लगातार दूसरी बार निर्दलीय MLC बने बंशीधर बृजवासी:तिरहुत स्नातक सीट पर 31832 वोट लाकर जेडीयू के अभिषेक झा को हराया; जानिए संपत्ति और लाइफस्टाइल

लगातार दूसरी बार निर्दलीय MLC बने बंशीधर बृजवासी:तिरहुत स्नातक सीट पर 31832 वोट लाकर जेडीयू के अभिषेक झा को हराया; जानिए संपत्ति और लाइफस्टाइल

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने दूसरी बार जीत दर्ज की है। बंशीधर ब्रजवासी की पहचान एक शिक्षक नेता के रूप में रही है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच निर्दलीय उतरकर जीत हासिल करना उनकी राजनीतिक ताकत का संकेत है। इस बार जीत के साथ उनके चुनावी हलफनामे में दर्ज संपत्ति और वाहनों का ब्योरा भी चर्चा में है। 2024 के उपचुनाव में दाखिल हलफनामे में उनके नाम करीब 6.77 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज थी। नए हलफनामे में यह आंकड़ा करीब 40.60 लाख रुपए है। दोनों हलफनामों के आंकड़ों में करीब 33.83 लाख रुपए का अंतर है। यह अंतर अपने आप में संपत्ति के विवरण में आए बदलाव को दिखाता है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी बढ़ोतरी इसी अवधि में हुई या इसके पीछे कौन-से स्रोत रहे। इसके लिए दोनों हलफनामों में दर्ज संपत्ति की श्रेणियों, आय और खरीद के विवरण का मिलान जरूरी है। निर्दलीय लड़कर लगातार दूसरी जीत, NDA प्रत्याशी को हराया ब्रजवासी ने इस चुनाव में कुल 31832 वोट हासिल किए। उन्होंने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा को 9147 मतों से हराया। राजद की रश्मि विनायक गौतम और जन सुराज के डॉ. विमोहन भी मैदान में थे। पार्टी प्रत्याशियों के बीच ब्रजवासी की जीत ने तिरहुत स्नातक सीट पर उनकी राजनीतिक पकड़ को फिर चर्चा में ला दिया है। ब्रजवासी ने अपनी जीत को स्नातक मतदाताओं की जीत बताया है। 2024 के उपचुनाव में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी। उस समय उनकी जीत ने राजनीतिक दलों के लिए चुनौती पेश की थी। इस बार फिर उन्होंने अपनी सीट बचाकर यह दिखाया कि शिक्षक नेता के तौर पर उनकी पहचान स्नातक मतदाताओं के बीच असर रखती है। चल संपत्ति 6.77 लाख से 40.60 लाख रुपए ब्रजवासी के पुराने और नए हलफनामों की तुलना में सबसे प्रमुख बदलाव चल संपत्ति के आंकड़े में दिखता है। 2024 में उनके नाम करीब 6.77 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज थी, जबकि नए हलफनामे में यह करीब 40.60 लाख रुपए बताई गई है। उनकी पत्नी के नाम पुराने हलफनामे में करीब 10.85 लाख रुपए और नए हलफनामे में करीब 18.03 लाख रुपए की संपत्ति दर्ज है। नकदी के ब्योरे में भी बदलाव है। पुराने हलफनामे में ब्रजवासी के पास करीब 1.55 लाख रुपए और उनकी पत्नी के पास 1.50 लाख रुपए नकद बताए गए थे। नए हलफनामे में उनके पास 25 हजार और पत्नी के पास 15 हजार रुपए नकद होने का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि संपत्ति का कुल घोषित मूल्य और नकदी का आंकड़ा अलग-अलग चीजें हैं; चल संपत्ति में निवेश, वाहन और अन्य परिसंपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं। बाइक और स्कूटी से दो कारों तक हलफनामे में वाहनों का ब्योरा भी बदलता दिखता है। 2024 के उपचुनाव के दौरान एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी का उल्लेख था। नए हलफनामे में दो कारों और एक स्कूटी का जिक्र है। यह उनके घोषित वाहन संबंधी विवरण में आया बदलाव है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि कारें कब खरीदी गई और उनकी अलग-अलग कीमत कितनी है। यानी संपत्ति के आंकड़ों के साथ वाहन संबंधी जानकारी में भी अंतर दर्ज है। इसे जीवनशैली में बदलाव का संकेत माना जा सकता है, लेकिन खरीद की तारीख और खर्च के बारे में किसी निश्चित निष्कर्ष के लिए विस्तृत रिकॉर्ड जरूरी होगा। जमीन-मकान 