मऊ में हत्या की सजा से बचने के लिए एक युवक ने खुद को मरा दिखाया। बकरे को चिता पर लिटा दिया और AI से अपनी चिता पर लेटी तस्वीर बनवाई। 10वीं पास राजू ने 18 महीने तक पुलिस को गुमराह किया। श्मशान घाट और नगर पालिका से डेथ सर्टिफिकेट बनवाए। कोर्ट में जमा करवाकर फरार हो गया। राजू को सभी ने मरा मान लिया था। लेकिन, कान की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली एक दवा ने उसे पकड़वा दिया। उसने जिस होम्योपैथिक डॉक्टर से लाखों की ठगी की थी, उसी से दवा भी लेता था। डॉक्टर को संदेह था कि राजू की मौत नहीं हुई है। डॉक्टर अपने स्तर से छानबीन कर रहे थे। दैनिक भास्कर ने डॉक्टर से बात की और जाना कि आरोपी कैसे पकड़ में आया? पढ़िए रिपोर्ट… पहले मामला समझिए… कोतवाली नगर क्षेत्र के ख्वाजाजहांपुर का रहने वाला राजू उर्फ राजकुमार राजभर (38) राजमिस्त्री का काम करता था। पिता रामनाथ की मौत हो चुकी है। परिवार में राजू की पत्नी, 4 बच्चे और बुजुर्ग मां हैं। राजू ऑनलाइन ट्रेडिंग में भी माहिर था। वह पैसे बढ़ाने का झांसा देकर लोगों से रकम लेता और शेयर बाजार में निवेश करता था। राजकुमार और उसके दोस्त सुदर्शन राजभर ने भट्ठा मालिक योगेश सिंह से ईंटें खरीदी थीं। बाद में रुपए मांगने को लेकर झगड़ा हो गया था। 19 दिसंबर, 2016 को मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राजकुमार और सुदर्शन के खिलाफ केस हुआ। राजकुमार 6 महीने जेल में भी रहा। राजू को आशंका थी कि उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है। इससे बचने के लिए उसने अपनी मौत का नाटक किया। 30 मई, 2025 को राजू ने AI से चिता पर लेटे हुए शव की तस्वीर तैयार कराई। मौत को सच दिखाने के लिए बकरे की डेडबॉडी जलवाई और तेरहवीं का भोज करके फरार हो गया। रविवार (25 अक्टूबर) को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अब पढ़िए राजू के झांसे में फंसे डॉक्टर ने क्या बताया… राजू ने पुलिस को बताया कि उसे मृत घोषित कराने में 2 डॉक्टरों का हाथ है। डॉक्टर निलय कुमार सिंह और रमेश शुक्ल का नाम इस मामले में सामने आया। होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. निलय कुमार सिंह ने बताया कि मैं 24 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूं। 2023 में मेरा एक कंपाउंडर अनुज प्रजापति था। उसने मुझसे राजकुमार के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर बातें बताईं। उसने कहा कि राजू ब्रश करने से पहले 10 हजार रुपए कमा लेता है। आपको एक बार उससे मिलना चाहिए। 3 दिन बाद राजू मुझसे मिलने आया। मैं उसे बिल्कुल नहीं जानता था। लेकिन मेरे कंपाउडर ने ऐसी बातें बताई थीं, जिससे मैं प्रभावित हो गया था। 5% की जगह 20% ग्रोथ का लालच दिया राजू मुझसे बोला कि डॉक्टर साहब आपने कितना इन्वेस्ट किया है म्यूचुअल फंड में? मैंने कहा कि हमारा तो 25-30 लाख लगा है। राजू ने कहा कि आज की डेट में कौन 5% ग्रोथ चाहता है, हम आपको 20% ग्रोथ दिलवाएंगे। आप सारा पैसा रिडीम कर लीजिए, फिर हमें बताइएगा। मैं उसकी बातों में आकर पूरा पैस रिडीम करा लिया। मैं अकाउंट से रुपए निकालकर राजू को देता गया। हर 15 दिन में वो एक नया एप ले आता था। मैं ज्यादा कुछ जानता नहीं था, इसलिए पैसा लगाता गया। ऐसा करते-करते 30 लाख रुपए लग गया। मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि 2016 में राजू हत्या कर चुका था। 