भागलपुर में तिलकामांझी विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग में पहली बार अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी-सह पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘मैथिलीक युवा साहित्यकारक रचना में राष्ट्रीय चेतना, लोकतंत्र ओर सामाजिक सरोकार’ रखा गया। कार्यक्रम में मैथिली साहित्य की समकालीन रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में शिक्षकों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और पूर्ववर्ती विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में अकादमिक चर्चा के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया। सांस्कृतिक सत्र में एकल नाटक और ‘विलाप’ शीर्षक नृत्य-संगीत प्रस्तुति के साथ मिथिला की पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं को मंच पर प्रस्तुत किया जाना निर्धारित रहा। ‘जय-जय भैरव भाव’ और झिझिया जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से मैथिली संस्कृति और परंपरा को रेखांकित किया गया। युवा साहित्यकारों की रचनाओं पर चर्चा संगोष्ठी के अकादमिक सत्र में विभिन्न विषयों पर आलेख पाठ किया गया। शिक्षकों, शोधार्थियों और साहित्यकारों ने युवा मैथिली साहित्यकारों की रचनाओं पर अपने विचार रखे। रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति, लोकतंत्र के प्रति दृष्टिकोण और समाज से जुड़े मुद्दों को साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करने के तरीकों पर विमर्श किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य साहित्यिक विचारों के आदान-प्रदान के साथ पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को विभाग से जोड़ना और मैथिली साहित्य के समकालीन स्वरूप पर संवाद को प्रोत्साहित करना रहा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी मिथिला की झलक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे हुई, जबकि शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन निर्धारित था। इस आयोजन के माध्यम से मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने तथा युवा साहित्यकारों, शिक्षाविदों और पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। प्रो. रंजना दूबे ने किया उद्घाटन कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति एवं विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रोफेसर रंजना दूबे ने किया। पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष केष्कर ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि भागलपुर के नगर विधायक रोहित पांडेय विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम में मैथिली भाषा और साहित्य के विकास, युवा साहित्यकारों की रचनात्मक भूमिका तथा साहित्य के सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा की गई। भागलपुर में तिलकामांझी विश्वविद्यालय के मैथिली विभाग में पहली बार अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी-सह पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘मैथिलीक युवा साहित्यकारक रचना में राष्ट्रीय चेतना, लोकतंत्र ओर सामाजिक सरोकार’ रखा गया। कार्यक्रम में मैथिली साहित्य की समकालीन रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन में शिक्षकों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और पूर्ववर्ती विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में अकादमिक चर्चा के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शामिल किया गया। सांस्कृतिक सत्र में एकल नाटक और ‘विलाप’ शीर्षक नृत्य-संगीत प्रस्तुति के साथ मिथिला की पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं को मंच पर प्रस्तुत किया जाना निर्धारित रहा। ‘जय-जय भैरव भाव’ और झिझिया जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से मैथिली संस्कृति और परंपरा को रेखांकित किया गया। युवा साहित्यकारों की रचनाओं पर चर्चा संगोष्ठी के अकादमिक सत्र में विभिन्न विषयों पर आलेख पाठ किया गया। शिक्षकों, शोधार्थियों और साहित्यकारों ने युवा मैथिली साहित्यकारों की रचनाओं पर अपने विचार रखे। रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति, लोकतंत्र के प्रति दृष्टिकोण और समाज से जुड़े मुद्दों को साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करने के तरीकों पर विमर्श किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य साहित्यिक विचारों के आदान-प्रदान के साथ पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को विभाग से जोड़ना और मैथिली साहित्य के समकालीन स्वरूप पर संवाद को प्रोत्साहित करना रहा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी मिथिला की झलक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे हुई, जबकि शाम 7 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन निर्धारित था। इस आयोजन के माध्यम से मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने तथा युवा साहित्यकारों, शिक्षाविदों और पूर्ववर्ती विद्यार्थियों के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। प्रो. रंजना दूबे ने किया उद्घाटन कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति एवं विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रोफेसर रंजना दूबे ने किया। पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष केष्कर ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि भागलपुर के नगर विधायक रोहित पांडेय विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम में मैथिली भाषा और साहित्य के विकास, युवा साहित्यकारों की रचनात्मक भूमिका तथा साहित्य के सामाजिक प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

