इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर नगर के थाना बर्रा क्षेत्र में पत्नी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे शिव शंकर कुशवाहा की शेष सजा अपील के लंबित रहने तक निलंबित कर दी है।
न्यायमूर्ति मनोज बजाज और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने गुरुवार को आपराधिक अपील में सजा निलंबन अर्जी पर यह आदेश दिया। अपीलकर्ता को कानपुर नगर के अपर सत्र न्यायाधीश ने 6 जून 2018 को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। जानिये क्या है मामला अपीलकर्ता के अधिवक्ताओं ने कहा कि मृतका का शव ससुराल में मिला था और मृतका की मां ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया था, लेकिन इन आरोपों को अदालत ने विश्वसनीय नहीं माना। शादी के चार वर्ष बाद मृत्यु होने के कारण एफआईआर में धारा 304-बी जैसा अपराध शामिल नहीं किया गया। यह भी बताया गया कि मृतका के करीबी रिश्तेदार अहम अभियोजन गवाह अभियोजन कथानक का समर्थन नहीं कर सके और पक्षद्रोही घोषित हो गए। अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त ने घटना के समय मौजूद न होने का बचाव लिया, पर कोई साक्ष्य पेश नहीं किया। चूंकि शव उसके घर में मिला, इसलिए साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत पत्नी की हत्या की परिस्थितियां बताने का दायित्व उसी पर था। उन्होंने कहा कि गवाह पक्षद्रोही हो जाने के बावजूद दोष सिद्ध है। सुनवाई निकट भविष्य में संभव नहीं पीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि अपील में विचारणीय बिंदु हैं, जिन पर अंतिम सुनवाई में विचार होगा। अभियुक्त एफआईआर दर्ज होते ही गिरफ्तार हुआ और विचाराधीन व दोषसिद्धि के बाद मिलाकर 11 वर्ष से अधिक समय से हिरासत में है। अपील की सुनवाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती और सजा निलंबित न होने पर अपील निरर्थक हो सकती है। अपील के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना कोर्ट ने शेष सजा निलंबित कर दी।