2025 तक रुपए निकालने और जमा करने का सिलसिला चलता रहा। बोला- साइबर अटैक की वजह से फंस गया पैसा 2025 में रुपए निकलना बंद हो गया। मैंने पूछा तो बोला जो साइबर अटैक हुआ है, उसी में यह सब गड़बड़ हुआ है। मैं इंतजार करता रहा। जबकि राजू रुपए ठग चुका था। 30 मई को राजू ने अपनी मौत का नाटक कर दिया। एक दिन राजू के गांव का एक लड़का आया और उसने बताया कि ये एक फेक है। मेरे तो पैर से जमीन खिसक गई। मैं परेशान था और मैं इससे संपर्क करने की कोशिश कर रहा था। मुझे नहीं पता था कि ये आदमी कहां गया। मेरा कचहरी के एक वकील विजय यादव से संपर्क हुआ। विजय ने कहा कि 6 महीने में पैसा वापस कर देंगे। 6 महीने में पैसा नहीं मिला, तो मैं SP इलामारन साहब के पास गया। इलामारन साहब ने तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनिल सिंह के पास भेजा। मोबाइल फोन बंद होने से पकड़ में नहीं आया कोतवाल ने सर्विलांस की मदद से राजू को 2 बार ट्रैक करने की कोशिश की। लेकिन, मोबाइल फोन बंद कर लेने से वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका। अहम मोड़ तब आया, जब राजकुमार की कान की बीमारी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली एक खास दवा की मांग लेकर उसका साला मेरे पास आया। पहले मैं राजकुमार को यही दवा दिया करता था। दवा की मांग और जो लक्षण उसने मुझे बताए, उससे मुझे शक हो गया कि राजकुमार जिंदा है। वह अपने करीबियों के संपर्क में है। मैंने पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद राजू की गिरफ्तारी हुई। मुझ पर लगे आरोप निराधार हैं। मैं चाहता हूं कि मेरा पैसा रिकवर करा दीजिए। मेरे जीवन भर की कमाई चली गई है। फायदा सुनकर कई लोग फंसते गए डॉ. रमेश शुक्ल ने बताया- 2023 मैं जयपुर कॉन्फ्रेंस में गया था। वहां निलय सिंह ने एप और फायदे के बारे में बताया था। उसी के कहने पर मेरा साढ़े सात लाख रुपया लगा है। उसने और भी कई लोगों का रुपया लगवाया था। मुझे लगता है कि इतने लोगों के रुपए खाने के लिए उसने इतना बड़ा रिस्क लिया। वह खुद को बचाने के लिए हम लोगों को फंसा रहा है। हमारा पैसा रिफंड होना चाहिए। शहर कोतवाल प्रमेंद्र कुमार सिंह ने बताया पूरे मामले की जांच की जा रही है। अगर आरोपी के साथ इन लोगों की संलिप्ता मिलती है, तो इन पर कार्रवाई की जाएगी। ——————— यह खबर भी पढ़ें… लखनऊ में कार पार्किंग को लेकर पिता-बेटे, भाई की हत्या:पड़ोसी ने ताबड़तोड़ गोलियां मारीं; 5 दिसंबर को होनी थी बेटे की शादी लखनऊ में दिनदहाड़े एक परिवार के 3 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इनमें पिता-बेटा और छोटे भाई शामिल हैं। वारदात सआदतगंज थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह 10:35 बजे हुई। हत्यारोपी ऋषभ (30) मर्चेंट नेवी में नेविगेशन अफसर था। उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। मौके पर 50-60 पुलिसकर्मी तैनात हैं। पढ़ें पूरी खबर…

