CEC Gyanesh Kumar निलंबन मामला, Supreme Court ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए दिया 10 दिन का समय

CEC Gyanesh Kumar निलंबन मामला, Supreme Court ने याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने के लिए दिया 10 दिन का समय

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन याचिकाकर्ताओं को 10 दिन का समय दिया, जिन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस हलफनामे का जवाब देना है, जिसमें आयोग ने पूरे देश में चलाए गए इस SIR अभियान का बचाव किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन-सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई टाल दी है और अब इसके 17 नवंबर को सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को उन सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है, जिनमें ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग की गई है। इनमें लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं द्वारा दायर याचिकाएं भी शामिल हैं।

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यह घटनाक्रम चुनाव आयोग द्वारा एक हलफनामा दाखिल करने के एक दिन बाद हुआ है। आयोग ने अपने हलफनामे में SIR अभियान का बचाव करते हुए कहा है कि सभी फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 6’ में कोई बदलाव किया गया था। चुनाव आयोग ने अपने 248 पन्नों के जवाब (हलफनामे) में इन आरोपों को “गलतफहमी पर आधारित” बताते हुए याचिकाओं को तुरंत खारिज करने की मांग की है। हलफनामे के अनुसार, 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी SIR संबंधी आदेश, संविधान के अनुच्छेद 324 और ‘मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ की धारा 18 के अनुपालन में सर्वसम्मति से लिए गए थे।

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चुनाव आयोग ने कहा कि किसी फाइल पर काम चलने के दौरान किसी आयुक्त द्वारा दिया गया कोई सुझाव, टिप्पणी या सवाल, आयोग का “फैसला नहीं माना जाएगा”। आयोग ने बताया कि फाइलें पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती हैं, फिर दूसरे के पास और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के पास; और जिन फैसलों को मंजूरी मिल जाती है, उन पर तीनों के हस्ताक्षर होते हैं। आयोग ने कहा कि जहां तुरंत आदेश देने की जरूरत हो और सदस्य व्यक्तिगत रूप से मौजूद न हों, वहां इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है और बाद में उसे फाइल में दर्ज कर लिया जाता है। चुनाव आयोग का यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में था, जो ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के बाद दायर की गई थीं। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ‘SIR ड्राइव’ को लेकर आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर, गांधी और ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने इस मामले पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

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