पाकिस्तान के सिख श्रद्धालुओं ने गोल्डन टेंपल में टेका मत्था:शिरोमणि कमेटी ने स्वागत किया, सरकारों से वीजा व जत्थों की संख्या बढ़ाने की मांग

पाकिस्तान के सिख श्रद्धालुओं ने गोल्डन टेंपल में टेका मत्था:शिरोमणि कमेटी ने स्वागत किया, सरकारों से वीजा व जत्थों की संख्या बढ़ाने की मांग

श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व मनाने भारत आए पाकिस्तान के सिख श्रद्धालुओं के जत्थे ने मंगलवार को सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) पहुंचकर श्रद्धा और उत्साह के साथ मत्था टेका। इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से आए हुए श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और उन्हें गुरुघर की बख्शिश ‘सिरोपा’ भेंटकर सम्मानित किया गया। प्रमुख गुरुधामों के किए दर्शन जत्थे के नेता भूपिंदर सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अमृतसर में श्री गुरु रामदास जी का प्रकाश पर्व मनाना उनके लिए बेहद सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन करने के अलावा जत्थे ने दिल्ली स्थित गुरुद्वारा सीस गंज साहिब और श्री आनंदपुर साहिब समेत अन्य पवित्र गुरुद्वारों के भी दर्शन किए हैं। वीजा प्रक्रिया सरल करने और संख्या बढ़ाने की अपील धार्मिक यात्रा के दौरान पाकिस्तान से आई संगत ने भारत और पाकिस्तान—दोनों देशों की सरकारों से धार्मिक यात्राओं के नियमों को आसान बनाने की पुरजोर मांग की। श्रद्धालुओं ने कहा कि दोनों देशों की संगत अपने ऐतिहासिक गुरुधामों के खुले दर्शन-दीदार करना चाहती है। जत्थे के प्रतिनिधियों ने वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने और श्रद्धालुओं का कोटा बढ़ाने की मांग करते हुए बताया कि पिछली बार पाकिस्तान जाने के लिए 7,500 से अधिक आवेदन आए थे, लेकिन महज 1,800 लोगों को ही अनुमति मिल सकी थी। SGPC पदाधिकारियों ने किया सम्मानित इस मौके पर SGPC के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर सतनाम सिंह मंगिया, धर्म प्रचार कमेटी के सचिव भगवंत सिंह धंगेरा और मैनेजर रजिंदर सिंह रूबी समेत कई प्रमुख पदाधिकारियों ने पाकिस्तानी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस दौरान दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और स्थानीय धार्मिक संस्थाओं का भी विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के समापन पर पूरी संगत ने ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह’ के जयकारों के साथ दोनों देशों के बीच आपसी प्रेम, शांति, भाईचारे और धार्मिक यात्राओं के बिना किसी बाधा के संचालन के लिए अरदास की।

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