अररिया में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए जिले में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ चलाया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार की इस पहल के तहत चिह्नित विद्यालयों में विधिक साक्षरता और बाल सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देना और उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों, अभिभावकों और समाज को जागरूक करना है। इस अभियान के सफल संचालन को लेकर अररिया व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय में बैठक हुई। इसमें अभियान की रूपरेखा, विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर चर्चा की गई। ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ अभियान की थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ रखी गई है। इसके तहत बच्चों को बाल अधिकार, यौन उत्पीड़न से बचाव, साइबर सुरक्षा और संभावित खतरों की पहचान करने की जानकारी दी जाएगी। बच्चों को किसी भी परेशानी या खतरे की स्थिति में मदद लेने के तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा। दो चरणों में संचालित होगा अभियान ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ को दो चरणों में चलाने की योजना है। इसके दूसरे चरण की अवधि नवंबर 2026 से नवंबर 2027 तक निर्धारित की गई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा, अररिया से विद्यालयों की सूची प्राप्त होने के बाद कार्यक्रम के लिए स्कूलों को चिह्नित किया गया है। न्यायिक-बाल संरक्षण विभागों की रहेगी भागीदारी अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पैनल अधिवक्ताओं, बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों, पारा विधिक स्वयंसेवकों, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिला बाल संरक्षण इकाई के विधि सह परिवीक्षा अधिकारी और सदर अस्पताल, अररिया के मनोवैज्ञानिक भी अभियान में शामिल होंगे। न्यायिक पदाधिकारी भी कार्यक्रम के संचालन में सहयोग करेंगे। बच्चों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी करेंगे जागरूक विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों तक भी बाल सुरक्षा का संदेश पहुंचाने की योजना है। अभियान के जरिए बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने, खतरे की स्थिति में मदद लेने और जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। अररिया में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल सुरक्षा सुनिश्चित करने और यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए जिले में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ चलाया जाएगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार की इस पहल के तहत चिह्नित विद्यालयों में विधिक साक्षरता और बाल सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जानकारी देना और उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों, अभिभावकों और समाज को जागरूक करना है। इस अभियान के सफल संचालन को लेकर अररिया व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार कार्यालय में बैठक हुई। इसमें अभियान की रूपरेखा, विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर चर्चा की गई। ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ अभियान की थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण हर बच्चे का अधिकार’ रखी गई है। इसके तहत बच्चों को बाल अधिकार, यौन उत्पीड़न से बचाव, साइबर सुरक्षा और संभावित खतरों की पहचान करने की जानकारी दी जाएगी। बच्चों को किसी भी परेशानी या खतरे की स्थिति में मदद लेने के तरीकों के बारे में भी बताया जाएगा। दो चरणों में संचालित होगा अभियान ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ को दो चरणों में चलाने की योजना है। इसके दूसरे चरण की अवधि नवंबर 2026 से नवंबर 2027 तक निर्धारित की गई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा, अररिया से विद्यालयों की सूची प्राप्त होने के बाद कार्यक्रम के लिए स्कूलों को चिह्नित किया गया है। न्यायिक-बाल संरक्षण विभागों की रहेगी भागीदारी अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पैनल अधिवक्ताओं, बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों, पारा विधिक स्वयंसेवकों, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। जिला बाल संरक्षण इकाई के विधि सह परिवीक्षा अधिकारी और सदर अस्पताल, अररिया के मनोवैज्ञानिक भी अभियान में शामिल होंगे। न्यायिक पदाधिकारी भी कार्यक्रम के संचालन में सहयोग करेंगे। बच्चों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों को भी करेंगे जागरूक विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों तक भी बाल सुरक्षा का संदेश पहुंचाने की योजना है। अभियान के जरिए बच्चों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने, खतरे की स्थिति में मदद लेने और जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

