भी बदलाव किया और डकैती की जगह लूट की धाराओं में सजा तय की।

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