महानगर में 495.24 करोड़ रुपये की लागत वाली गोड़धोइया नाला परियोजना पूरी हो चुकी है। परियोजना से शहर के उत्तरी क्षेत्र के 17 वार्डों में जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 नवंबर को परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री इसके दूसरे चरण का शिलान्यास भी करेंगे। परियोजना के तहत 9.25 किलोमीटर लंबे नाले का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त 17.50 किलोमीटर इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन बिछाई गई है और सीवेज के शोधन के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किया गया है। पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन, इंटरसेप्शन और ट्रीटमेंट से जुड़ी यह परियोजना शहर में जल निकासी को बेहतर बनाने और सीवेज का वैज्ञानिक तरीके से शोधन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दशकों की उपेक्षा से बाहर आया गोड़धोइया नाला गोड़धोइया नाला गोरखपुर के सबसे पुराने नालों में से एक है। कई दशकों तक यह उपेक्षा और गंदगी का पर्याय बना रहा। अतिक्रमण के कारण इसका अस्तित्व संकट में पहुंच गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाले के जीर्णोद्धार के लिए पक्का नाला निर्माण, डायवर्जन, इंटरसेप्शन और ट्रीटमेंट की परियोजना तैयार कराई। कार्यदायी संस्था जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता पकंज कुमार के अनुसार, 495.24 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 7.75 किलोमीटर लंबा पक्का नाला और 1.50 किलोमीटर लंबा कच्चा नाला बनाया गया है। इसके अलावा 38 एमएलडी क्षमता का एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, 61 एमएलडी क्षमता का एक मेन पंपिंग स्टेशन और 14 ब्रिज/कल्वर्ट का निर्माण कराया गया है। साथ ही 17.50 किलोमीटर इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन भी बिछाई गई है। हजारों लोगों को जलभराव की समस्या से मिलेगी राहत गोड़धोइया नाला परियोजना के पूरा होने से गोरखपुर महानगर के उत्तरी क्षेत्र के 17 वार्डों के हजारों लोगों को जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी। इन वार्डों में बाबा राघव दास नगर, चरगांवा, अशोक नगर, शिवपुर, तुलसीराम पश्चिमी, शहीद शिव सिंह छेत्री नगर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल नगर, हरसेवकपुर, विश्वकर्मापुरम बौलिया, शालिग्राम नगर, लोहियानगर, कृष्णानगर, शाहपुर, मैत्रीपुरम, शक्तिनगर, रामजानकी नगर तथा विष्णुपुरम शामिल हैं।
इन क्षेत्रों से निकलने वाला सीवेज पहले सीधे गोड़धोइया नाले में मिलता था। अब परियोजना के तहत बिछाई गई सीवर लाइन के माध्यम से इसे 38 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाकर शोधित किया जा रहा है। शोधन के बाद पानी को रामगढ़ताल में प्रवाहित किया जा रहा है। सीवेज के शोधन से रामगढ़ताल की जल गुणवत्ता में भी लगातार सुधार हो रहा है। जलजनित बीमारियों पर अंकुश और भूजल की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोड़धोइया नाला परियोजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन का बेहतरीन मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना के अस्तित्व में आने से गोड़धोइया नाला अतिक्रमणमुक्त हुआ है और नाले के कैचमेंट क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में जलभराव की समस्या से राहत मिल रही है। महापौर के अनुसार, गंदे सीवेज जल के शोधन से जलजनित बीमारियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और लोगों के नगरीय जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा। सीवेज को सीवर लाइन के माध्यम से सीधे एसटीपी तक पहुंचाकर शोधित करने से भूगर्भ जल की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। फेज-2 का भी शिलान्यास करेंगे सीएम योगी, खर्च होंगे 93.72 करोड़ रुपये 495.24 करोड़ रुपये की गोड़धोइया नाला परियोजना के लोकार्पण के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके फेज-2 का शिलान्यास भी करेंगे। दूसरे चरण में 93.72 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत नाले के 1.50 किलोमीटर लंबे कच्चे हिस्से को आरसीसी निर्माण के माध्यम से पक्का कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, गोड़धोइया नाले के अंतिम छोर पर स्थित बिछिया रेलवे कॉलोनी में 38 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी तक पहुंचने के लिए फिलहाल एक ही संकरा रास्ता उपलब्ध है। यह रास्ता रेलवे कॉलोनी के भीतर आवासीय कॉलोनियों से होकर गुजरता है। भविष्य में रेलवे की ओर से अपनी कॉलोनियों के लिए बाउंड्रीवाल बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में एसटीपी तक पहुंचने का मौजूदा रास्ता बंद हो सकता है।इसी संभावना को देखते हुए नाले के समानांतर एसटीपी तक पहुंचने के लिए 1.50 किलोमीटर लंबे एप्रोच मार्ग का प्रावधान किया जा रहा है। फेज-2 के तहत 120 स्ट्रीट लाइट लगाने के साथ लैंडस्केपिंग का कार्य भी कराया जाएगा। दूसरे चरण के कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नाले के दोनों तरफ बनेगी पक्की सड़क, 68 करोड़ रुपये होंगे खर्च गोड़धोइया नाला परियोजना के साथ क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने की भी तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार नाले के दोनों तरफ पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सौंपी गई है। सड़क निर्माण पर करीब 68 करोड़ रुपये की लागत आएगी। गोड़धोइया नाला परियोजना के पूर्ण होने और दूसरे चरण के कार्यों के साथ गोरखपुर में जल निकासी, सीवेज शोधन और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आगे बढ़ रही यह परियोजना शहरवासियों को जलभराव से राहत देने, पर्यावरणीय स्वच्छता बेहतर बनाने और नगरीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में अहम साबित होगी।

