सीबीएसई : एआई को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 3 से 8 तक “गणनात्मक सोच और एआई’ का कोर्स लागू

सीबीएसई : एआई को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 3 से 8 तक “गणनात्मक सोच और एआई’ का कोर्स लागू

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूली शिक्षा की पारंपरिक पद्धतियों को बदलते हुए तकनीकी युग की मांग के अनुरूप बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए गणनात्मक सोच (कम्प्यूटेशनल थिंकिंग) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का नया अनिवार्य पाठ्यक्रम लागू किया है। जिले के 70 से अधिक सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में यह व्यवस्था नए शैक्षणिक सत्र से प्रभावी रूप से लागू की जाएगी। इस पाठ्यक्रम का मुख्य ध्येय विद्यार्थियों को किताबों के बोझ और रटंत प्रणाली से मुक्त कर लॉजिकल और प्रॉब्लम सॉल्विंग माइंडसेट देना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा के तहत तैयार इस पाठ्यक्रम की घोषणा नई दिल्ली में की गई थी। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों को शुरुआती उम्र से ही तार्किक विश्लेषण, पैटर्न की पहचान, जटिल समस्याओं को छोटे हिस्सों में बांटना और चरणबद्ध तरीके से समाधान निकालने का अभ्यास कराया जाएगा। ​कक्षा 3 से 5 (सालाना 50 घंटे): प्राथमिक स्तर पर इसे अलग से विषय के रूप में लादने के बजाय गणित और द वर्ल्ड अराउंड अस विषयों के साथ इंटीग्रेट किया गया है। बच्चे पहेलियों (पजल्स), इंटरएक्टिव गेम्स और दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों के जरिए गणनात्मक सोच की नींव रखेंगे। ​कक्षा 6 से 8 (सालाना 100 घंटे): उच्च प्राथमिक स्तर पर इसके लिए सालाना 100 घंटे निर्धारित किए गए हैं। इसमें उन्नत कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, एआई के बुनियादी सिद्धांत, एल्गोरिदम निर्माण और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स शामिल रहेंगे। साथ ही एआई के नैतिक व सुरक्षित उपयोग पर भी विशेष बल दिया जाएगा। ​कक्षा 9 से 12 के लिए 20 घंटे का विशेष मॉड्यूल: एनसीईआरटी ने आईआईटी मद्रास और आईआईटी जोधपुर के सहयोग से 9वीं से 12वीं के लिए 20 घंटे का एक्टिविटी-बेस्ड मॉड्यूल तैयार किया है। कक्षा 9 में यह मॉड्यूल अनिवार्य रहेगा, जिसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा। बोर्ड परीक्षा का अतिरिक्त तनाव नहीं रहेगा। {​रटंत विद्या से तार्किक सोच की ओर बदलाव : स्कूली स्तर पर अक्सर विद्यार्थी फॉर्मूले और परिभाषाएं रटते हैं। इस कोर्स से वे ‘क्या’ के साथ ‘क्यों और कैसे’ सोचना शुरू करेंगे, जिससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी। { ​समस्या समाधान का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: कोडिंग या एआई केवल कम्प्यूटर चलाने तक सीमित नहीं है। किसी बड़ी समस्या को टुकड़ों में बांटकर समाधान निकालना छात्रों को गणित, विज्ञान के साथ-साथ निजी जीवन की चुनौतियों से निपटने में भी सक्षम बनाएगा। { ​कम उम्र में फ्यूचर-रेडी स्किल्स: आज वैश्विक स्तर पर डेटा, ऑटोमेशन और एआई का दबदबा है। बचपन से ही इन तकनीकों की बुनियादी समझ मिलने से जिले के छात्र भविष्य की तकनीकी व कॉर्पोरेट प्रतिस्पर्धा में राष्ट्रीय स्तर पर बराबरी कर सकेंगे। { ​जिम्मेदार डिजिटल नागरिकता: अक्सर बच्चे इंटरनेट और गैजेट्स का अनियंत्रित उपयोग करते हैं। एआई एथिक्स की पढ़ाई से वे साइबर सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी और तकनीक के सही उपयोग के प्रति जागरूक बनेंगे। बिना कम्प्यूटर वाले स्कूलों में अनप्लग मोड पर पढ़ाई : ​संसाधनों की कमी किसी भी बच्चे की राह में बाधा न बने, इसके लिए बोर्ड ने अनप्लग मोड की व्यवस्था की है। जिन स्कूलों में कम्प्यूटर लैब या इंटरनेट की सीमित सुविधा है, वहां शिक्षक पेपर-पेंसिल एक्टिविटीज, कार्ड गेम्स और ग्रुप डिस्कशन के जरिए यह कॉन्सेप्ट सिखाएंगे। छात्रों को अपने दैनिक प्रयोगों और सीख को दर्ज करने के लिए एक क्यूरियस नोटबुक तैयार करनी होगी। इसके लिए बोर्ड की अकादमिक वेबसाइट पर शिक्षकों और छात्रों के लिए हैंडबुक उपलब्ध करा दी गई हैं तथा शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण सत्र भी शुरू हो चुका है।

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