केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चक्रवात ‘अरनाब’ से प्रभावित राज्यों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) बचाव और राहत कार्यों में पूरी तरह जुटे हुए हैं। 29 अक्टूबर को, शाह ने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और सहायता उपायों पर चर्चा की। उन्होंने ‘X’ (ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा कि चक्रवात ‘अरनाब’ के मद्देनजर, मैंने आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बात की है। मैंने उन्हें भरोसा दिलाया है कि आपदा के समय लोगों की कठिनाइयों को कम करने के लिए हर संभव मदद दी जाएगी।
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उन्होंने आगे कहा कि NDRF और SDRF की टीमें हरकत में आ गई हैं और युद्ध स्तर पर बचाव व राहत कार्य चला रही हैं। नुकसान का आकलन करने और आगे की जरूरी मदद तय करने के लिए जल्द ही IMCT (अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीमें) भेजी जाएंगी। भारत सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ लोगों के साथ खड़ी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, ‘बहुत भीषण चक्रवाती तूफान अर्नब’ (Very Severe Cyclonic Storm Arnab) के अवशेष के रूप में बना ‘डीप डिप्रेशन’ (deep depression) लगभग उत्तर दिशा की ओर 22 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा था। 29 अक्टूबर की सुबह 5:30 बजे तक यह कमजोर होकर एक ‘डिप्रेशन’ (depression) में बदल गया। यह सिस्टम दक्षिण छत्तीसगढ़ और उससे सटे दक्षिण ओडिशा के ऊपर, 19.0°N अक्षांश और 81.9°E देशांतर के पास, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से लगभग 20 किमी पश्चिम में केंद्रित था।
यह डिप्रेशन ओडिशा के भवानीपटना से 170 किमी दक्षिण-पश्चिम, टिटलागढ़ से 210 किमी दक्षिण-पश्चिम, रायपुर से 250 किमी दक्षिण और संबलपुर से 350 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित था। इसके लगभग उत्तर दिशा की ओर आगे बढ़ते रहने और 29 अक्टूबर की शाम तक और कमजोर होकर एक ‘वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया’ (well-marked low-pressure area) में तब्दील होने की संभावना है। रायपुर और संबलपुर में लगे ‘डॉपलर वेदर रडार’ (Doppler Weather Radars) के जरिए इस सिस्टम पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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इसके अलावा, 28 अक्टूबर को देखे गए ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण (upper air cyclonic circulation) के प्रभाव से, दक्षिण अंडमान सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में एक कम दबाव का क्षेत्र बना है। इस प्रणाली के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और अगले 24 घंटों के भीतर दक्षिण अंडमान सागर तथा उससे सटे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऊपर एक स्पष्ट कम दबाव के क्षेत्र (well-marked low-pressure area) में तब्दील होने की संभावना है।

