हाईकोर्ट में साथी से दुर्व्यहार पर वकीलों का हंगामा:एक कोर्ट का बहिष्कार, तोड़फोड़, कोर्ट ने दिया बड़ी कार्रवाई का आदेश

हाईकोर्ट में साथी से दुर्व्यहार पर वकीलों का हंगामा:एक कोर्ट का बहिष्कार, तोड़फोड़, कोर्ट ने दिया बड़ी कार्रवाई का आदेश

कुर्सी पर बैठने को लेकर एक अधिवक्ता से दुर्व्यवहार को लेकर हाईकोर्ट में बुधवार को वकीलों ने एक कोर्ट का बहिष्कार किया और जमकर हंगामा, नारेबाजी व तोड़फोड़ की। एक घटना को लेकर विवाद बढ़ा। उस कोर्ट में पुलिस अधीक्षक के लिए अगली पंक्ति में अलग कुर्सी रखी गई थी। एक वकील ने एसपी से पीछे बैठने को कहा। सरकारी अधिवक्ता ने इसकी शिकायत जज से की। आरोप है कि वकील को फटकार लगाई गई, जेल भेजने की धमकी दी और एसपी से माफी मांगने को कहा गया।
एक वरिष्ठ अधिवक्ता का भी मजाक उड़ाने का आरोप लगाया गया।
हाईकोर्ट बार के नवनिर्वाचित अध्यक्ष व महासचिव ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग करते हुए उक्त कोर्ट के बहिष्कार की धमकी दी। उनका कहना था कि वकीलों की गरिमा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट रूम के बाहर क्या हुआ जानिये
बुधवार को जब कोर्ट बैठी तो वकीलों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। गुस्साए अधिवक्ताओं ने डायस की तरफ कुर्सियां और अन्य फर्नीचर फेंके। बताया जाता है कि शिकायत करने वाले सरकारी वकील को भी वकीलों के गुस्से का कोपभाजन बनना पड़ा। कोर्ट रूम में अफरातफरी मच गई। कोर्ट के बाहर भी जमकर नारेबाजी हुई।
बवाल के कारण चीफ जस्टिस कोर्ट में भी लगभग एक घंटा कार्य प्रभावित हुआ। उस दौरान वहां फ्रेश केस नम्बर 13 की सुनवाई चल रही थी। तभी कोर्ट में चीफ जस्टिस के पीपीएस आए और उन्होंने चीफ जस्टिस को कुछ बताया। उसके बाद कोर्ट उठकर चैंबर में चली गई। वहां फिर लगभग 12 बजे सुनवाई शुरू हुई। समझिये क्या है पूरी कहानी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर के कॉरिडोर में नारेबाजी करने और अदालती कार्यवाही में बाधा डालने की घटना पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने घटना में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने देवेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के समय कोर्ट के बाहर कॉरिडोर में कुछ अधिवक्ताओं ने तेज आवाज में नारेबाजी शुरू कर दी। इससे न्यायिक कार्यवाही बाधित हुई। कोर्ट को बताया गया कि अधिवक्ता किसी अन्य अदालत में एक वकील की गरिमा से जुड़ी घटना के विरोध में प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे थे। ‘नारेबाजी और न्यायिक कार्यवाही बाधित करने की अनुमति नहीं’
कोर्ट ने कहा कि दूर-दराज से गरीब वादकारी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए हाईकोर्ट आते हैं। ऐसे में न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना उचित नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिवक्ता को किसी विशेष न्यायालय से कोई समस्या है, तब भी उसे दूसरे न्यायालयों के बाहर चिल्लाने, नारेबाजी करने, न्यायिक कार्यवाही बाधित करने या न्यायालय को डराने-धमकाने वाले शब्दों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस व्यवहार को अनुचित और घोर अवमाननापूर्ण करार दिया। सीसीटीवी फुटेज से होगी अधिवक्ताओं की पहचान
कोर्ट ने रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल को निर्देश दिया कि परिसर में घटना वाले स्थान के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज प्राप्त की जाए। इसके आधार पर नारेबाजी में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने कहा कि पहचान होने के बाद संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा जा सकता है। इसके साथ ही उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जाएगी। 19 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को निर्धारित की गई है। अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर होने वाली पहचान और रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल की रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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