Child Investment Plan: PPF, SSY या SIP… बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कहां करें निवेश?

Child Investment Plan: PPF, SSY या SIP… बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कहां करें निवेश?

Best Investment for Child: बच्चों की पढ़ाई, शादी या भविष्य में कारोबार शुरू करने के लिए अच्छी रकम जुटानी है, तो सिर्फ बचत करना काफी नहीं है। सही समय पर सही जगह निवेश करना भी जरूरी है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए म्यूचुअल फंड SIP, जबकि सुरक्षित निवेश के लिए सुकन्या समृद्धि योजना और PPF जैसे विकल्प मददगार हो सकते हैं। साथ ही, माता-पिता का टर्म इंश्योरेंस और बच्चे का हेल्थ इंश्योरेंस भी जरूरी है।

बच्चे के लिए निवेश शुरू करने से पहले तय करें गोल

निवेश की शुरुआत किसी स्कीम से नहीं, बल्कि गोल से होनी चाहिए। पहले तय करें कि पैसा किस काम के लिए चाहिए और उसकी जरूरत कब पड़ेगी। बच्चे की हायर एजुकेशन, शादी या कारोबार के लिए रकम जुटाने की योजना अलग-अलग हो सकती है।

  • 10 साल या उससे ज्यादा का समय: इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP लॉन्ग टर्म में पैसा बढ़ाने का मौका देती है।
  • 5 से 10 साल का समय: इक्विटी के साथ PPF या सुकन्या समृद्धि जैसी सुरक्षित योजनाओं का बैलेंस बनाया जा सकता है।
  • 5 साल से कम का समय: ऐसे विकल्प चुनें, जहां पैसा सुरक्षित रहे और जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके।

निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी, बाजार के उतार-चढ़ाव से उबरने का उतना ही ज्यादा समय मिल सकता है। हालांकि, इक्विटी में मुनाफे की कोई गारंटी नहीं होती।

एजुकेशन से जुड़े गोल में महंगाई का रखें ध्यान

बच्चे की पढ़ाई के लिए रकम जुटाते समय महंगाई का सही अनुमान लगाना जरूरी है। प्रोफेशनल कोर्स और हायर एजुकेशन का खर्च सालाना करीब 10% बढ़ने का अनुमान लगाया जाता है। यह सामान्य महंगाई से ज्यादा हो सकता है। उदाहरण के लिए, आज जिस कोर्स की फीस 10 लाख रुपये है, उसकी लागत 10 साल बाद करीब 26 लाख रुपये और 15 साल बाद लगभग 42 लाख रुपये हो सकती है। यह कैलकुलेशन हर साल 10% खर्च बढ़ने पर आधारित है। वास्तविक फीस कोर्स, कॉलेज और देश के हिसाब से अलग हो सकती है। इसलिए निवेश का गोल तय करते समय सिर्फ आज की फीस को आधार न बनाएं। भविष्य में होने वाले खर्च को भी शामिल करें।

SIP: लंबे समय में पैसा बढ़ाने का विकल्प

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए हर महीने म्यूचुअल फंड में एक तय रकम निवेश की जाती है। बच्चों की पढ़ाई जैसे लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड उपयोगी हो सकते हैं।

SIP के फायदे

  • कम रकम से भी निवेश शुरू किया जा सकता है।
  • हर महीने निवेश करने से बाजार के अलग-अलग स्तरों पर यूनिट खरीदने का मौका मिलता है।
  • आमदनी बढ़ने पर निवेश की रकम भी बढ़ाई जा सकती है।
  • लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

कुछ अनुमान इक्विटी निवेश पर सालाना 10% से 14% तक रिटर्न मानकर चलते हैं, लेकिन यह तय रिटर्न नहीं है। बाजार में नुकसान भी हो सकता है। निवेश से होने वाले मुनाफे पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है। बच्चे के कॉलेज जाने का समय नजदीक आने लगे तो धीरे-धीरे रकम को कम जोखिम वाले विकल्पों में शिफ्ट करने पर विचार करना चाहिए।

सुकन्या समृद्धि योजना: बेटी के लिए सुरक्षित बचत

सुकन्या समृद्धि योजना खास तौर पर बेटियों के भविष्य के लिए बनाई गई सरकारी बचत योजना है। अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए इसकी ब्याज दर 8.2% सालाना है। यह दर सरकार की ओर से समय-समय पर बदली जा सकती है।

SSY में क्या है खास?

