अररिया की स्थानीय समस्याओं और आम लोगों के संघर्षों पर आधारित पुस्तक ‘संघर्ष – कहानी एक जिले की, हाल पूरे देश का’ का विमोचन किया गया। एडीबी चौक पर आयोजित कार्यक्रम में फैसल जावेद यासीन की शिक्षिका मीनू शरण और उनकी चचेरी दादी मोहसिना खातून ने पुस्तक का अनावरण किया। 160 पेज की किताब में 32 अध्याय यह पुस्तक फैसल जावेद यासीन और ओम प्रकाश राय ने लिखी है। 160 पेज और 32 अध्यायों वाली इस किताब में अररिया की समस्याओं के जरिए देश की व्यवस्था और आम लोगों की चुनौतियों को समझने की कोशिश की गई है। पुस्तक में भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, खाद की कमी, अस्पतालों की बदहाली और जनआंदोलनों जैसे मुद्दों को जगह दी गई है। इसमें सामाजिक सद्भाव और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की आवाज भी शामिल है। लेखकों का उद्देश्य जिले की समस्याओं को सामने लाना है। आम लोगों की आवाज को सामने लाने की कोशिश कार्यक्रम में साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए। उन्होंने पुस्तक के विषयों पर अपने विचार रखे। इस मौके पर फैसल जावेद यासीन ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ उनकी कहानी नहीं है, बल्कि उन आम लोगों की आवाज है, जिनकी समस्याएं अक्सर व्यवस्था के बीच दब जाती हैं। पुस्तक के जरिए लेखकों ने अररिया के अनुभवों और चुनौतियों को सामने रखने का प्रयास किया है। स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित यह किताब पाठकों को जिले की समस्याओं, सामाजिक संबंधों और बदलाव के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विचार करने का अवसर देती है। अररिया की स्थानीय समस्याओं और आम लोगों के संघर्षों पर आधारित पुस्तक ‘संघर्ष – कहानी एक जिले की, हाल पूरे देश का’ का विमोचन किया गया। एडीबी चौक पर आयोजित कार्यक्रम में फैसल जावेद यासीन की शिक्षिका मीनू शरण और उनकी चचेरी दादी मोहसिना खातून ने पुस्तक का अनावरण किया। 160 पेज की किताब में 32 अध्याय यह पुस्तक फैसल जावेद यासीन और ओम प्रकाश राय ने लिखी है। 160 पेज और 32 अध्यायों वाली इस किताब में अररिया की समस्याओं के जरिए देश की व्यवस्था और आम लोगों की चुनौतियों को समझने की कोशिश की गई है। पुस्तक में भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, खाद की कमी, अस्पतालों की बदहाली और जनआंदोलनों जैसे मुद्दों को जगह दी गई है। इसमें सामाजिक सद्भाव और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की आवाज भी शामिल है। लेखकों का उद्देश्य जिले की समस्याओं को सामने लाना है। आम लोगों की आवाज को सामने लाने की कोशिश कार्यक्रम में साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए। उन्होंने पुस्तक के विषयों पर अपने विचार रखे। इस मौके पर फैसल जावेद यासीन ने कहा कि यह पुस्तक सिर्फ उनकी कहानी नहीं है, बल्कि उन आम लोगों की आवाज है, जिनकी समस्याएं अक्सर व्यवस्था के बीच दब जाती हैं। पुस्तक के जरिए लेखकों ने अररिया के अनुभवों और चुनौतियों को सामने रखने का प्रयास किया है। स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित यह किताब पाठकों को जिले की समस्याओं, सामाजिक संबंधों और बदलाव के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विचार करने का अवसर देती है।

