बीमिम्स पावापुरी को मिला लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का दर्जा:हादसों के गंभीर घायलों को मिलेगा तत्काल इलाज, सर्जरी से लेकर आईसीयू तक की चौबीसों घंटे मिलेगी सुविधा

बीमिम्स पावापुरी को मिला लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का दर्जा:हादसों के गंभीर घायलों को मिलेगा तत्काल इलाज, सर्जरी से लेकर आईसीयू तक की चौबीसों घंटे मिलेगी सुविधा

सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से जख्मी मरीजों को समय पर बेहतर और आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी को बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विशेष पहल के तहत बीमिम्स को लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का दर्जा प्रदान किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बिहार के कुल 32 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिसमें पावापुरी मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। इस फैसले से नालंदा सहित नवादा, शेखपुरा व आसपास के जिलों के सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल उच्चस्तरीय इलाज मिलना आसान हो जाएगा। विशेष रूप से एनएच-20 (पटना-बख्तियारपुर-रजौली मार्ग) पर होने वाले भीषण सड़क हादसों के घायलों के लिए यह केंद्र जीवनरक्षक साबित होगा। सर्जरी से लेकर आईसीयू तक की होगी पुख्ता व्यवस्था लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर के तहत गंभीर चोटों से जूझ रहे मरीजों के तत्काल आघात प्रबंधन, अत्याधुनिक जांच, जटिल सर्जरी और गहन चिकित्सा इकाई की मुकम्मल व्यवस्था रहेगी। अस्पताल में इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों के अलावा जनरल सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगी, ताकि गोल्डन आवर के भीतर घायलों को आवश्यक उपचार मिल सके। सिर में गंभीर चोट या न्यूरोसर्जरी जैसी अति-विशिष्ट चिकित्सा की जरूरत पड़ने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी अथवा मरीज को उच्चस्तरीय केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित रहेगी। राज्य के 32 मेडिकल कॉलेज शामिल, एम्स पटना को मिला लेवल-वन स्वास्थ्य विभाग की जारी अधिसूचना के अनुसार बिहार के 16 सरकारी और 16 निजी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना को लेवल-वन का दर्जा मिला है, जहां व्यापक सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं, बीमिम्स पावापुरी सहित शेष 31 मेडिकल कॉलेजों को लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का दर्जा दिया गया है। गोल्डन आवर में इलाज से बचेगी घायलों की जान सड़क हादसों में मौत का सबसे बड़ा कारण शुरुआती एक घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ में समुचित इलाज न मिल पाना होता है। लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का मुख्य उद्देश्य मरीज की स्थिति का त्वरित आकलन कर तुरंत आघात प्रबंधन, खून का रिसाव रोकना, आपात सर्जरी और निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना है। इससे घायलों के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण दर्जे का वास्तविक लाभ आम जनता को तभी पूरी तरह मिल सकेगा, जब अस्पताल प्रशासन विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, जीवनरक्षक उपकरणों और दवाओं की चौबीसों घंटे निर्बाध उपलब्धता धरातल पर सुनिश्चित रखेगा। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से जख्मी मरीजों को समय पर बेहतर और आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी को बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विशेष पहल के तहत बीमिम्स को लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का दर्जा प्रदान किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा बिहार के कुल 32 सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिसमें पावापुरी मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। इस फैसले से नालंदा सहित नवादा, शेखपुरा व आसपास के जिलों के सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल उच्चस्तरीय इलाज मिलना आसान हो जाएगा। विशेष रूप से एनएच-20 (पटना-बख्तियारपुर-रजौली मार्ग) पर होने वाले भीषण सड़क हादसों के घायलों के लिए यह केंद्र जीवनरक्षक साबित होगा। सर्जरी से लेकर आईसीयू तक की होगी पुख्ता व्यवस्था लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर के तहत गंभीर चोटों से जूझ रहे मरीजों के तत्काल आघात प्रबंधन, अत्याधुनिक जांच, जटिल सर्जरी और गहन चिकित्सा इकाई की मुकम्मल व्यवस्था रहेगी। अस्पताल में इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञों के अलावा जनरल सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगी, ताकि गोल्डन आवर के भीतर घायलों को आवश्यक उपचार मिल सके। सिर में गंभीर चोट या न्यूरोसर्जरी जैसी अति-विशिष्ट चिकित्सा की जरूरत पड़ने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं ली जाएंगी अथवा मरीज को उच्चस्तरीय केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित रहेगी। राज्य के 32 मेडिकल कॉलेज शामिल, एम्स पटना को मिला लेवल-वन स्वास्थ्य विभाग की जारी अधिसूचना के अनुसार बिहार के 16 सरकारी और 16 निजी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को ट्रॉमा सेंटर के रूप में अधिसूचित किया गया है। इसमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना को लेवल-वन का दर्जा मिला है, जहां व्यापक सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं, बीमिम्स पावापुरी सहित शेष 31 मेडिकल कॉलेजों को लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का दर्जा दिया गया है। गोल्डन आवर में इलाज से बचेगी घायलों की जान सड़क हादसों में मौत का सबसे बड़ा कारण शुरुआती एक घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ में समुचित इलाज न मिल पाना होता है। लेवल-दो ट्रॉमा सेंटर का मुख्य उद्देश्य मरीज की स्थिति का त्वरित आकलन कर तुरंत आघात प्रबंधन, खून का रिसाव रोकना, आपात सर्जरी और निरंतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करना है। इससे घायलों के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस महत्वपूर्ण दर्जे का वास्तविक लाभ आम जनता को तभी पूरी तरह मिल सकेगा, जब अस्पताल प्रशासन विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, जीवनरक्षक उपकरणों और दवाओं की चौबीसों घंटे निर्बाध उपलब्धता धरातल पर सुनिश्चित रखेगा।  

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