निर्णय सागर जी महाराज का 30वां दीक्षा दिवस:मुनि श्री बोले- संयम का अर्थ सिर्फ बाहरी नियम निभाना नहीं, बल्कि मन-वचन पर नियंत्रण रखना

निर्णय सागर जी महाराज का 30वां दीक्षा दिवस:मुनि श्री बोले- संयम का अर्थ सिर्फ बाहरी नियम निभाना नहीं, बल्कि मन-वचन पर नियंत्रण रखना

विदिशा के शीतलधाम स्थित बड़े बाबा मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। अभिषेक, शांतिधारा और संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के पूजन-अर्चना से धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। इस अवसर पर मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी महाराज का 30वां दीक्षा दिवस और पिच्छी परिवर्तन समारोह भी भव्यता से मनाया गया। आयोजन में विदिशा के अलावा भोपाल, बैरसिया, लटेरी, सिरोंज, गैरतगंज और सिलवानी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग पहुंचे। मुनि श्री ने कहा- वाणी और विचारों पर रखें नियंत्रण पिच्छी परिवर्तन के उपरांत आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री निर्णय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म और गुरु की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि संयम का अर्थ सिर्फ बाहरी नियम निभाना नहीं, बल्कि मन, वचन और काया पर नियंत्रण रखना है। यदि व्यक्ति अपनी वाणी और विचारों में संयम रखे, तो जीवन में कई विवादों से बच सकता है। आवश्यकता से अधिक वस्तुओं के संग्रह से बचने, सादगी अपनाने और अहिंसा व करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि धर्म की बातों को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें अपने रोजाना के व्यवहार में भी उतारें। 1997 में आचार्य विद्यासागर जी से ली थी मुनि दीक्षा मुनि श्री 108 निर्णय सागर जी का जन्म 12 सितंबर 1969 को सिरोंज क्षेत्र के ग्राम मुरारिया में हुआ था। उनका पूर्वाश्रम का नाम रंजन कुमार जैन था। उन्होंने 16 जनवरी 1990 को ब्रह्मचर्य व्रत, 1995 में क्षुल्लक और 1996 में ऐलक दीक्षा ली। इसके बाद 16 अक्टूबर 1997 को देवास जिले के सिद्धक्षेत्र नेमावर में उन्होंने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के कर-कमलों से मुनि दीक्षा ग्रहण की थी। श्रद्धालुओं ने उनके त्याग और तपस्या की अनुमोदना करते हुए श्रीफल समर्पित किए। अब पुरुषों के लिए भी शुरू होगी धार्मिक पाठशाला इस मौके पर समाज में धार्मिक ज्ञान के विस्तार के लिए एक नई पहल की घोषणा की गई। अब तक शहर में बच्चों और महिलाओं के लिए धार्मिक पाठशालाएं चल रही थीं, लेकिन अब पुरुषों के लिए भी रोजाना पाठशाला आयोजित की जाएगी। इसमें जैन दर्शन, पूजा विधि और नैतिक जीवन से जुड़े विषयों की शिक्षा दी जाएगी। दिनभर चले अनुष्ठानों और धर्मसभा के बाद देर शाम बड़े बाबा की महाआरती के साथ आयोजन का समापन हुआ।

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