1.52 करोड़ के, कर्ज की स्थिति में भी अंतर ब्रजवासी और उनकी पत्नी के नाम जमीन और मकान सहित करीब 1.52 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति दर्ज होने की जानकारी दी गई है। पुराने हलफनामे में करीब 18 लाख रुपए का कर्ज बताया गया था, जिसमें लगभग डेढ़ लाख रुपए बाकी रहने का उल्लेख था। नए हलफनामे में कोई ऋण नहीं होने की जानकारी है। इस तुलना में अचल संपत्ति का घोषित मूल्य लगभग समान बताया गया है, जबकि कर्ज की स्थिति बदली हुई दिखती है। संपत्ति की वास्तविक स्थिति समझने के लिए दोनों हलफनामों के मूल्यांकन और कर्ज संबंधी विवरण का मिलान जरूरी है। पत्नी के नाम सोना-चांदी, आय का स्रोत खेती और सिलाई-कढ़ाई हलफनामे में ब्रजवासी की आय का स्रोत खेती बताया गया है, जबकि उनकी पत्नी की आय का जरिया सिलाई-कढ़ाई दर्ज है। पत्नी के नाम 100 ग्राम सोना और करीब आधा किलो चांदी होने की जानकारी भी दी गई है। पुराने हलफनामे में इन आभूषणों की अनुमानित कीमत करीब 7.85 लाख रुपए थी, जबकि नए विवरण में करीब 14 लाख रुपए बताई गई है। कीमत में अंतर बाजार दरों के बदलाव से भी हो सकता है; इसे अपने आप में नए आभूषणों की खरीद का प्रमाण नहीं माना जा सकता। राजनीतिक पहचान शिक्षक आंदोलन से, अब लगातार दूसरी जीत ब्रजवासी की राजनीतिक पहचान शिक्षक नेता के तौर पर बनी। तिरहुत स्नातक सीट पर लगातार दूसरी बार जीत ने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक अहम चेहरा बनाए रखा है। उनकी जीत ऐसे समय में आई है, जब जदयू, राजद और जन सुराज जैसे दलों ने भी इस सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। निर्दलीय रहते हुए लगातार दो बार जीतना उनकी चुनावी प्रोफाइल का महत्वपूर्ण पहलू है। उनके चुनावी हलफनामे में तीन लंबित मुकदमों का भी उल्लेख बताया गया है। इनमें दो मामले सरकारी सेवक के काम में बाधा पहुंचाने के आरोप से जुड़े हैं, जबकि एक मामला मारपीट और गाली-गलौज का है। ये लंबित मामले हैं, दोषसिद्धि नहीं। ब्रजवासी ने अपनी जीत को स्नातक मतदाताओं की जीत बताया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने दूसरी बार जीत दर्ज की है। बंशीधर ब्रजवासी की पहचान एक शिक्षक नेता के रूप में रही है। राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों के बीच निर्दलीय उतरकर जीत हासिल करना उनकी राजनीतिक ताकत का संकेत है। इस बार जीत के साथ उनके चुनावी हलफनामे में दर्ज संपत्ति और वाहनों का ब्योरा भी चर्चा में है। 2024 के उपचुनाव में दाखिल हलफनामे में उनके नाम करीब 6.77 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज थी। नए हलफनामे में यह आंकड़ा करीब 40.60 लाख रुपए है। दोनों हलफनामों के आंकड़ों में करीब 33.83 लाख रुपए का अंतर है। यह अंतर अपने आप में संपत्ति के विवरण में आए बदलाव को दिखाता है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरी बढ़ोतरी इसी अवधि में हुई या इसके पीछे कौन-से स्रोत रहे। इसके लिए दोनों हलफनामों में दर्ज संपत्ति की श्रेणियों, आय और खरीद के विवरण का मिलान जरूरी है। निर्दलीय लड़कर लगातार दूसरी जीत, NDA प्रत्याशी को हराया ब्रजवासी ने इस चुनाव में कुल 31832 वोट हासिल किए। उन्होंने एनडीए समर्थित जदयू प्रत्याशी अभिषेक झा को 9147 मतों से हराया। राजद की रश्मि विनायक गौतम और जन सुराज के डॉ. विमोहन भी मैदान में थे। पार्टी प्रत्याशियों के बीच ब्रजवासी की जीत ने तिरहुत स्नातक सीट पर उनकी राजनीतिक पकड़ को फिर चर्चा में ला दिया है। ब्रजवासी ने अपनी जीत को स्नातक मतदाताओं की जीत बताया है। 2024 के उपचुनाव में भी उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी। उस समय उनकी जीत ने राजनीतिक दलों के लिए चुनौती पेश की थी। इस बार फिर उन्होंने अपनी सीट बचाकर यह दिखाया कि शिक्षक नेता के तौर पर उनकी पहचान स्नातक मतदाताओं के बीच असर रखती है। चल संपत्ति 6.77 लाख से 40.60 लाख रुपए ब्रजवासी के पुराने और नए हलफनामों की तुलना में सबसे प्रमुख बदलाव चल संपत्ति के आंकड़े में दिखता है। 