अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुरानी ख्याति को फिर से स्थापित कर रहे नालंदा विश्वविद्यालय ने वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय ने ‘द यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज’ के केव हिल कैंपस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह द्विपक्षीय समझौता 25वें आईएएसएसआई वार्षिक सम्मेलन के दौरान संपन्न हुआ, जो भारत और कैरेबियाई देशों के बीच उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा। शीर्ष शिक्षाविदों की मौजूदगी में हुआ समझौता इस ऐतिहासिक सहमति पत्र पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और द यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज, केव हिल कैंपस के प्रो-वाइस चांसलर व प्रिंसिपल प्रोफेसर आर. क्लाइव लैंडिस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के माननीय अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। शोध और छात्र आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच बहुविषयक अनुसंधान, संयुक्त शिक्षण, शिक्षक एवं छात्र विनिमय कार्यक्रमों को मजबूती प्रदान करना है। समझौते के तहत विशेष रूप से मानविकी, सांस्कृतिक अध्ययन, रचनात्मक और प्रदर्शन कला जैसे क्षेत्रों में गहन अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ को मिलेगी मजबूती यह समझौता नालंदा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता और वैश्विक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करता है। विशेष रूप से यह पहल विकासशील देशों के बीच आपसी साझेदारी यानी ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है। इस समझौते से नालंदा विश्वविद्यालय और कैरेबियाई क्षेत्र के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को गहरा आयाम मिलेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय के वैश्विक विजन के अनुरूप, यह साझेदारी दोनों क्षेत्रों के छात्रों और शोधकर्ताओं को एक-दूसरे के समृद्ध इतिहास, परंपराओं और समकालीन चुनौतियों को साझा मंच पर समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पुरानी ख्याति को फिर से स्थापित कर रहे नालंदा विश्वविद्यालय ने वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय ने ‘द यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज’ के केव हिल कैंपस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह द्विपक्षीय समझौता 25वें आईएएसएसआई वार्षिक सम्मेलन के दौरान संपन्न हुआ, जो भारत और कैरेबियाई देशों के बीच उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान के नए द्वार खोलेगा। शीर्ष शिक्षाविदों की मौजूदगी में हुआ समझौता इस ऐतिहासिक सहमति पत्र पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और द यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट इंडीज, केव हिल कैंपस के प्रो-वाइस चांसलर व प्रिंसिपल प्रोफेसर आर. क्लाइव लैंडिस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के माननीय अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। शोध और छात्र आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच बहुविषयक अनुसंधान, संयुक्त शिक्षण, शिक्षक एवं छात्र विनिमय कार्यक्रमों को मजबूती प्रदान करना है। समझौते के तहत विशेष रूप से मानविकी, सांस्कृतिक अध्ययन, रचनात्मक और प्रदर्शन कला जैसे क्षेत्रों में गहन अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ को मिलेगी मजबूती यह समझौता नालंदा विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहभागिता और वैश्विक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करता है। विशेष रूप से यह पहल विकासशील देशों के बीच आपसी साझेदारी यानी ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’ को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है। इस समझौते से नालंदा विश्वविद्यालय और कैरेबियाई क्षेत्र के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को गहरा आयाम मिलेगा। भारतीय विदेश मंत्रालय के वैश्विक विजन के अनुरूप, यह साझेदारी दोनों क्षेत्रों के छात्रों और शोधकर्ताओं को एक-दूसरे के समृद्ध इतिहास, परंपराओं और समकालीन चुनौतियों को साझा मंच पर समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी।

