मद्रास उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार मामले में द्रमुक के पूर्व मंत्री ए. महेश पोय्यामोझी की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उन पर स्कूल प्रबंधनों से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर पैसे लेने का आरोप है और इन पैसों का कहां इस्तेमाल हुआ, इसका पता तब तक नहीं लगाया जा सकता, जब तक हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं की जाती। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करते समय अदालत को यह ध्यान रखना होगा कि भ्रष्टाचार एक गंभीर आर्थिक अपराध है।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल सरकारी राजस्व पर असर पड़ता है, बल्कि यह मानवता के खिलाफ भी अपराध है और सीधे तौर पर मानवाधिकारों को प्रभावित करता है। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालत को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि याचिकाकर्ता किस पद पर रह चुका है और इस कारण उसके पास सरकारी तंत्र के कामकाज में हस्तक्षेप करने या गवाहों को प्रभावित करने की कितनी क्षमता हो सकती है। महेश को निजी स्कूलों से संबंधित 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाला मामले में सोमवार को गिरफ्तार किया गया।
आरोप है कि महेश ने 2021 से 2026 तक स्कूल शिक्षा मंत्री रहते हुए 1,000 से अधिक निजी स्कूलों के प्रबंधन से ‘पार्टी फंड’ के नाम पर पैसे वसूले और इसके बदले स्कूलों को स्थायी मान्यता और अन्य प्रशासनिक मंजूरियां दी गईं।