2024 में उनके नाम करीब 6.77 लाख रुपए की चल संपत्ति दर्ज थी, जबकि नए हलफनामे में यह करीब 40.60 लाख रुपए बताई गई है। उनकी पत्नी के नाम पुराने हलफनामे में करीब 10.85 लाख रुपए और नए हलफनामे में करीब 18.03 लाख रुपए की संपत्ति दर्ज है। नकदी के ब्योरे में भी बदलाव है। पुराने हलफनामे में ब्रजवासी के पास करीब 1.55 लाख रुपए और उनकी पत्नी के पास 1.50 लाख रुपए नकद बताए गए थे। नए हलफनामे में उनके पास 25 हजार और पत्नी के पास 15 हजार रुपए नकद होने का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि संपत्ति का कुल घोषित मूल्य और नकदी का आंकड़ा अलग-अलग चीजें हैं; चल संपत्ति में निवेश, वाहन और अन्य परिसंपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं। बाइक और स्कूटी से दो कारों तक हलफनामे में वाहनों का ब्योरा भी बदलता दिखता है। 2024 के उपचुनाव के दौरान एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी का उल्लेख था। नए हलफनामे में दो कारों और एक स्कूटी का जिक्र है। यह उनके घोषित वाहन संबंधी विवरण में आया बदलाव है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि कारें कब खरीदी गई और उनकी अलग-अलग कीमत कितनी है। यानी संपत्ति के आंकड़ों के साथ वाहन संबंधी जानकारी में भी अंतर दर्ज है। इसे जीवनशैली में बदलाव का संकेत माना जा सकता है, लेकिन खरीद की तारीख और खर्च के बारे में किसी निश्चित निष्कर्ष के लिए विस्तृत रिकॉर्ड जरूरी होगा। जमीन-मकान 1.52 करोड़ के, कर्ज की स्थिति में भी अंतर ब्रजवासी और उनकी पत्नी के नाम जमीन और मकान सहित करीब 1.52 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति दर्ज होने की जानकारी दी गई है। पुराने हलफनामे में करीब 18 लाख रुपए का कर्ज बताया गया था, जिसमें लगभग डेढ़ लाख रुपए बाकी रहने का उल्लेख था। नए हलफनामे में कोई ऋण नहीं होने की जानकारी है। इस तुलना में अचल संपत्ति का घोषित मूल्य लगभग समान बताया गया है, जबकि कर्ज की स्थिति बदली हुई दिखती है। संपत्ति की वास्तविक स्थिति समझने के लिए दोनों हलफनामों के मूल्यांकन और कर्ज संबंधी विवरण का मिलान जरूरी है। पत्नी के नाम सोना-चांदी, आय का स्रोत खेती और सिलाई-कढ़ाई हलफनामे में ब्रजवासी की आय का स्रोत खेती बताया गया है, जबकि उनकी पत्नी की आय का जरिया सिलाई-कढ़ाई दर्ज है। पत्नी के नाम 100 ग्राम सोना और करीब आधा किलो चांदी होने की जानकारी भी दी गई है। पुराने हलफनामे में इन आभूषणों की अनुमानित कीमत करीब 7.85 लाख रुपए थी, जबकि नए विवरण में करीब 14 लाख रुपए बताई गई है। कीमत में अंतर बाजार दरों के बदलाव से भी हो सकता है; इसे अपने आप में नए आभूषणों की खरीद का प्रमाण नहीं माना जा सकता। राजनीतिक पहचान शिक्षक आंदोलन से, अब लगातार दूसरी जीत ब्रजवासी की राजनीतिक पहचान शिक्षक नेता के तौर पर बनी। तिरहुत स्नातक सीट पर लगातार दूसरी बार जीत ने उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक अहम चेहरा बनाए रखा है। उनकी जीत ऐसे समय में आई है, जब जदयू, राजद और जन सुराज जैसे दलों ने भी इस सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। निर्दलीय रहते हुए लगातार दो बार जीतना उनकी चुनावी प्रोफाइल का महत्वपूर्ण पहलू है। उनके चुनावी हलफनामे में तीन लंबित मुकदमों का भी उल्लेख बताया गया है। इनमें दो मामले सरकारी सेवक के काम में बाधा पहुंचाने के आरोप से जुड़े हैं, जबकि एक मामला मारपीट और गाली-गलौज का है। ये लंबित मामले हैं, दोषसिद्धि नहीं। ब्रजवासी ने अपनी जीत को स्नातक मतदाताओं की जीत बताया है।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *