इंदौर में आज से साहित्य का महाकुंभ:शशि थरूर, उदय प्रकाश समेत देशभर के लेखक जुटेंगे; AI के दौर में लेखन और कॉपीराइट पर होगा मंथन

इंदौर में आज से साहित्य का महाकुंभ:शशि थरूर, उदय प्रकाश समेत देशभर के लेखक जुटेंगे; AI के दौर में लेखन और कॉपीराइट पर होगा मंथन

इंदौर में वाणी साहित्य उत्सव-2026 का 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजन किया जाएगा। वाणी प्रकाशन ग्रुप की ओर से होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में देश के 45 से अधिक साहित्यकार, लेखक, कवि, अनुवादक और विचारक शामिल होंगे। कुल 27 सत्रों में साहित्य और संस्कृति से लेकर AI के दौर में लेखन, कॉपीराइट, अनुवाद और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर चर्चा होगी। उत्सव में साहित्यिक संवाद और विचार-विमर्श के साथ छह से अधिक प्रमुख पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम भी होंगे। कविता-कुंभ, मुशायरा, कहानी लेखन कार्यशाला और बच्चों के लिए विशेष कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी। ओपन माइक के जरिए प्रतिभागियों को अपनी कविताएं और रचनाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। शशि थरूर, उदय प्रकाश समेत कई हस्तियां होंगी शामिल महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में डॉ. शशि थरूर की सहभागिता रहेगी। वे 31 अक्टूबर को आएंगे। इसके अलावा उदय प्रकाश, शम्भूनाथ, राधावल्लभ त्रिपाठी, माधव कौशिक, सत्य व्यास, रामेश्वर राय, अभय कुमार दुबे, अक्षत गुप्ता, विवेक चतुर्वेदी और तरुण भटनागर सहित कई जाने-माने साहित्यकार और विचारक विभिन्न सत्रों में शामिल होंगे। उद्घाटन सत्र में शिव शेखर शुक्ल, अरुण माहेश्वरी, शीन काफ़ निज़ाम, वाणी त्रिपाठी टिक्कू, उदय प्रकाश और माधव कौशिक सहित विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी रहेगी। लेखकीय स्वतंत्रता, अनुवाद और भारतीय भाषाओं चर्चा साहित्य उत्सव में बदलते तकनीकी दौर में लेखन और प्रकाशन की चुनौतियों पर भी बात होगी। एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लेखकीय स्वतंत्रता, कॉपीराइट, अनुवाद और भारतीय भाषाओं की विविधता जैसे मुद्दे विमर्श का हिस्सा बनेंगे। इसके साथ महिलाओं के सृजन, पौराणिक कथाओं के नए पाठ, संविधान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी चर्चा होगी। उत्सव का उद्देश्य स्थापित साहित्यकारों और नई पीढ़ी के रचनाकारों को एक मंच पर लाना है। कार्यक्रम में साहित्य की विभिन्न विधाओं के साथ परंपरा और आधुनिकता के संबंधों पर भी विचार साझा किए जाएंगे। नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की पहल वाणी प्रकाशन ग्रुप की सीईओ अदिति माहेश्वरी ने कहा कि यह उत्सव भारतीय भाषाओं, विचारों और सांस्कृतिक विविधता को साझा मंच देने का प्रयास है। उनके मुताबिक, साहित्य समाज से संवाद करने और नए सवालों को सामने लाने का माध्यम है। उत्सव के जरिए स्थापित लेखकों और नए रचनाकारों के बीच संवाद बढ़ाने के साथ साहित्य के प्रति नई पीढ़ी की रुचि विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। तीन दिन तक चलने वाला यह आयोजन साहित्य, कविता, कहानी और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के विविध रंगों को सामने लाएगा। बच्चों की कार्यशालाओं और ओपन माइक जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और नए प्रतिभागियों को भी अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

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