  • साल में कम से कम 250 रुपये जमा करने होते हैं।
  • एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।
  • बेटी की उम्र 10 साल होने से पहले खाता खुलवाना जरूरी है।
  • खाता खुलने की तारीख से योजना की अवधि 21 साल होती है।
  • पुरानी टैक्स व्यवस्था में जमा रकम पर धारा 80C के तहत छूट मिल सकती है।
  • ब्याज और मैच्योरिटी की रकम मौजूदा नियमों के तहत टैक्स-फ्री है।

बेटी की उच्च शिक्षा या शादी के लिए लंबी अवधि में रकम जुटाने के लिहाज से यह विकल्प उपयोगी हो सकता है। खाता खोलने से पहले निकासी और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर लें।

PPF: सरकारी गारंटी वाली लंबी अवधि की बचत

पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी पीपीएफ उन लोगों के लिए विकल्प है, जो लॉन्ग टर्म में अपेक्षाकृत सुरक्षित बचत करना चाहते हैं। अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही में इसकी ब्याज दर 7.1% सालाना है। नाबालिग बच्चे के नाम पर भी पीपीएफ खाता खोला जा सकता है। हालांकि, खाता चलाने और जमा करने के नियमों का पालन करना जरूरी है।

पीपीएफ में क्या है खास?

  • साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।
  • इसकी लॉक-इन अवधि 15 साल है।
  • ब्याज और मैच्योरिटी की रकम मौजूदा नियमों के तहत टैक्स-फ्री है।
  • पुरानी टैक्स व्यवस्था में जमा रकम पर धारा 80C के तहत छूट मिल सकती है।

टर्म इंश्योरेंस: निवेश से पहले परिवार को दें सुरक्षा

बच्चे के भविष्य के लिए निवेश करते समय एक जरूरी पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है। अगर कमाने वाले माता-पिता में से किसी की मृत्यु हो जाए, तो बच्चे के लिए चल रही बचत योजना बीच में रुक सकती है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए कमाने वाले माता-पिता के नाम पर पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस होना चाहिए। पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर तय शर्तों के अनुसार नॉमिनी को बीमा राशि मिलती है। इससे बच्चे की पढ़ाई और दूसरे जरूरी लक्ष्यों के लिए आर्थिक मदद मिल सकती है।

टर्म इंश्योरेंस लेते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • बीमा कवर परिवार की जरूरतों के हिसाब से तय करें।
  • पॉलिसी की अवधि ऐसी रखें कि बच्चे के आत्मनिर्भर होने तक सुरक्षा मिल सके।
  • सही नॉमिनी का नाम दर्ज कराएं।
  • पॉलिसी की शर्तें, प्रीमियम और कवर की तुलना करके फैसला लें।

टर्म इंश्योरेंस का उद्देश्य सुरक्षा देना है। अवधि पूरी होने तक पॉलिसीधारक के जीवित रहने पर आम तौर पर इसमें बीमा राशि नहीं मिलती। इसलिए बीमा और निवेश को अलग-अलग रखना कई मामलों में बेहतर विकल्प हो सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस: बीमारी के कारण बचत पर न पड़े असर

बच्चे की पढ़ाई के लिए जुटाई गई रकम अचानक अस्पताल के खर्च में इस्तेमाल हो जाए, तो लंबे समय की योजना बिगड़ सकती है। हेल्थ इंश्योरेंस ऐसे जोखिम को कम करने में मदद करता है। बच्चे को परिवार की हेल्थ पॉलिसी में शामिल किया जा सकता है या जरूरत के अनुसार दूसरी पॉलिसी चुनी जा सकती है। पॉलिसी खरीदने से पहले अस्पताल में भर्ती होने, इलाज, वेटिंग पीरियड, अपवाद और कवरेज की सीमा जैसी शर्तें समझ लें। सिर्फ कम प्रीमियम देखकर फैसला न करें। यह भी देखें कि पॉलिसी परिवार की वास्तविक जरूरतों को पूरा करती है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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