केरलम मर्सिडीज केस, जज की गिरफ्तारी पर रोक:नाबालिग बेटे ने स्कूटर सवार को टक्कर मारी थी; मृतक की बेटी बोली- आरोपियों को फायदा मिल रहा

केरलम मर्सिडीज केस, जज की गिरफ्तारी पर रोक:नाबालिग बेटे ने स्कूटर सवार को टक्कर मारी थी; मृतक की बेटी बोली- आरोपियों को फायदा मिल रहा

केरलम हाईकोर्ट ने कोच्चि के मर्सिडीज हादसे में 17 साल के नाबालिग आरोपी के पिता और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि जज न्यायिक अधिकारी हैं और जांच में सहयोग कर चुके हैं। वे पूछताछ के लिए भी पेश हुए थे। यह हादसा 24 अक्टूबर की देर रात कोच्चि के चेरानल्लूर इलाके में हुआ था। आरोप है कि जज का नाबालिग बेटा तेज रफ्तार मर्सिडीज चला रहा था। उसने स्कूटर सवार 55 साल के जयबालकृष्णन को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे में उनकी मौत हो गई। कार जज के नाम पर रजिस्टर्ड है। हाईकोर्ट के फैसले पर मृतक की बेटी भद्रकीर्ति ने कहा कि जज होने की वजह से आरोपी के परिवार को विशेष राहत मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसे के बाद आरोपी के माता-पिता कई घंटे घटनास्थल पर रहे और बेटे को बचाने की कोशिश की। जज ने कहा- बेटे के कार ले जाने की जानकारी नहीं थी जज ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल कर कहा कि उन्हें पता नहीं था कि उनका बेटा कार लेकर घर से निकला है। उनके मुताबिक, वे रात 1:28 बजे सोने चले गए थे। उन्हें हादसे की जानकारी रात 2:14 बजे फोन से मिली। दो दिन पहले हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने जज के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199ए के तहत मामला दर्ज किया और मामले में आरोपी बनाया था। पुलिस के मुताबिक, जज से बुधवार को पूछताछ की गई थी। गुरुवार दोपहर भी उनसे पूछताछ होगी। मृतक की बेटी का दावा- आरोपी पहले भी तेज रफ्तार में कार चलाता था वहीं मृतक की बेटी भद्रकीर्ति ने दावा किया है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि नाबालिग पहले भी कार चलाता था। उन्होंने दावा किया कि आरोपी ने अपने दोस्तों को 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से कार चलाने के वीडियो और तस्वीरें भेजी थीं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर तेज रफ्तार में ड्राइविंग से जुड़े वीडियो पोस्ट करता था। हादसे के कुछ घंटों बाद ये पोस्ट हटा दिए गए और अकाउंट को प्राइवेट कर दिया गया। रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि कुछ वीडियो में नाबालिग 200 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से कार चलाता दिखा था। हादसे के वक्त भी उसकी कार 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार में थी। ‘पुलिस आरोपी के परिवार पर कार्रवाई करने से डर रही थी’ भद्रकीर्ति ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी और उसके पिता के खिलाफ कार्रवाई करने से डर रही थी। उन्होंने कहा- हम आम लोग हैं, वे हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं। भद्रकीर्ति ने आरोप लगाया कि आरोपी के जज पिता ने उनके परिवार को अपमानित भी किया और कहा कि उन्हें उनसे सवाल करने का अधिकार नहीं है। भद्रकीर्ति ने कहा कि अगर पिता अपने बेटे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें भी जेल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार को हाईकोर्ट से उम्मीद थी, लेकिन जमानत का फैसला निराशाजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी आम व्यक्ति को भी ऐसी राहत मिलती। नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द कराने की मांग हादसे के बाद पुलिस ने शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था। 25 अक्टूबर की शाम पुलिस ने नाबालिग को थाने से जमानत दे दी थी। इसके बाद मृतक के बेटे-बेटी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेरानल्लूर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया और आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश करने की मांग की। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने भी बाद में नाबालिग को जमानत दे दी। मृतक परिवार की ओर से वकील एमजी श्रीजीत ने बताया कि राज्य सरकार ने जमानत के खिलाफ अपील की थी। परिवार ने भी अभियोजन का पक्ष रखने और जमानत रद्द कराने के लिए अदालत में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की। कोर्ट ने नाबालिग और उसके माता-पिता को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी। पुलिस आयुक्त का तबादला, चार पुलिसकर्मी निलंबित मामले में पुलिस लापरवाही के बाद कोच्चि के पुलिस आयुक्त एस. कलिराज महेश कुमार का तबादला किया जाएगा। आर. निशांतिनी नई पुलिस आयुक्त का कार्यभार संभालेंगी। इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है। पुलिस के शुरुआती बयान के मुताबिक, हादसे के समय किशोर शराब के नशे में नहीं था। उसके खून के सैंपल जांच के लिए लिए गए थे। पुलिस ने कहा कि जांच में जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।

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