आजमगढ़ जिले के सिधारी थाना क्षेत्र के एकरामपुर गांव की एक महिला ने जमीन के लेनदेन से जुड़े 28 लाख रुपये के विवाद में मुकदमा उठाने का दबाव बनाने, रात में घर में घुसकर छेड़खानी करने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। महिला ने मामले में पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की मांग की गई है।
एकरामपुर निवासी ऊषा देवी (36) पत्नी सुदेश यादव के अनुसार, उनके पति के नाम की सात विश्वा जमीन का 28 लाख रुपये में बैनामा राजेंद्र यादव के नाम कराया गया था। आरोप है कि जमीन के लेनदेन से संबंधित रकम उनके पति के खाते से रिंकू मौर्य और उसकी पत्नी समेत अन्य लोगों के खातों में स्थानांतरित कराई गई। महिला का आरोप है कि इस तरह छल-कपट कर 28 लाख रुपये हड़प लिए गए। रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी गई थी। इस संबंध में सिधारी थाने में वर्ष 2025 में मुकदमा अपराध संख्या 220/2025 के तहत धारा 420, 406 और 506 में मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसकी विवेचना प्रचलित बताई गई है। रात में घर में घुसकर छेड़खानी का आरोप
महिला का आरोप है कि जमीन के विवाद और पहले से दर्ज मुकदमे को लेकर आरोपी पक्ष उस पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बना रहा था। इसी क्रम में 30 और 31 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि करीब दो बजे रिंकू मौर्य उसके घर में घुस आया। उस समय महिला अपने बच्चों के साथ सो रही थी। आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ छेड़खानी की। शोर मचाने पर बच्चे जाग गए। महिला के विरोध करने पर उसके हाथ की चूड़ियां टूट गईं। इसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए घर की दीवार कूदकर फरार हो गया। सुबह रास्ते में मारपीट और धमकी देने का आरोप
प्रार्थना पत्र के मुताबिक, अगले दिन सुबह करीब पांच बजे जब महिला शौच के लिए खेत की ओर जा रही थी, तभी रिंकू मौर्य, किसानू मौर्य और ऊषा ने उसके साथ गाली-गलौज की। विरोध करने पर रिंकू द्वारा हाथ पकड़कर मारपीट करने तथा मुकदमा वापस नहीं लेने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि रिंकू मौर्य ने उसके पति के खिलाफ थाने में झूठा प्रार्थना पत्र देकर उन्हें थाने बुलवाया, जहां करीब एक घंटे तक बैठाए रखा गया। महिला के अनुसार, उसने घटना की सूचना सिधारी थाने में दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 2 फरवरी 2026 को रजिस्ट्री के माध्यम से पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को भी शिकायत भेजी गई। वहां से भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला ने 19 मार्च 2026 को न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।

