पश्चिम चंपारण के योगापट्टी प्रखंड की खुटवनिया-जरलपुर पंचायत में गंडक नदी के सोते पर पुल नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। जरलपुर से गजना-बैसिया सड़क पर करीब 50 मीटर तक पानी जमा रहता है। रविवार को इसी पानी में डूबने से 10 साल के एक बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद सोमवार को ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रदर्शन कर जल्द पुल बनाने की मांग की। 50 मीटर तक पानी, हादसों का बना रहता है खतरा ग्रामीणों के मुताबिक, सोते में कई महीनों तक पानी जमा रहता है। इससे लोगों को रोजाना आने-जाने में परेशानी होती है। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण की मांग कई सालों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह सड़क दर्जनों गांवों को जोड़ती है। पुल नहीं होने के कारण लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी आसान होगा। अप्रैल से सितंबर तक बच्चों की पढ़ाई पर असर ग्रामीणों ने बताया कि जलजमाव के कारण शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। अप्रैल से सितंबर तक प्राथमिक विद्यालय का संचालन प्रभावित रहता है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। वहीं, शिक्षकों को भी प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) में उपस्थिति दर्ज कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई नियमित हो सकेगी और शिक्षकों को भी आने-जाने में राहत मिलेगी। प्रशासन और विधायक से जल्द पुल बनाने की मांग प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन और स्थानीय विधायक से पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने की मांग की। उनका कहना है कि इस समस्या को प्राथमिकता से हल किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का आवागमन सुरक्षित हो सके। ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते पुल का निर्माण कराया जाता है, तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है। पश्चिम चंपारण के योगापट्टी प्रखंड की खुटवनिया-जरलपुर पंचायत में गंडक नदी के सोते पर पुल नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। जरलपुर से गजना-बैसिया सड़क पर करीब 50 मीटर तक पानी जमा रहता है। रविवार को इसी पानी में डूबने से 10 साल के एक बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद सोमवार को ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रदर्शन कर जल्द पुल बनाने की मांग की। 50 मीटर तक पानी, हादसों का बना रहता है खतरा ग्रामीणों के मुताबिक, सोते में कई महीनों तक पानी जमा रहता है। इससे लोगों को रोजाना आने-जाने में परेशानी होती है। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण की मांग कई सालों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह सड़क दर्जनों गांवों को जोड़ती है। पुल नहीं होने के कारण लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी आसान होगा। अप्रैल से सितंबर तक बच्चों की पढ़ाई पर असर ग्रामीणों ने बताया कि जलजमाव के कारण शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। अप्रैल से सितंबर तक प्राथमिक विद्यालय का संचालन प्रभावित रहता है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। वहीं, शिक्षकों को भी प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) में उपस्थिति दर्ज कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, पुल बनने से बच्चों की पढ़ाई नियमित हो सकेगी और शिक्षकों को भी आने-जाने में राहत मिलेगी। प्रशासन और विधायक से जल्द पुल बनाने की मांग प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने सरकार, प्रशासन और स्थानीय विधायक से पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने की मांग की। उनका कहना है कि इस समस्या को प्राथमिकता से हल किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का आवागमन सुरक्षित हो सके। ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते पुल का निर्माण कराया जाता है, तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

